शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026

विश्व रेडियो दिवस लोगों की विश्वसनीय आवाज़ का जश्न मनाने का दिन है: प्रधानमंत्री

 प्रधानमंत्री कार्यालय//प्रविष्टि तिथि:13 FEB 2026  at 12:08PM by PIB Delhi Regarding World Radio Day

प्रधानमंत्री ने गिनवाई रेडियो की खूबियां 


नई दिल्ली: 13 फरवरी 2026: (पीआईबी दिल्ली//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी डेस्क)::

कोई ज़माना था जब गांवों और शहरों रेडियो ही हमारा संगी साथी हुआ करता था। सभी लोग सिनेमा नहीं जाते थे। रंगमंच भी सभी की पहुँच में नहीं था और दूरदर्शन अभी देश के कोने कोने तक नहीं पहुंचा था। उस समय रेडियो ही हमें देश और दुनिया की खबरें देता था और रेडिओ से ही हम गीत संगीत सुना करते थे और रेडियो ही हमें ड्रामे का मज़ा भी दिया करता था। आकाशवाणी के जालंधर केंद्र से पंजाबी गीतों के साथ साथ गीत संगीत भी बहुत लोकप्रिय हुआ करता था। देहाती प्रोग्राम को सुनने का एक अलग ही मज़ा था। उस प्रोग्राम के पात्र आज भी बहुत याद आते हैं। रौणकी राम, ठण्डु राम, भाईया जी और मास्टर जी से सभी का दिल जुड़ा हुआ था। 

आकाशवाणी जालंधर के साथ साथ आल इंडिया रेडियो दिल्ली से उर्दू सर्विस का अलग ही मज़ा था। रात्रि को तामील-ए-इरशाद हम कभी मिस नहीं करते थे। आकाशवाणी के साथ साथ बीबीसी लंदन और रेडियो सिलौन का भी अपना अलग ही रंग था। बिनाका गीत माला हर घर  में सुना जाता था। इस तरह रेडियो परिवार का एक हिस्सा बना हुआ था। 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि विश्व रेडियो दिवस एक ऐसे मीडिया का जश्न मनाने का अवसर है जो दूरदराज के गांवों से लेकर हलचल भरे शहरों तक, लोगों की विश्वसनीय आवाज है। श्री मोदी ने कहा कि वर्षों से रेडियो समय पर सूचना पहुंचाता रहा है, प्रतिभा को निखारता रहा है और सृजनात्मकता को प्रोत्साहित करता रहा है।

श्री मोदी ने कहा, “मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से मैंने हमारे लोगों की सामाजिक शक्ति को उजागर करने में रेडियो की क्षमता का प्रत्यक्ष अनुभव किया है। इस महीने का कार्यक्रम 22 फरवरी दिन रविवार को प्रसारित होगा। कृपया कार्यक्रम के लिए अपने सुझाव अवश्य साझा करें।”

प्रधानमंत्री ने X पर पोस्ट किया:

#MannKiBaat के माध्यम से मैंने हमारे लोगों की सामाजिक शक्ति को उजागर करने में रेडियो की क्षमता का प्रत्यक्ष अनुभव किया है। इस महीने का कार्यक्रम रविवार, 22 फरवरी को प्रसारित होगा। कार्यक्रम के लिए अपने सुझाव अवश्य साझा करें।

https://mygov.in/group-issue/inviting-ideas-mann-ki-baat-prime-minister-narendra-modi-22nd-february-2026/?target=inapp&type=group_issue&nid=366266

आजकल बदले हुए समय के साथ साथ रेडियो ने फिर अपने आप को अपडेट किया है। हिंदी, उर्दू और पंजाबी साहित्य से सबंधित बहुत से प्रोग्राम प्रस्तुत किए जाते हैं। गीत संगीत और परिचर्चाएं बहुत ही जानकारी भरी होती हैं। दिलचस्प बात यह है की अब आप आकाशवाणी के सभी केंद्रों के कार्यक्रम अपने मोबाईल पर इंटरनेट  के ज़रिए भी सुन सकते हैं। एक के बाद एक दिलचस्प प्रोग्राम नै पीढ़ी को भी रेडिओ से जोड़ रहे हैं। आपको रेडिओ कैसा लगता है अवश्य बताएं।  आपके विचारों की इंतज़ार तो रहेगी ही। 

***//पीके/केसी/एके//(रिलीज़ आईडी: 2227471)

रविवार, 25 जनवरी 2026

प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी मार्क टली के निधन पर शोक व्यक्त किया

प्रविष्टि तिथि: 25 JAN 2026 at 7:11 PM by PIB Delhi

नई दिल्ली: 25 जनवरी 2026: (पीआईबी दिल्ली// इनपुट-पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी डेस्क)

