शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026

विश्व रेडियो दिवस लोगों की विश्वसनीय आवाज़ का जश्न मनाने का दिन है: प्रधानमंत्री

 प्रधानमंत्री कार्यालय//प्रविष्टि तिथि:13 FEB 2026  at 12:08PM by PIB Delhi Regarding World Radio Day

प्रधानमंत्री ने गिनवाई रेडियो की खूबियां 


नई दिल्ली: 13 फरवरी 2026: (पीआईबी दिल्ली//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी डेस्क)::

कोई ज़माना था जब गांवों और शहरों रेडियो ही हमारा संगी साथी हुआ करता था। सभी लोग सिनेमा नहीं जाते थे। रंगमंच भी सभी की पहुँच में नहीं था और दूरदर्शन अभी देश के कोने कोने तक नहीं पहुंचा था। उस समय रेडियो ही हमें देश और दुनिया की खबरें देता था और रेडिओ से ही हम गीत संगीत सुना करते थे और रेडियो ही हमें ड्रामे का मज़ा भी दिया करता था। आकाशवाणी के जालंधर केंद्र से पंजाबी गीतों के साथ साथ गीत संगीत भी बहुत लोकप्रिय हुआ करता था। देहाती प्रोग्राम को सुनने का एक अलग ही मज़ा था। उस प्रोग्राम के पात्र आज भी बहुत याद आते हैं। रौणकी राम, ठण्डु राम, भाईया जी और मास्टर जी से सभी का दिल जुड़ा हुआ था। 

आकाशवाणी जालंधर के साथ साथ आल इंडिया रेडियो दिल्ली से उर्दू सर्विस का अलग ही मज़ा था। रात्रि को तामील-ए-इरशाद हम कभी मिस नहीं करते थे। आकाशवाणी के साथ साथ बीबीसी लंदन और रेडियो सिलौन का भी अपना अलग ही रंग था। बिनाका गीत माला हर घर  में सुना जाता था। इस तरह रेडियो परिवार का एक हिस्सा बना हुआ था। 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि विश्व रेडियो दिवस एक ऐसे मीडिया का जश्न मनाने का अवसर है जो दूरदराज के गांवों से लेकर हलचल भरे शहरों तक, लोगों की विश्वसनीय आवाज है। श्री मोदी ने कहा कि वर्षों से रेडियो समय पर सूचना पहुंचाता रहा है, प्रतिभा को निखारता रहा है और सृजनात्मकता को प्रोत्साहित करता रहा है।

श्री मोदी ने कहा, “मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से मैंने हमारे लोगों की सामाजिक शक्ति को उजागर करने में रेडियो की क्षमता का प्रत्यक्ष अनुभव किया है। इस महीने का कार्यक्रम 22 फरवरी दिन रविवार को प्रसारित होगा। कृपया कार्यक्रम के लिए अपने सुझाव अवश्य साझा करें।”

प्रधानमंत्री ने X पर पोस्ट किया:

#MannKiBaat के माध्यम से मैंने हमारे लोगों की सामाजिक शक्ति को उजागर करने में रेडियो की क्षमता का प्रत्यक्ष अनुभव किया है। इस महीने का कार्यक्रम रविवार, 22 फरवरी को प्रसारित होगा। कार्यक्रम के लिए अपने सुझाव अवश्य साझा करें।

https://mygov.in/group-issue/inviting-ideas-mann-ki-baat-prime-minister-narendra-modi-22nd-february-2026/?target=inapp&type=group_issue&nid=366266

आजकल बदले हुए समय के साथ साथ रेडियो ने फिर अपने आप को अपडेट किया है। हिंदी, उर्दू और पंजाबी साहित्य से सबंधित बहुत से प्रोग्राम प्रस्तुत किए जाते हैं। गीत संगीत और परिचर्चाएं बहुत ही जानकारी भरी होती हैं। दिलचस्प बात यह है की अब आप आकाशवाणी के सभी केंद्रों के कार्यक्रम अपने मोबाईल पर इंटरनेट  के ज़रिए भी सुन सकते हैं। एक के बाद एक दिलचस्प प्रोग्राम नै पीढ़ी को भी रेडिओ से जोड़ रहे हैं। आपको रेडिओ कैसा लगता है अवश्य बताएं।  आपके विचारों की इंतज़ार तो रहेगी ही। 

***//पीके/केसी/एके//(रिलीज़ आईडी: 2227471)

बुधवार, 26 नवंबर 2025

पर्दे पर किरदारों को गढ़ना:

 

 एका लखानी ने इफ्फी में फिल्मों के परिधानों के जादू को उजागर किया

*पोन्नियिन सेलवन से ओके जानू तक कॉस्ट्यूम डिज़ाइन का एक सिनेमाई सफ़र

*एका ने परिधानों के ज़रिए नंदिनी, तारा और रॉकी को डिकोड करके दर्शकों का मन मोह लिया

