Saturday, June 1, 2013

OSHO: यह तो मैखाना है, मधुशाला है।

 यहां तो पियक्कड़ों की जमात है। ये रिंद बैठे हैं।

यहां तो अदृश्य शराब पीई जा रही है, पिलाई जा रही है। अगर पीना हो, तो पीओ। और अगर हिम्मत हो, तो ही पी पाओगे। क्योंकि यहां किसी परंपरा की बात नहीं हो रही है। यहां शुद्ध सत्य की बात हो रही है। यहां किसी परंपरा का पोषण नहीं है। क्योंकि मैं मानता ही नहीं कि परंपरा और सत्य का कभी कोई संबंध होता है। सत्य तो सदा नूतन होता है; नित-नूतन होता है--जैसे सुबह की ओस के कण--इतना ताजा होता है। 

This is a pub

This is a pub, a tavern. This is a gathering of drunkards. The intoxicated are sitting here. An invisible wine is being served and drunk here. Drink, if you want. And you will drink only if you have courage, because here it is not a talk about any tradition, the pure truth is being imparted here. No tradition is being nourished here, because I don't see any connection between tradition and the truth. is always new, ever new -- as fresh as the morning dewdrop.

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