देश और पंजाब ने बहुत बार गंभीर और नाज़ुक दौर का सामना किया। ब्ल्यू स्टारआपरेशन की बात हो या फिर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या का वो दिन या फिर भोपाल गैस ट्रेजडी का बेहद दुखद समय - -बीबीसी के वरिष्ठ पत्रकार मार्क टली आम जनता के लिए रेडियो ले ज़रिए एक नेहड़ विश्वसनीय आवाज़ बन कर सामने आते रहे। मार्क टली (90) और सतीश जैकब बीबीसी (BBC) के दिग्गज पत्रकार थे, जिन्होंने दशकों तक भारत की प्रमुख खबरों को कवर किया। टली 20 साल तक बीबीसी दिल्ली के ब्यूरो प्रमुख रहे, जबकि जैकब उनके सहायक और करीबी दोस्त थे। दोनों ने मिलकर ऑपरेशन ब्लू स्टार, इंदिरा गांधी की हत्या और भोपाल गैस त्रासदी जैसी घटनाओं की रिपोर्टिंग की। 


इंटरनेट से साभार ली गई यह वीडियो मार्क टली के जीवन और पत्रकारिता के बारे में एक संक्षिप्त विवरण प्रदान करता है।  वास्तव में मार्क टली अपने आप में एक युग थे। जिन्होंने बहुत से उतरावों चढ़ावों वाले घटनाक्रम की बहुत ही निष्पक्ष रिपोर्टिंग की। 

गौरतलब है कि मार्क टली (Mark Tully): कोलकाता में जन्मे ब्रिटिश पत्रकार थे, जिन्हें 2002 में नाइटहुड और 2005 में पद्म भूषण से सम्मानित भी किया गया। आम लोगों में उनकी लोकप्रियता भी किसी सम्मान से कम नहीं थी। देश के पत्रकार और आम लोग भी उनसे पल भर को मिलना बहुत गर्व की बात समझते थे। उनकी शख्सियत में एक आकर्षण शक्ति सी भी महसूस होती थी। 

इसी तरह उनके सहयोगी सतीश जैकब (Satish Jacob) भी बीबीसी के साथ लंबे समय तक काम करने वाले वरिष्ठ पत्रकार, बने जिन्होंने 1978 में मार्क टली के साथ काम शुरू किया और बाद में बीबीसी दिल्ली के डिप्टी ब्यूरो प्रमुख के रूप में सेवानिवृत्त हुए। उनका भी अपना एक अलग सा ही अंदाज़ था। खबरों की दुनिया में जब भी कोई बड़ी घटना या दुर्घटना की रिपोर्टिंग होती तो यह जोड़ी बहुत ही सलीके से समुचित रिपोर्टिंग करती। बहुत नपे तुले से शब्द और बहुत ही संतुलित सा सुर और तेवर उनकी खबर को निष्पक्ष बना देते थे।  

पंजाब के हालात देखें तो अतीत का बहुत कुछ याद आने लगता है। जून-1984 में हुए ब्ल्यू स्टार ऑपरेशन के बाद की स्थिति भी कम नाज़ुक नहीं थी। तनाव, सहम, सनसनी और आतंक का मिलाजुला माहौल था। सेना के इस एक्शन के परिणामस्वरूप प्रतिक्रिया बहुत तेज़ी से उभरने लगी थी। हर दिन इसका रुख तीखा भी होता जा रहा था। कहलसितां समर्थक ग्रुप सख्तियों के बावजूद अपनी मौजूदगी का अहसास कराने लगे थे।  

इसी बीच उस पुस्तक के प्रकाशन की भूमिका भी तैयार हो रही थी जो मार्क तली और सतीश जैकब ने मिलकर लिखी। इस प्रमुख पुस्तक ने भी बहुत ख्याति अर्जित की। दोनों ने मिलकर जो यह पुस्तक लिखी उसका नाम था: अमृतसर: मिसेज गांधीज़ लास्ट बैटल (Amritsar: Mrs. Gandhi's Last Battle) यह पुस्तक ऑपरेशन ब्लू स्टार पर एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ मानी जाती है। इस पुस्तक में बहुत कुछ नया और महत्वपूर्ण था। इसकी बिक्री भी रेकॉर्डतोड़ रही। बाद में इसके अनुवाद भी सामने आए।  

मार्क टली और सतीश जैकब के कलम की कार्यशैली भी कमाल की रही। दोनों ने निडर और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए उल्लेखनीय ख्याति प्राप्त की, विशेषकर भारत में बीबीसी की विश्वसनीय आवाज़ के रूप में उनका काफी नाम हुआ। पंजाब के बहुत से पत्रकार मार्क तली और सतीश जैकब बनने के सा [ ने भी देखने लगे। इन नवोदित पत्रकारों ने केवल सपने नहीं देखे बल्कि कोशिशें भी की। बीबीसी ने इनमें से कइयों को मौका भी दिया। पंजाब से आजकल कई पत्रकार इस सपने साकार करने में कामयाब भी हुए। 