गोवा में जारी इफ्फी में, 'वेशभूषा और चरित्र निर्माण: सिनेमा के ट्रेंडसेटरशीर्षक वाला साक्षात्कार सत्र एक मास्टरक्लास में तब्दील हो गया, जिसमें इस बात पर चर्चा की गई कि कैसे परिधान महज़ पात्रों को ही नहीं सजातेबल्कि खामोशी से उनकी कहानियों को आकार देते हैउन्हें दिशा देते है और कभी-कभी तो उन्हें नए शब्दों में बयां करते हैं। मशहूर कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर एका लखानी के और फिल्म निर्माता जयप्रद देसाई के इस सत्र में दर्शकों को पर्दे के पीछे की उस दुनिया में जाने का एक अनूठा अवसर मिला, जहाँ परिधान और फिल्म निर्माण का मिलन होता है।

सत्र की शुरुआत करते हुएजयप्रद ने एक साधारण सी सच्चाई बताकर माहौल तैयार किया: "किसी पात्र के बोलने से पहलेउसकी वेशभूषा बहुत कुछ कह चुकी होती है।" और इसी के साथ एका ने अपने 15  साल के सफ़र का ज़िक्र कियाजो हाई-फ़ैशन रनवे के सपनों से शुरू हुआ थालेकिन आखिरकार सिनेमा की शोररंग और रचनात्मक उहापोह में बदल गया।

मणिरत्नम का जादू

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एका ने मणिरत्नम की फिल्म 'रावणके सेट पर सब्यसाची मुखर्जी के साथ इंटर्नशिप करते हुए अपने शुरुआती दिनों को याद किया। उन्होंने कहा, "मुझे लगता था कि फ़ैशन का मतलब सुंदर कपड़े बनाना हैलेकिन रावण ने मुझे सिखाया कि सुंदरता भावनाओं के साथ आती है।" सब्यसाची के साथउन्होंने सीखा कि कैसे रंग एक फ्रेम में समा जाते हैंऔर कैसे कॉस्ट्यूम डिज़ाइन महज़ एक विभाग नहींबल्कि एक भाषा है। 'रावणमें उनके काम ने सिनेमैटोग्राफर संतोष सिवन को प्रभावित कियाजिन्होंने उन्हें सिर्फ़ 23 साल की उम्र में 'उरुमीफ़िल्म ऑफर की थी। उन्होंने कहा, "असली सफ़र यहीं से शुरू हुआ।"

एका की रचनात्मक प्रक्रिया, निर्देशक के साथ लंबी बातचीत से शुरू होती हैजिसके बाद स्क्रिप्ट पर गहराई से विचार किया जाता है। उन्होंने बताया कि मणिरत्नम जैसे फिल्म निर्माताओं के साथसहयोग और भी पहले शुरू हो जाता हैकभी-कभी लेखन के बीच में ही इस पर काम होने लगता है।

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उन्होंने कहा, "मणि सर मुझे स्क्रिप्टिंग के चरण में शामिल करते हैं। जब मैं समझ जाती हूँ कि कोई किरदार कैसे कपड़े पहनता हैतो वे उस किरदार के व्यवहार के बारे में ज़्यादा समझ पाते हैं।" उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि कॉस्ट्यूम डिज़ाइन किस तरह से कहानी के विकल्पों को आकार दे सकता है।

"सिनेमा टीमवर्क है," उन्होंने ज़ोर देकर कहा। "मैं सबसे खूबसूरत पोशाक बनाने की कोशिश नहीं कर रही हूँ। मैं सही पोशाक बनाने की कोशिश कर रही हूँजो अभिनेता को सहजता से किरदार में ढलने दे।" उनकी कार्यप्रणाली में संदर्भों की खोजविजुअल जर्नलिंगविस्तृत नोट्स बनाना और अपनी टीम के साथ बेहतर सहयोग शामिल है।

पोन्नियिन सेल्वन: परिधानों में लिखा इतिहास

पोन्नियिन सेल्वन के लिएमणिरत्नम ने एका को एक भी डिज़ाइन बनाने से पहले तंजावुर भेजा था। यह यात्रा उनके लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई, क्योंकि एका ने मंदिर के कांस्यमूर्तियों और रूपांकनों के ज़रिए चोल युग की भव्यता को गहराई से समझाजिसने आखिरकार फिल्म के विजुअल की दुनिया को आकार दिया।

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फिर उन्होंने किरदारों के रूप-रंग को कई हिस्सों में बांटा और सत्र को एक छोटे फिल्म स्कूल में बदल दिया: उन्होंने बताया कि नंदिनी को मोह और शक्ति की भाषा में रचा गया थाउसकी वेशभूषा उसके चुंबकीय आकर्षण और शक्ति की भूख को दर्शाती है। दूसरी ओरकुंदवई "शक्ति के साथ जन्मी" थीऔर उसका रूप उस सहज अधिकार को दर्शाता है: शांत और संयमित। आदित्य करिकालन का रंग-रूप उनकी आंतरिक उथल-पुथल से प्रेरित था। उनका क्रोधपीड़ा और भावनात्मक बेचैनी गहरे लाल और काले रंगों में दर्शाई गई। इसके उलटअरुलमोझी वर्मन की लोगों के शांतप्रिय नेता के रूप में कल्पना की गई थीजिससे एका ने उन्हें शांत आइवरी और कोमल सुनहरे रंग पहनाए, जो उनकी स्पष्टताकरुणा और शांत कुलीनता को दर्शाते थे।