मार्क टली के निधन की हालिया खबर बहुत दुःख से सुनी गई। वरिष्ठ पत्रकार मार्क टली का जनवरी 2026 में नई दिल्ली में निधन हो गया, जिसकी पुष्टि सतीश जैकब ने की। उनका निधन बहुत से भारतीय पत्रकारों के लिए भी दुःख की लहर लेकर आया। इसी बीच सतीश जैकब ने मार्क टली को एक असाधारण पत्रकार और सच्चा दोस्त बताया है, जिन्होंने भारत के प्रति अटूट लगाव के साथ पत्रकारिता की। और भी  बहुत से लोगों और संगठनों ने उनके देहांत पर गहरा दुःख व्यक्त किया। 

प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी मार्क टली के निधन पर शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने सर मार्क टली के निधन पर शोक व्यक्त किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पत्रकारिता जगत की एक प्रभावशाली आवाज रहे सर मार्क टली के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सर मार्क टली का भारत और यहां के लोगों से गहरा जुड़ाव उनके कार्यों में स्पष्ट रूप से झलकता था। उन्होंने कहा कि सर मार्क की रिपोर्टिंग और उनके दृष्टिकोण ने सार्वजनिक विमर्श पर एक अमिट छाप छोड़ी है।

प्रधानमंत्री ने सर मार्क टली के शोक संतप्त परिवार, मित्रों और प्रशंसकों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

प्रधानमंत्री ने एक्स (X) पर लिखा:

“पत्रकारिता की एक प्रभावशाली आवाज़ रहे सर मार्क टली के निधन से दुखी हूं। भारत और हमारे देश के लोगों के प्रति उनके गहरे जुड़ाव की झलक उनके कार्यों में देखने को मिलती थी। उनकी रिपोर्टिंग और उनके विचारों ने सार्वजनिक विमर्श पर एक अमिट छाप छोड़ी है। उनके परिवार, मित्रों और असंख्य प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं।”

पीके/केसी/केजे/डीए//(रिलीज़ आईडी: 2218636)


गुरुवार, 25 दिसंबर 2025

उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली में 'महामना वांग्मय' का विमोचन किया

उप राष्ट्रपति सचिवालय//प्रविष्टि तिथि: 25 DEC 2025 at 6:18 PM by PIB Delhi

पंडित मदन मोहन मालवीय की संकलित रचनाओं की अंतिम श्रृंखला है यह पुस्तक 

महामना मालवीय ने भारत के प्राचीन मूल्यों और आधुनिक आकांक्षाओं के बीच सेतु का कार्य किया

महामना वांगमय भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बौद्धिक डीएनए को दर्शाता है: उपराष्ट्रपति

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय पंडित मालवीय के शैक्षिक विजन का प्रमाण है: उपराष्ट्रपति

पंडित मालवीय का शैक्षिक दर्शन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में परिलक्षित होता है: उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली: 25 दिसंबर 2025: (पीआईबी दिल्ली//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी डेस्क)::

उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के संकलित रचनाओं की अंतिम श्रृंखला “महामना वांग्मय” का विमोचन किया।

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने महामना मालवीय को एक महान राष्ट्रवादी, पत्रकार, समाज सुधारक, अधिवक्‍ता, राजनेता, शिक्षाविद और प्राचीन भारतीय संस्कृति का एक प्रतिष्ठित विद्वान के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि पंडित मालवीय एक दुर्लभ दूरदर्शी थे, जिनका दृढ़ विश्वास था कि भारत का भविष्य उसके अतीत को नकारने में नहीं, बल्कि उसे पुनर्जीवित करने में निहित है, इस प्रकार उन्‍होंने भारत के प्राचीन मूल्यों और आधुनिक लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के बीच एक सेतु का कार्य किया।

पंडित मालवीय की वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति महादोय ने कहा कि यह प्राचीन और आधुनिक सभ्यताओं के सर्वोत्तम तत्वों का सामंजस्य स्थापित करने की उनकी क्षमता को दर्शाता है।

औपनिवेशिक शासन के दौरान राष्ट्रीय जागरण के सबसे सशक्त साधन के रूप में शिक्षा में महामना मालवीय के विश्वास को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना उनके इस विश्‍वास का एक जीवंत प्रमाण है कि आधुनिक शिक्षा और भारतीय संस्कृति को साथ विकसित होना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि महामना मालवीय की एक मजबूत, आत्मनिर्भर और प्रबुद्ध भारत के विजन की अनुगूंज समकालीन पहलों जैसे आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और 2047 तक विकसित भारत के मिशन में गहराई से महसूस की जाती है, जिसका नेत़त्‍व प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं, जो पंडित मालवीय जी की चिर स्‍थायी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि महामना मालवीय का समावेशी, मूल्य-आधारित और कौशल-उन्मुख शिक्षा पर जोर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में दृढ़ता से परिलक्षित होता है।

महामना वांग्मय को केवल लेखों का संग्रह से कहीं अधिक बताते हुए उपराष्ट्रपति महोदय ने कहा कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बौद्धिक डीएनए और देश के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए एक खाका प्रस्तुत करता है। उन्होंने महामना मालवीय मिशन और प्रकाशन विभाग को उनके इस महत्वपूर्ण प्रयास के लिए बधाई दी तथा विश्वविद्यालयों, विद्वानों और युवा शोधकर्ताओं से इन ग्रंथों से सक्रिय रूप से जुड़ने का आह्वान किया, ये उल्‍लेख करते हुए कि इसमें समकालीन चुनौतियों के स्थायी समाधान निहित हैं।

‘महामना वांग्मय’ की दूसरी और अंतिम श्रृंखला में लगभग 3,500 पृष्ठों में फैले 12 खंड शामिल हैं, जिनमें पंडित मदन मोहन मालवीय के लेखन और भाषणों का एक व्यापक संकलन प्रस्‍तुत किया गया है। इस कार्यक्रम का आयोजन महामना मालवीय मिशन द्वारा किया गया, जबकि इन पुस्तकों का प्रकाशन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग द्वारा किया गया है। संकलित कृतियों की पहली श्रृंखला का विमोचन वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा किया गया था।

इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में केंद्रीय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल; संसद सदस्‍य श्री अनुराग सिंह ठाकुर; इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय; महामना मालवीय मिशन के अध्यक्ष श्री हरि शंकर सिंह  तथा प्रकाशन विभाग के प्रधान महानिदेशक श्री भूपेन्द्र कैंथोला शामिल थे।

***//पीके/केसी/आईएम/ओपी//(रिलीज़ आईडी: 2208583)

बुधवार, 26 नवंबर 2025

पर्दे पर किरदारों को गढ़ना:

 

 एका लखानी ने इफ्फी में फिल्मों के परिधानों के जादू को उजागर किया

*पोन्नियिन सेलवन से ओके जानू तक कॉस्ट्यूम डिज़ाइन का एक सिनेमाई सफ़र

*एका ने परिधानों के ज़रिए नंदिनी, तारा और रॉकी को डिकोड करके दर्शकों का मन मोह लिया

गोवा में जारी इफ्फी में, 'वेशभूषा और चरित्र निर्माण: सिनेमा के ट्रेंडसेटरशीर्षक वाला साक्षात्कार सत्र एक मास्टरक्लास में तब्दील हो गया, जिसमें इस बात पर चर्चा की गई कि कैसे परिधान महज़ पात्रों को ही नहीं सजातेबल्कि खामोशी से उनकी कहानियों को आकार देते हैउन्हें दिशा देते है और कभी-कभी तो उन्हें नए शब्दों में बयां करते हैं। मशहूर कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर एका लखानी के और फिल्म निर्माता जयप्रद देसाई के इस सत्र में दर्शकों को पर्दे के पीछे की उस दुनिया में जाने का एक अनूठा अवसर मिला, जहाँ परिधान और फिल्म निर्माण का मिलन होता है।

सत्र की शुरुआत करते हुएजयप्रद ने एक साधारण सी सच्चाई बताकर माहौल तैयार किया: "किसी पात्र के बोलने से पहलेउसकी वेशभूषा बहुत कुछ कह चुकी होती है।" और इसी के साथ एका ने अपने 15  साल के सफ़र का ज़िक्र कियाजो हाई-फ़ैशन रनवे के सपनों से शुरू हुआ थालेकिन आखिरकार सिनेमा की शोररंग और रचनात्मक उहापोह में बदल गया।

मणिरत्नम का जादू

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एका ने मणिरत्नम की फिल्म 'रावणके सेट पर सब्यसाची मुखर्जी के साथ इंटर्नशिप करते हुए अपने शुरुआती दिनों को याद किया। उन्होंने कहा, "मुझे लगता था कि फ़ैशन का मतलब सुंदर कपड़े बनाना हैलेकिन रावण ने मुझे सिखाया कि सुंदरता भावनाओं के साथ आती है।" सब्यसाची के साथउन्होंने सीखा कि कैसे रंग एक फ्रेम में समा जाते हैंऔर कैसे कॉस्ट्यूम डिज़ाइन महज़ एक विभाग नहींबल्कि एक भाषा है। 'रावणमें उनके काम ने सिनेमैटोग्राफर संतोष सिवन को प्रभावित कियाजिन्होंने उन्हें सिर्फ़ 23 साल की उम्र में 'उरुमीफ़िल्म ऑफर की थी। उन्होंने कहा, "असली सफ़र यहीं से शुरू हुआ।"

एका की रचनात्मक प्रक्रिया, निर्देशक के साथ लंबी बातचीत से शुरू होती हैजिसके बाद स्क्रिप्ट पर गहराई से विचार किया जाता है। उन्होंने बताया कि मणिरत्नम जैसे फिल्म निर्माताओं के साथसहयोग और भी पहले शुरू हो जाता हैकभी-कभी लेखन के बीच में ही इस पर काम होने लगता है।