दो तारेदो दुनिया और संजू का पुनर्जन्म

एका ने यह भी बताया कि कैसे एक ही किरदारताराको 'ओके कनमनीऔर 'ओके जानूमें दो बिल्कुल अलग परिधानों की ज़रुरत पड़ी। उन्होंने बताया कि दर्शकों की संवेदनशीलता किस तरह परिधानों के चुनाव को प्रभावित करती है, "तमिल मेंतारा को लोगों से जुड़ाव महसूस कराना था। हिंदी मेंउसे महत्वाकांक्षी होना था।" उन्होंने श्रद्धा कपूर की अब तक की सबसे चर्चित 'हम्मा हम्माशॉर्ट्स को कुशन कवर बदलने से आखिरी समय में बदलने का एक मज़ेदार किस्सा भी साझा किया।

'संजूपर काम करते वक्तएका ने ज़्यादा शोध-आधारित नज़रिया अपनाया और लगभग पूरी सटीकता के साथ संदर्भों को जोड़ा। उन्होंने किरदार के लुक को एक साथ ढालने में मदद के लिए मेकअप और हेयर टीमप्रोडक्शन डिज़ाइनरों और फ़ोटोग्राफ़रों के निर्देशकों (डीओपी) को श्रेय दिया। उन्होंने कहा, "डीओपी एक कस्टमर के के सबसे अच्छे दोस्त होते हैं। वे आपको बता देंगे कि कोई रंग स्क्रीन पर आप पर अच्छा लगेगा या नहीं।

एका ने 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानीका उदाहरण देते हुए अपनी बात खत्म कीजहाँ रॉकी का बदलता परिधान, उसके व्यक्तित्व के विकास को दर्शाता है। दर्शकों को रॉकी के लुक को समझने में बहुत मज़ा आया और उन्हें यह भी पता चला कि वेशभूषा किसी किरदार को कैसे परिभाषित करती है। सत्र के खत्म होते होते यह साफ हो गया कि वेशभूषा महज़ एक दृश्य सजावट से कहीं बढ़कर हैवे कहानी कहने के साधन हैं जो किरदारों में जान फूंकते हैं। एका लखानी की दुनिया मेंहर सिलाई का एक मकसद होता है और हर रंग का एक अर्थ होता है।

इफ्फी के बारे में

1952 में शुरू हुआ भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) दक्षिण एशिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े सिनेमा उत्सव के रूप में आज भी प्रतिष्ठित स्थान रखता है। राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी)सूचना एवं प्रसारण मंत्रालयभारत सरकार और गोवा मनोरंजन सोसायटी (ईएसजी)गोवा सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजितयह महोत्सव एक वैश्विक सिनेमाई शक्ति के रूप में विकसित हुआ है, जहाँ पुनर्स्थापित क्लासिक फ़िल्मों का साहसिक प्रयोगों के साथ मिलना होता हैऔर दिग्गज कलाकार, पहली बार आने वाले हुनरमंद कलाकारों के साथ मंच साझा करते हैं। इफ्फी को वास्तव में शानदार बनाने वाला इसका शानदार सिनेमा की विधाओं का सम्मिश्रण है- अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताएँसांस्कृतिक प्रदर्शनियाँमास्टरक्लासश्रद्धांजलि और ऊर्जावान वेव्स फिल्म बाज़ारजहाँ विचारसौदे और सहयोग उड़ान भरते हैं। 20 से 28 नवंबर तक गोवा की शानदार झिलमिलाते तटीय इलाके में आयोजित56वाँ संस्करण भाषाओंशैलियोंनवाचारों और आवाज़ों की एक चकाचौंध भरी श्रृंखला का वादा करता है, जहां विश्व मंच पर भारत की रचनात्मक प्रतिभा का एक गहन उत्सव देखने को मिलता है।

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पीके/केसी/एनएस/एसएस//रिलीज़ आईडी: 2195038

पूरे देश में लेबर कोड के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

Received on Wednesday 26th November 2025 at 12:48 PM Regarding  Protest Against New Labor Code Bills 

वाम ने पंजाब में चलाई तीखे विरोध की आंधी-कांग्रेस भी साथ 

लुधियाना में नोटिफिकेशन की कॉपियां जलाई गईं और प्रधानमंत्री को मेमोरेंडम भेजा गया


लुधियाना
: (मीडिया लिंक रविंदर//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी डेस्क)::