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उन्होंने कहा, "मणि सर मुझे स्क्रिप्टिंग के चरण में शामिल करते हैं। जब मैं समझ जाती हूँ कि कोई किरदार कैसे कपड़े पहनता हैतो वे उस किरदार के व्यवहार के बारे में ज़्यादा समझ पाते हैं।" उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि कॉस्ट्यूम डिज़ाइन किस तरह से कहानी के विकल्पों को आकार दे सकता है।

"सिनेमा टीमवर्क है," उन्होंने ज़ोर देकर कहा। "मैं सबसे खूबसूरत पोशाक बनाने की कोशिश नहीं कर रही हूँ। मैं सही पोशाक बनाने की कोशिश कर रही हूँजो अभिनेता को सहजता से किरदार में ढलने दे।" उनकी कार्यप्रणाली में संदर्भों की खोजविजुअल जर्नलिंगविस्तृत नोट्स बनाना और अपनी टीम के साथ बेहतर सहयोग शामिल है।

पोन्नियिन सेल्वन: परिधानों में लिखा इतिहास

पोन्नियिन सेल्वन के लिएमणिरत्नम ने एका को एक भी डिज़ाइन बनाने से पहले तंजावुर भेजा था। यह यात्रा उनके लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई, क्योंकि एका ने मंदिर के कांस्यमूर्तियों और रूपांकनों के ज़रिए चोल युग की भव्यता को गहराई से समझाजिसने आखिरकार फिल्म के विजुअल की दुनिया को आकार दिया।

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फिर उन्होंने किरदारों के रूप-रंग को कई हिस्सों में बांटा और सत्र को एक छोटे फिल्म स्कूल में बदल दिया: उन्होंने बताया कि नंदिनी को मोह और शक्ति की भाषा में रचा गया थाउसकी वेशभूषा उसके चुंबकीय आकर्षण और शक्ति की भूख को दर्शाती है। दूसरी ओरकुंदवई "शक्ति के साथ जन्मी" थीऔर उसका रूप उस सहज अधिकार को दर्शाता है: शांत और संयमित। आदित्य करिकालन का रंग-रूप उनकी आंतरिक उथल-पुथल से प्रेरित था। उनका क्रोधपीड़ा और भावनात्मक बेचैनी गहरे लाल और काले रंगों में दर्शाई गई। इसके उलटअरुलमोझी वर्मन की लोगों के शांतप्रिय नेता के रूप में कल्पना की गई थीजिससे एका ने उन्हें शांत आइवरी और कोमल सुनहरे रंग पहनाए, जो उनकी स्पष्टताकरुणा और शांत कुलीनता को दर्शाते थे।

दो तारेदो दुनिया और संजू का पुनर्जन्म

एका ने यह भी बताया कि कैसे एक ही किरदारताराको 'ओके कनमनीऔर 'ओके जानूमें दो बिल्कुल अलग परिधानों की ज़रुरत पड़ी। उन्होंने बताया कि दर्शकों की संवेदनशीलता किस तरह परिधानों के चुनाव को प्रभावित करती है, "तमिल मेंतारा को लोगों से जुड़ाव महसूस कराना था। हिंदी मेंउसे महत्वाकांक्षी होना था।" उन्होंने श्रद्धा कपूर की अब तक की सबसे चर्चित 'हम्मा हम्माशॉर्ट्स को कुशन कवर बदलने से आखिरी समय में बदलने का एक मज़ेदार किस्सा भी साझा किया।

'संजूपर काम करते वक्तएका ने ज़्यादा शोध-आधारित नज़रिया अपनाया और लगभग पूरी सटीकता के साथ संदर्भों को जोड़ा। उन्होंने किरदार के लुक को एक साथ ढालने में मदद के लिए मेकअप और हेयर टीमप्रोडक्शन डिज़ाइनरों और फ़ोटोग्राफ़रों के निर्देशकों (डीओपी) को श्रेय दिया। उन्होंने कहा, "डीओपी एक कस्टमर के के सबसे अच्छे दोस्त होते हैं। वे आपको बता देंगे कि कोई रंग स्क्रीन पर आप पर अच्छा लगेगा या नहीं।

एका ने 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानीका उदाहरण देते हुए अपनी बात खत्म कीजहाँ रॉकी का बदलता परिधान, उसके व्यक्तित्व के विकास को दर्शाता है। दर्शकों को रॉकी के लुक को समझने में बहुत मज़ा आया और उन्हें यह भी पता चला कि वेशभूषा किसी किरदार को कैसे परिभाषित करती है। सत्र के खत्म होते होते यह साफ हो गया कि वेशभूषा महज़ एक दृश्य सजावट से कहीं बढ़कर हैवे कहानी कहने के साधन हैं जो किरदारों में जान फूंकते हैं। एका लखानी की दुनिया मेंहर सिलाई का एक मकसद होता है और हर रंग का एक अर्थ होता है।

इफ्फी के बारे में

1952 में शुरू हुआ भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) दक्षिण एशिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े सिनेमा उत्सव के रूप में आज भी प्रतिष्ठित स्थान रखता है। राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी)सूचना एवं प्रसारण मंत्रालयभारत सरकार और गोवा मनोरंजन सोसायटी (ईएसजी)गोवा सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजितयह महोत्सव एक वैश्विक सिनेमाई शक्ति के रूप में विकसित हुआ है, जहाँ पुनर्स्थापित क्लासिक फ़िल्मों का साहसिक प्रयोगों के साथ मिलना होता हैऔर दिग्गज कलाकार, पहली बार आने वाले हुनरमंद कलाकारों के साथ मंच साझा करते हैं। इफ्फी को वास्तव में शानदार बनाने वाला इसका शानदार सिनेमा की विधाओं का सम्मिश्रण है- अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताएँसांस्कृतिक प्रदर्शनियाँमास्टरक्लासश्रद्धांजलि और ऊर्जावान वेव्स फिल्म बाज़ारजहाँ विचारसौदे और सहयोग उड़ान भरते हैं। 20 से 28 नवंबर तक गोवा की शानदार झिलमिलाते तटीय इलाके में आयोजित56वाँ संस्करण भाषाओंशैलियोंनवाचारों और आवाज़ों की एक चकाचौंध भरी श्रृंखला का वादा करता है, जहां विश्व मंच पर भारत की रचनात्मक प्रतिभा का एक गहन उत्सव देखने को मिलता है।

अधिक जानकारी के लिएक्लिक करें:

इफ्फी वेबसाइटhttps://www.iffigoa.org/

पीआईबी की इफ्फी माइक्रोसाइटhttps://www.pib.gov.in/iffi/56new/

पीआईबी इफ्फीवुड ब्राडकास्ट चैनलhttps://whatsapp.com/channel/0029VaEiBaML2AU6gnzWOm3F

एक्स हैंडल्स: @IFFIGoa, @PIB_India, @PIB_Panaji

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पीके/केसी/एनएस/एसएस//रिलीज़ आईडी: 2195038

पूरे देश में लेबर कोड के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

Received on Wednesday 26th November 2025 at 12:48 PM Regarding  Protest Against New Labor Code Bills 

वाम ने पंजाब में चलाई तीखे विरोध की आंधी-कांग्रेस भी साथ 

लुधियाना में नोटिफिकेशन की कॉपियां जलाई गईं और प्रधानमंत्री को मेमोरेंडम भेजा गया


लुधियाना
: (मीडिया लिंक रविंदर//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी डेस्क)::


सेंट्रल ट्रेड यूनियनों के जॉइंट फोरम के देशव्यापी आह्वान पर,
यूनाइटेड फ्रंट ऑफ ट्रेड यूनियंस लुधियाना ने आज लेबर कोड के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। लेबर विरोधी कोड को एकतरफा लागू करने वाले नोटिफिकेशन की कॉपियां जलाई गईं और डिप्टी कमिश्नर के जरिए प्रधानमंत्री को मेमोरेंडम दिया गया। मेमोरेंडम में कहा गया कि 21 नवंबर, 2025 को जारी किया गया नोटिफिकेशन डेमोक्रेटिक प्रोसेस को नज़रअंदाज़ करके वेलफेयर स्टेट की मूल भावना और प्रकृति पर हमला है। दस सेंट्रल ट्रेड यूनियनों ने लगातार इन कोड का विरोध किया है और इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस बुलाने की मांग की है, लेकिन यह कॉन्फ्रेंस 2015 के बाद पिछले दस सालों से नहीं हुई है।   आप इस वीडियो की झलक पंजवी के वाम दैनिक नवां ज़माना में भी देख सकते हैं बस यहाँ क्लिक करके। 


ट्रेड यूनियनों ने
आरोप लगाया कि सरकार ने मज़दूरों, उनकी हड़तालों और प्रदर्शनों को नजरअंदाज करके कॉर्पोरेट हितों के तहत इन कोड को लागू किया है। इन कोड को मज़दूरों की ज़िंदगी, अधिकारों और जॉब सिक्योरिटी पर गंभीर हमला बताया गया। सेंट्रल ट्रेड यूनियनों ने चेतावनी दी कि यह नोटिफिकेशन गहरी बेरोज़गारी और मंदी के समय में मज़दूर वर्ग पर ‘जंग का ऐलान’ है। उन्होंने लेबर कोड को तुरंत रद्द करने और पुराने लेबर कानूनों को फिर से लागू करने की मांग की।

वक्ताओं ने कहा कि इन कोड के खिलाफ लगातार संघर्ष जारी रखा जाएगा और इसे और तेज़ किया जाएगा। देश के मज़दूर वर्ग के साथ-साथ लुधियाना की ट्रेड यूनियनें भी मज़दूरों के प्रति सरकार के कॉर्पोरेट-समर्थक और जन-विरोधी रवैये के खिलाफ लगातार संघर्ष में शामिल होंगी।


इस एक्शन को AIT, INTUC, CITU और CTU पंजाब के नेताओं – एम.एस. भाटिया, गुरजीत सिंह जगपाल, जगदीश चंद, विजय कुमार सरबजीत सिंह सरहाली और परमजीत सिंह ने लीड किया। कई और यूनियन नेता भी मौजूद थे।