सेंट्रल ट्रेड यूनियनों के जॉइंट फोरम के देशव्यापी आह्वान पर,
यूनाइटेड फ्रंट ऑफ ट्रेड यूनियंस लुधियाना ने आज लेबर कोड के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। लेबर विरोधी कोड को एकतरफा लागू करने वाले नोटिफिकेशन की कॉपियां जलाई गईं और डिप्टी कमिश्नर के जरिए प्रधानमंत्री को मेमोरेंडम दिया गया। मेमोरेंडम में कहा गया कि 21 नवंबर, 2025 को जारी किया गया नोटिफिकेशन डेमोक्रेटिक प्रोसेस को नज़रअंदाज़ करके वेलफेयर स्टेट की मूल भावना और प्रकृति पर हमला है। दस सेंट्रल ट्रेड यूनियनों ने लगातार इन कोड का विरोध किया है और इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस बुलाने की मांग की है, लेकिन यह कॉन्फ्रेंस 2015 के बाद पिछले दस सालों से नहीं हुई है।   आप इस वीडियो की झलक पंजवी के वाम दैनिक नवां ज़माना में भी देख सकते हैं बस यहाँ क्लिक करके। 


ट्रेड यूनियनों ने
आरोप लगाया कि सरकार ने मज़दूरों, उनकी हड़तालों और प्रदर्शनों को नजरअंदाज करके कॉर्पोरेट हितों के तहत इन कोड को लागू किया है। इन कोड को मज़दूरों की ज़िंदगी, अधिकारों और जॉब सिक्योरिटी पर गंभीर हमला बताया गया। सेंट्रल ट्रेड यूनियनों ने चेतावनी दी कि यह नोटिफिकेशन गहरी बेरोज़गारी और मंदी के समय में मज़दूर वर्ग पर ‘जंग का ऐलान’ है। उन्होंने लेबर कोड को तुरंत रद्द करने और पुराने लेबर कानूनों को फिर से लागू करने की मांग की।

वक्ताओं ने कहा कि इन कोड के खिलाफ लगातार संघर्ष जारी रखा जाएगा और इसे और तेज़ किया जाएगा। देश के मज़दूर वर्ग के साथ-साथ लुधियाना की ट्रेड यूनियनें भी मज़दूरों के प्रति सरकार के कॉर्पोरेट-समर्थक और जन-विरोधी रवैये के खिलाफ लगातार संघर्ष में शामिल होंगी।


इस एक्शन को AIT, INTUC, CITU और CTU पंजाब के नेताओं – एम.एस. भाटिया, गुरजीत सिंह जगपाल, जगदीश चंद, विजय कुमार सरबजीत सिंह सरहाली और परमजीत सिंह ने लीड किया। कई और यूनियन नेता भी मौजूद थे।

सोमवार, 6 अक्टूबर 2025

बाढ़ के बाद पंजाब की मिट्टी के बदलते रसायन

Received on Monday 6th October 2025 at 11:32 AM PAU Decodes the Changing Chemistry

इस विज्ञान को समझने में पीएयू की रही विशेष भूमिका 


लुधियाना
: 6 अक्टूबर, 2025: (मीडिया लिंक रविंदर//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग TV)::

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना ने पूरे पंजाब में बाढ़ प्रभावित मिट्टी का एक व्यापक विश्लेषण जारी किया है, जिससे पता चलता है कि हाल ही में आई बाढ़ ने कृषि भूमि को जटिल रूप से बदल दिया है। हिमालय की तलहटी से जमा लाल गाद ने जहाँ कुछ क्षेत्रों को खनिजों से समृद्ध किया है, वहीं बाढ़ ने पोषक तत्वों में असंतुलन, कठोर मिट्टी का निर्माण और रबी फसल उत्पादकता के लिए संभावित खतरे भी पैदा किए हैं।

पीएयू के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने कहा कि बाढ़ ने पंजाब की कृषि की नींव, यानी उसकी मिट्टी, को ही बदल दिया है। उन्होंने बताया कि हालाँकि आने वाली पहाड़ी मिट्टी में फसलों के लिए लाभकारी खनिज होते हैं, लेकिन इसने राज्य की मूल मिट्टी की संरचना को बिगाड़ दिया है। अब चुनौती संतुलन बहाल करने की है। उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय ने प्रभावित जिलों में मिट्टी के नमूनों का परीक्षण करने और रबी की बुवाई का मौसम शुरू होने से पहले किसानों को सुधारात्मक उपायों के बारे में मार्गदर्शन देने के लिए टीमें गठित की हैं।

डॉ. राजीव सिक्का की देखरेख में, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के मृदा विज्ञान विभाग ने अमृतसर, गुरदासपुर, फिरोजपुर, कपूरथला और पटियाला के गाँवों में परीक्षण किए। परिणामों से तलछट की गहराई, बनावट और संरचना में व्यापक भिन्नताएँ सामने आईं। कुछ खेत एक मीटर से भी ज़्यादा गहरे तलछट के नीचे दबे हुए थे, जबकि अन्य में पतली परतें थीं। तलछट की बनावट रेतीली से लेकर महीन दोमट मिट्टी तक थी, और पीएच मान क्षारीय पाए गए। विद्युत चालकता आम तौर पर कम थी, जिससे लवणता का कोई बड़ा खतरा नहीं होने का संकेत मिलता है।