सोमवार, 6 अक्टूबर 2025

बाढ़ के बाद पंजाब की मिट्टी के बदलते रसायन

Received on Monday 6th October 2025 at 11:32 AM PAU Decodes the Changing Chemistry

इस विज्ञान को समझने में पीएयू की रही विशेष भूमिका 


लुधियाना
: 6 अक्टूबर, 2025: (मीडिया लिंक रविंदर//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग TV)::

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना ने पूरे पंजाब में बाढ़ प्रभावित मिट्टी का एक व्यापक विश्लेषण जारी किया है, जिससे पता चलता है कि हाल ही में आई बाढ़ ने कृषि भूमि को जटिल रूप से बदल दिया है। हिमालय की तलहटी से जमा लाल गाद ने जहाँ कुछ क्षेत्रों को खनिजों से समृद्ध किया है, वहीं बाढ़ ने पोषक तत्वों में असंतुलन, कठोर मिट्टी का निर्माण और रबी फसल उत्पादकता के लिए संभावित खतरे भी पैदा किए हैं।

पीएयू के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने कहा कि बाढ़ ने पंजाब की कृषि की नींव, यानी उसकी मिट्टी, को ही बदल दिया है। उन्होंने बताया कि हालाँकि आने वाली पहाड़ी मिट्टी में फसलों के लिए लाभकारी खनिज होते हैं, लेकिन इसने राज्य की मूल मिट्टी की संरचना को बिगाड़ दिया है। अब चुनौती संतुलन बहाल करने की है। उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय ने प्रभावित जिलों में मिट्टी के नमूनों का परीक्षण करने और रबी की बुवाई का मौसम शुरू होने से पहले किसानों को सुधारात्मक उपायों के बारे में मार्गदर्शन देने के लिए टीमें गठित की हैं।

डॉ. राजीव सिक्का की देखरेख में, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के मृदा विज्ञान विभाग ने अमृतसर, गुरदासपुर, फिरोजपुर, कपूरथला और पटियाला के गाँवों में परीक्षण किए। परिणामों से तलछट की गहराई, बनावट और संरचना में व्यापक भिन्नताएँ सामने आईं। कुछ खेत एक मीटर से भी ज़्यादा गहरे तलछट के नीचे दबे हुए थे, जबकि अन्य में पतली परतें थीं। तलछट की बनावट रेतीली से लेकर महीन दोमट मिट्टी तक थी, और पीएच मान क्षारीय पाए गए। विद्युत चालकता आम तौर पर कम थी, जिससे लवणता का कोई बड़ा खतरा नहीं होने का संकेत मिलता है।

डॉ. सिक्का के अनुसार, मिट्टी में कार्बनिक कार्बन की मात्रा उत्साहजनक रूप से उच्च थी, जो पंजाब के सामान्य 0.5 प्रतिशत की तुलना में औसतन 0.75 प्रतिशत से अधिक थी। कुछ नमूनों में, यह एक प्रतिशत से भी अधिक थी। हालाँकि, अधिक रेत जमाव वाले क्षेत्रों में कार्बन की मात्रा कम दर्ज की गई। फॉस्फोरस और पोटेशियम के स्तर में भिन्नता थी, जबकि लौह और मैंगनीज जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व सामान्य से कहीं अधिक मात्रा में पाए गए। उन्होंने बताया कि लौह का बढ़ा हुआ स्तर बाढ़ के पानी के साथ लाए गए लौह-लेपित रेत कणों के कारण हो सकता है।

अनुसंधान निदेशक डॉ. अजमेर सिंह ढट्ट ने बताया कि कई जगहों पर तलछट जमाव के कारण सतही और उपसतही कठोर सतहें विकसित हो गई हैं, जो जल-रिसाव और जड़ों की वृद्धि में बाधा डाल सकती हैं। उन्होंने भारी मिट्टी में सरंध्रता बहाल करने के लिए छेनी वाले हल से गहरी जुताई करने की सलाह दी, जबकि हल्की मिट्टी में, परतों के निर्माण को रोकने के लिए जमा हुई गाद और चिकनी मिट्टी को अच्छी तरह मिला देना चाहिए।

विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. मक्खन सिंह भुल्लर ने किसानों से मिट्टी में जैविक पदार्थ मिलाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि गोबर की खाद, मुर्गी की खाद और हरी खाद मिट्टी की संरचना के पुनर्निर्माण, सूक्ष्मजीवी गतिविधि को प्रोत्साहित करने और स्वस्थ जड़ प्रणालियों को सहारा देने में मदद कर सकती है। उन्होंने धान की पराली को जलाने से बचने और इसकी बजाय इसे मिट्टी में मिलाकर उर्वरता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया।