डॉ. सिक्का के अनुसार, मिट्टी में कार्बनिक कार्बन की मात्रा उत्साहजनक रूप से उच्च थी, जो पंजाब के सामान्य 0.5 प्रतिशत की तुलना में औसतन 0.75 प्रतिशत से अधिक थी। कुछ नमूनों में, यह एक प्रतिशत से भी अधिक थी। हालाँकि, अधिक रेत जमाव वाले क्षेत्रों में कार्बन की मात्रा कम दर्ज की गई। फॉस्फोरस और पोटेशियम के स्तर में भिन्नता थी, जबकि लौह और मैंगनीज जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व सामान्य से कहीं अधिक मात्रा में पाए गए। उन्होंने बताया कि लौह का बढ़ा हुआ स्तर बाढ़ के पानी के साथ लाए गए लौह-लेपित रेत कणों के कारण हो सकता है।

अनुसंधान निदेशक डॉ. अजमेर सिंह ढट्ट ने बताया कि कई जगहों पर तलछट जमाव के कारण सतही और उपसतही कठोर सतहें विकसित हो गई हैं, जो जल-रिसाव और जड़ों की वृद्धि में बाधा डाल सकती हैं। उन्होंने भारी मिट्टी में सरंध्रता बहाल करने के लिए छेनी वाले हल से गहरी जुताई करने की सलाह दी, जबकि हल्की मिट्टी में, परतों के निर्माण को रोकने के लिए जमा हुई गाद और चिकनी मिट्टी को अच्छी तरह मिला देना चाहिए।

विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. मक्खन सिंह भुल्लर ने किसानों से मिट्टी में जैविक पदार्थ मिलाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि गोबर की खाद, मुर्गी की खाद और हरी खाद मिट्टी की संरचना के पुनर्निर्माण, सूक्ष्मजीवी गतिविधि को प्रोत्साहित करने और स्वस्थ जड़ प्रणालियों को सहारा देने में मदद कर सकती है। उन्होंने धान की पराली को जलाने से बचने और इसकी बजाय इसे मिट्टी में मिलाकर उर्वरता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया।

रबी मौसम के लिए, पीएयू ने किसानों को विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित उर्वरक खुराक का पालन करने और वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए बुवाई के लगभग 40 से 50 दिन बाद 2 प्रतिशत यूरिया का छिड़काव (200 लीटर पानी में 4 किलो यूरिया घोलकर तैयार) करने की सलाह दी है। गेहूँ और बरसीम की फसलों में मैंगनीज की कमी पर नज़र रखनी चाहिए; यदि लक्षण दिखाई दें, तो मैंगनीज सल्फेट (प्रति एकड़ 100 लीटर पानी में मैंगनीज सल्फेट का 0.5% घोल) का 0.5 प्रतिशत पत्तियों पर छिड़काव करने की सलाह दी जाती है और एक सप्ताह बाद इसे दोहराया जाना चाहिए।

डॉ. गोसल ने कहा कि बाढ़ ने वर्तमान और आगामी फसल चक्रों को बाधित किया हो सकता है, लेकिन समय पर मृदा प्रबंधन इस बाधा को अवसर में बदल सकता है। समन्वित परीक्षण, लक्षित पोषक तत्व प्रबंधन और सामुदायिक स्तर पर विस्तार सहायता के साथ, पीएयू का लक्ष्य पंजाब के किसानों को पंजाब की कृषि भूमि की उर्वरता और लचीलापन बहाल करने में मदद करना है।

गुरुवार, 28 अगस्त 2025

5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए समय पर आधार अनिवार्य

इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 27 AUG 2025 5:29PM by PIB Delhi

बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) सुनिश्चित करने का भी आह्वान

यूआईडीएआई ने देश भर के स्कूलों से 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए समय पर आधार अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) सुनिश्चित करने का आह्वान किया

यूआईडीएआई के सीईओ ने राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर स्कूलों में शिविर लगाकर लंबित एमबीयू को पूरा करने का आग्रह किया

यूआईडीएआई और शिक्षा मंत्रालय ने यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई+) प्लेटफॉर्म पर लगभग 17 करोड़ बच्चों के लिए आधार में लंबित एमबीयू को सुगम बनाने के लिए हाथ मिलाया


नई दिल्ली
: 27 अगस्त 2025: (PIB Delhi//पंजाब स्क्रीन Blog TV)::

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने स्कूली बच्चों की आधार से संबंधित अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) की स्थिति यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई+) एप्लीकेशन पर उपलब्ध कराने के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के साथ हाथ मिलाया है -यह एक ऐसा कदम है, जिससे करोड़ों छात्रों के लिए आधार में एमबीयू की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

पाँच वर्ष की आयु के बच्चों और पन्‍द्रह वर्ष की आयु के बच्चों के लिए आधार में एमबीयू (एमबीयू) का समय पर पूरा होना एक अनिवार्य आवश्यकता है। आधार में बच्चों के बायोमेट्रिक डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है। लगभग 17 करोड़ आधार संख्याएँ ऐसी हैं जिनमें अनिवार्य बायोमेट्रिक्स अपडेट लंबित है।

आधार में बायोमेट्रिक्स अपडेट करना बच्चे के लिए ज़रूरी है, अन्यथा बाद में विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत लाभ प्राप्त करने, नीट, जी, सीयूईटी जैसी प्रतियोगी और विश्वविद्यालय परीक्षाओं में पंजीकरण के लिए प्रमाणीकरण करते समय उन्‍हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। यह ध्यान देने योग्य है कि कई बार छात्र और अभिभावक अंतिम समय में आधार अपडेट कराने की जल्दी में होते हैं, जिससे चिंताएँ बढ़ जाती हैं। समय पर बायोमेट्रिक अपडेट करके इस समस्या से बचा जा सकता है।

यूआईडीएआई के सीईओ श्री भुवनेश कुमार ने भी राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के सभी मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर इस पहल से अवगत कराया है और उनसे लक्षित एमबीयू शिविरों के आयोजन में सहयोग देने का अनुरोध किया है।

यूआईडीएआई के सीईओ ने अपने पत्र में लिखा है, "ऐसा विचार था कि स्कूलों के माध्यम से एक कैंप आयोजित करने से लंबित एमबीयू को पूरा करने में मदद मिल सकती है। मुख्य प्रश्न यह था कि स्कूलों को कैसे पता चलेगा कि किन छात्रों ने बायोमेट्रिक अपडेट नहीं किए हैं। यूआईडीएआई और भारत सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की तकनीकी टीमों ने यूडीआईएसई+ एप्लिकेशन के माध्यम से एक समाधान को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए मिलकर काम किया है। अब सभी स्कूलों को लंबित एमबीयू की जानकारी मिल सकेगी"।

यूडीआईएसई+ के बारे में

शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली प्लस (यूडीआईएसई+) स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अंतर्गत एक शैक्षिक प्रबंधन सूचना प्रणाली है और यह स्कूली शिक्षा से संबंधित विभिन्न आँकड़े एकत्र करती है।

यूआईडीएआई और स्कूली शिक्षा विभाग की इस संयुक्त पहल से बच्चों के बायोमेट्रिक्स को अपडेट करने में आसानी होने की उम्मीद है।

***//पीके/केसी/केपी/एसएस  

बुधवार, 27 अगस्त 2025

ਕੇਂਦਰੀ ਮੰਤਰੀ ਜਯੰਤ ਚੌਧਰੀ ਦੀ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਰਾਜਪਾਲ ਨਾਲ ਮੁਲਾਕਾਤ

 ਹੁਨਰ ਵਿਕਾਸ ਤੇ ਉੱਦਮ ਮੰਤਰਾਲਾ//Azadi Ka Amrit Mahotsav//Posted On: 27 AUG 2025 at 8:13 PM by PIB Chandigarh

ਹੁਨਰ ਵਿਕਾਸ ਪਹਿਲਕਦਮੀਆਂ 'ਤੇ ਹੋਈ ਵਿਸਥਾਰ ਨਾਲ ਚਰਚਾ


ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ
: 27 ਅਗਸਤ 2025: (PIB Chandigarh//ਪੰਜਾਬ ਸਕਰੀਨ ਬਲਾਗ ਟੀਵੀ)::

ਕੇਂਦਰੀ ਹੁਨਰ ਵਿਕਾਸ ਅਤੇ ਉੱਦਮਤਾ ਮੰਤਰੀ ਸ਼੍ਰੀ ਜਯੰਤ ਚੌਧਰੀ ਨੇ ਅੱਜ ਪੰਜਾਬ ਰਾਜ ਭਵਨ, ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਵਿਖੇ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਰਾਜਪਾਲ ਅਤੇ ਕੇਂਦਰ ਸ਼ਾਸਤ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਦੇ ਪ੍ਰਸ਼ਾਸਕ ਸ਼੍ਰੀ ਗੁਲਾਬ ਚੰਦ ਕਟਾਰੀਆ ਨਾਲ ਸ਼ਿਸ਼ਟਾਚਾਰ ਮੁਲਾਕਾਤ ਕੀਤੀ।