रबी मौसम के लिए, पीएयू ने किसानों को विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित उर्वरक खुराक का पालन करने और वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए बुवाई के लगभग 40 से 50 दिन बाद 2 प्रतिशत यूरिया का छिड़काव (200 लीटर पानी में 4 किलो यूरिया घोलकर तैयार) करने की सलाह दी है। गेहूँ और बरसीम की फसलों में मैंगनीज की कमी पर नज़र रखनी चाहिए; यदि लक्षण दिखाई दें, तो मैंगनीज सल्फेट (प्रति एकड़ 100 लीटर पानी में मैंगनीज सल्फेट का 0.5% घोल) का 0.5 प्रतिशत पत्तियों पर छिड़काव करने की सलाह दी जाती है और एक सप्ताह बाद इसे दोहराया जाना चाहिए।

डॉ. गोसल ने कहा कि बाढ़ ने वर्तमान और आगामी फसल चक्रों को बाधित किया हो सकता है, लेकिन समय पर मृदा प्रबंधन इस बाधा को अवसर में बदल सकता है। समन्वित परीक्षण, लक्षित पोषक तत्व प्रबंधन और सामुदायिक स्तर पर विस्तार सहायता के साथ, पीएयू का लक्ष्य पंजाब के किसानों को पंजाब की कृषि भूमि की उर्वरता और लचीलापन बहाल करने में मदद करना है।

गुरुवार, 28 अगस्त 2025

5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए समय पर आधार अनिवार्य

इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 27 AUG 2025 5:29PM by PIB Delhi

बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) सुनिश्चित करने का भी आह्वान

यूआईडीएआई ने देश भर के स्कूलों से 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए समय पर आधार अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) सुनिश्चित करने का आह्वान किया

यूआईडीएआई के सीईओ ने राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर स्कूलों में शिविर लगाकर लंबित एमबीयू को पूरा करने का आग्रह किया

यूआईडीएआई और शिक्षा मंत्रालय ने यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई+) प्लेटफॉर्म पर लगभग 17 करोड़ बच्चों के लिए आधार में लंबित एमबीयू को सुगम बनाने के लिए हाथ मिलाया


नई दिल्ली
: 27 अगस्त 2025: (PIB Delhi//पंजाब स्क्रीन Blog TV)::

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने स्कूली बच्चों की आधार से संबंधित अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) की स्थिति यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई+) एप्लीकेशन पर उपलब्ध कराने के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के साथ हाथ मिलाया है -यह एक ऐसा कदम है, जिससे करोड़ों छात्रों के लिए आधार में एमबीयू की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

पाँच वर्ष की आयु के बच्चों और पन्‍द्रह वर्ष की आयु के बच्चों के लिए आधार में एमबीयू (एमबीयू) का समय पर पूरा होना एक अनिवार्य आवश्यकता है। आधार में बच्चों के बायोमेट्रिक डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है। लगभग 17 करोड़ आधार संख्याएँ ऐसी हैं जिनमें अनिवार्य बायोमेट्रिक्स अपडेट लंबित है।

आधार में बायोमेट्रिक्स अपडेट करना बच्चे के लिए ज़रूरी है, अन्यथा बाद में विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत लाभ प्राप्त करने, नीट, जी, सीयूईटी जैसी प्रतियोगी और विश्वविद्यालय परीक्षाओं में पंजीकरण के लिए प्रमाणीकरण करते समय उन्‍हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। यह ध्यान देने योग्य है कि कई बार छात्र और अभिभावक अंतिम समय में आधार अपडेट कराने की जल्दी में होते हैं, जिससे चिंताएँ बढ़ जाती हैं। समय पर बायोमेट्रिक अपडेट करके इस समस्या से बचा जा सकता है।

यूआईडीएआई के सीईओ श्री भुवनेश कुमार ने भी राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के सभी मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर इस पहल से अवगत कराया है और उनसे लक्षित एमबीयू शिविरों के आयोजन में सहयोग देने का अनुरोध किया है।

यूआईडीएआई के सीईओ ने अपने पत्र में लिखा है, "ऐसा विचार था कि स्कूलों के माध्यम से एक कैंप आयोजित करने से लंबित एमबीयू को पूरा करने में मदद मिल सकती है। मुख्य प्रश्न यह था कि स्कूलों को कैसे पता चलेगा कि किन छात्रों ने बायोमेट्रिक अपडेट नहीं किए हैं। यूआईडीएआई और भारत सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की तकनीकी टीमों ने यूडीआईएसई+ एप्लिकेशन के माध्यम से एक समाधान को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए मिलकर काम किया है। अब सभी स्कूलों को लंबित एमबीयू की जानकारी मिल सकेगी"।

यूडीआईएसई+ के बारे में

शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली प्लस (यूडीआईएसई+) स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अंतर्गत एक शैक्षिक प्रबंधन सूचना प्रणाली है और यह स्कूली शिक्षा से संबंधित विभिन्न आँकड़े एकत्र करती है।

यूआईडीएआई और स्कूली शिक्षा विभाग की इस संयुक्त पहल से बच्चों के बायोमेट्रिक्स को अपडेट करने में आसानी होने की उम्मीद है।

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