ਮੀਟਿੰਗ ਦੌਰਾਨ, ਆਗੂਆਂ ਨੇ ਪੰਜਾਬ ਅਤੇ ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਲਈ ਹੁਨਰ ਵਿਕਾਸ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮਾਂ ਨੂੰ ਅੱਗੇ ਵਧਾਉਣ 'ਤੇ ਕੇਂਦ੍ਰਿਤ ਸਾਰਥਕ ਚਰਚਾ ਕੀਤੀ। ਇਸ ਚਰਚਾ ਵਿੱਚ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਉਦਯੋਗ-ਸੰਬੰਧੀ ਹੁਨਰਾਂ ਨਾਲ ਲੈਸ ਕਰਨ, ਰੋਜ਼ਗਾਰ ਸਮਰਥਾਵਾਂ ਅਤੇ ਯੋਗਤਾ ਨੂੰ ਹੱਲ੍ਹਾਸ਼ੇਰੀ ਦੇਣ ਅਤੇ ਇਹ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਰਣਨੀਤੀਆਂ 'ਤੇ ਜ਼ੋਰ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਕਿ ਉਹ ਇੱਕ ਵਿਕਸਿਤ ਹੋ ਰਹੇ ਰੋਜ਼ਗਾਰ ਬਾਜ਼ਾਰ ਵਿੱਚ ਆਲਮੀ ਪੱਧਰ 'ਤੇ ਪ੍ਰਤੀਯੋਗੀ ਬਣੇ ਰਹਿਣ।

********//ਪੀਐਸ/ਏਕੇ//(Release ID: 2161360)********

भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2030 तक 300 अरब डॉलर तक पहुँच जाएगी

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 27 Aug 2025 at 5:16 PM by PIB Delhi

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा विस्तार से 

*डॉ. जितेंद्र सिंह ने युवा चुनौती के शुभारंभ के साथ बायोई3 नीति के एक वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया

*केंद्रीय मंत्री ने पहले राष्ट्रीय बायोफाउंड्री नेटवर्क का अनावरण किया

*स्वदेशी जैव-निर्माण को मज़बूत करने के लिए

*भारत के जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने बायोई3 नीति के अंतर्गत महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं


नई दिल्ली: 27 अगस्त 2025: (PIB Delhi//पंजाब स्क्रीन Blog TV)::

केंद्रीय विज्ञान और  प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बायोई3 (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोज़गार के लिए जैव-प्रौद्योगिकी) नीति के एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आज युवाओं के लिए बायोई3 चुनौती और देश के पहले राष्ट्रीय बायोफाउंड्री नेटवर्क का शुभारंभ किया। उन्होंने इसे जैव-प्रौद्योगिकी को भारत की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोज़गार का वाहक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि  "भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2014 में मात्र 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में 165.7 अरब डॉलर हो गई है और अब हम 2030 तक 300 अरब डॉलर के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं।" उन्होंने कहा कि भारत के जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने पिछले एक साल में बायोई3 नीति के अंतर्गत तेज़ी से प्रगति की है और कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं जो देश की जैव-अर्थव्यवस्था को आकार दे रही हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने "बायोई3 के एक वर्ष: नीति से कार्रवाई तक" के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि जैव-प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने अपने हितधारकों के साथ मिलकर कम समय में नए संस्थान स्थापित किया हैं, संयुक्त अनुसंधान पहल शुरू की हैं और राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियाँ स्थापित की हैं।

उल्लेखनीय उपलब्धियों पर केंद्रीय मंत्री ने मोहाली में देश के पहले जैव-विनिर्माण संस्थान के उद्घाटन, देश भर में जैव-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केंद्रों, जैव-विनिर्माण केंद्रों और जैव-फाउंड्री की स्थापना और कोशिका तथा जीन थेरेपी, जलवायु-अनुकूल कृषि, कार्बन कैप्चर और कार्यात्मक खाद्य पदार्थों जैसे उन्नत क्षेत्रों को कवर करने वाले एक दर्जन से अधिक संयुक्त अनुसंधान कॉलों के शुभारंभ के बारे में बताया। डीबीटी को इन श्रेणियों के अंतर्गत पहले ही 2,000 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंतरिक्ष जैव प्रौद्योगिकी और जैव-विनिर्माण में सहयोग के लिए डीबीटी और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन, साथ ही प्राथमिकता वाली परियोजनाओं की पहचान हेतु एक संयुक्त कार्य समूह का भी उल्लेख किया। इस वर्ष की शुरुआत में गगनयात्री ग्रुप कैप्टन सुभांशु शुक्ला द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर डीबीटी समर्थित तीन प्रयोग किए गए थे।

राज्य स्तर पर डीबीटी ने केंद्र-राज्य साझेदारी शुरू की है। इसमें असम के साथ एक बायोई3 सेल स्थापित करने हेतु एक समझौता ज्ञापन भी शामिल है।  इसमें राज्य के लिए एक कार्य योजना भी शामिल है। वैश्विक मोर्चे पर 52 देशों में भारत के मिशनों ने बायोई3 नीति पर इनपुट साझा किए हैं और डीबीटी तथा विदेश मंत्रालय अनुवर्ती कार्रवाई पर काम कर रहे हैं

इस कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ. जितेंद्र सिंह ने युवाओं के लिए बायोई3 चैलेंज का भी शुभारंभ किया—जो "सूक्ष्मजीवों, अणुओं और अन्य का डिज़ाइन" विषय के अंतर्गत युवा नवप्रवर्तकों के लिए एक राष्ट्रव्यापी आह्वान है। डीबीटी सचिव डॉ. राजेश गोखले द्वारा समझाई गई इस पहल के अंतर्गत स्कूली छात्रों (कक्षा 6-12), विश्वविद्यालय के छात्रों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों, स्टार्टअप्स और भारतीय नागरिकों को स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण और उद्योग की चुनौतियों का समाधान करने वाले सुरक्षित जैविक समाधान डिज़ाइन करने के लिए आमंत्रित किया जाता है। इस चैलेंज की घोषणा अक्टूबर 2025 से शुरू होकर हर महीने की पहली तारीख को की जाएगी। 

इसमें शीर्ष 10 विजेता समाधानों में से प्रत्येक को मान्यता और मार्गदर्शन सहायता के साथ ₹1 लाख का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा 100 चयनित पुरस्कार विजेता अपने विचारों को अवधारणा-सिद्ध समाधानों में बदलने के लिए बीआईआरएसी के माध्यम से दो किस्तों में ₹25 लाख तक की धनराशि प्राप्त होगी। 

इन परियोजनाओं को भारत भर के बीआईआरएसी+ संस्थानों में सुविधाओं और इनक्यूबेशन सहायता तक भी पहुँच प्राप्त होगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों को सशक्त बनाना, युवाओं के नेतृत्व में परिवर्तन को बढ़ावा देना और एक स्थायी और आत्मनिर्भर जैव-अर्थव्यवस्था की ओर भारत की यात्रा को सुदृढ़ बनाना है। 

युवाओं के लिए बायोई3 चैलेंज डिज़ाइन ढाँचे पर आधारित है, जो प्रतिभागियों को वास्तविक आवश्यकताओं को परिभाषित करने, साक्ष्य-प्रथम समाधान बनाने, डिज़ाइन द्वारा स्थिरता सुनिश्चित करने, अन्य तकनीकों और नीतियों के साथ एकीकरण करने, बाज़ार में पहुँचने के लिए रणनीतियाँ विकसित करने और रोज़गार, समावेशन और समान पहुँच में मापनीय परिणामों के माध्यम से एक शुद्ध-सकारात्मक प्रभाव पैदा करने में मार्गदर्शन करता है।

केंद्रीय मंत्री ने पहले राष्ट्रीय बायोफाउंड्री नेटवर्क के शुभारंभ पर भी बल दिया। इसमें छह संस्थान शामिल हैं जो अवधारणा विकास को बढ़ावा देने, स्वदेशी जैव-विनिर्माण को बढ़ावा देने और रोज़गार के अवसर सृजित करने में मदद करेंगे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2014 में केवल 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में 165.7 अरब डॉलर हो गई है और अब हम 2030 तक 300 अरब डॉलर के लक्ष्य की ओर काम कर रहे हैं।" उन्होंने देश के युवाओं को युवाओं के लिए बायोई3 चैलेंज में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया, जो सुरक्षित और टिकाऊ जैव-प्रौद्योगिकी नवाचारों के लिए विचार आमंत्रित करता है।

उन्होंने कहा कि ये पहल भारत के आर्थिक विकास के एक स्तंभ के रूप में जैव-प्रौद्योगिकी को मज़बूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं, साथ ही यह सुनिश्चित करती हैं कि कृषि और स्वास्थ्य सेवा से लेकर ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण तक, विभिन्न क्षेत्रों में नागरिकों तक लाभ पहुँचे।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने कहा कि बायोई3 नीति के माध्यम से भारत ने जन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, पर्यावरण की रक्षा करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए जैव प्रौद्योगिकी का लाभ उठाकर एक हरित, स्वच्छ और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण की दिशा में एक रणनीतिक कदम उठाया है। इससे आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण का योगदान मिला है। उन्होंने कहा कि जीव विज्ञान अब एक अलग-थलग विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह इंजीनियरिंग, वास्तुकला और अंतरिक्ष विज्ञान के साथ तेज़ी से जुड़ रहा है। इससे बायोफिलिक शहरी डिज़ाइन, शैवाल-आधारित कार्बन कैप्चर, आनुवंशिक रूप से संशोधित पौधे, बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक, कृत्रिम अंग, ऑर्गन-ऑन-ए-चिप सिस्टम और अंतरिक्ष जीव विज्ञान प्रयोग जैसे नवाचारों को बढ़ावा मिल रहा है। आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (एजीआई) जैसे उभरते उपकरणों के साथ जीव विज्ञान का संयोजन देश के युवाओं के लिए नए और सार्थक करियर के अवसर खोलता है। प्रो. सूद ने कहा कि देश के मज़बूत STEM आधार और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के नेतृत्व में, बायोई3 अनुसंधान और विकास को गति देगा, रोज़गार सृजन करेगा और एक स्थायी जैव-अर्थव्यवस्था का निर्माण करेगा, यह भारत के भविष्य को आकार देगी।

इस कार्यक्रम में डीबीटी की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अलका शर्मा, बीआईआरएसी के प्रबंध निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार ने भी अपने संबोधन में बायोई3 नीति के भविष्य के बारे में जानकारी साझा की। 

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