गुरुवार, 3 फ़रवरी 2022

राजनीति के फिसलन भरे रास्ते पर हर कदम बच कर उठाना है//संजीवन सिंह

  किसान आंदोलन की जीत के बाद सावधान करती रचना 

 संजीवन और इप्टा के अन्य साथियों ने किसान योद्धाओं के विजय मार्च का स्वागत किया
दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन की जीत शानदार रही लेकिन युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है। अब पंजाब में टकराव की स्थिति बन रही है. कोई फर्क नहीं पड़ता कि जीतने वाला दांव कहाँ जाता है। यह डर एक बार फिर से दिलों में उठने लगा है। 750 से अधिक किसान साथियों का हिसाब अभी बाकी है। सरकार द्वारा किए गए वादे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। बीजेपी नेता लगातार इसी कानून को खत्म करने की धमकी दे रहे हैं. किसानों को मवाली कहने वाले मंत्री भी पंजाब में घूम रहे हैं। लम्बे समय से रंगमंच और प्रगतिशील आंदोलन से जुड़े रहे मोहाली निवासी प्रख्यात रंगकर्मी संजीवन सिंह हमेशां श्रमिकों के हितैषी रहे हैं। प्रगतिशील परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने आंदोलन में शामिल व्यक्तियों और ताकतों को बहुत संतुलित शब्दों में चेतावनी देने की कोशिश की है। हम इस लेख और आंदोलन के भविष्य पर आपसे सुनने के लिए उत्सुक हैं। --संपादक

सत्ता के किसान विरोधी तीन काले कानूनों के खिलाफ पंजाब में उठे विद्रोह ने न केवल भारत को बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित किया और दुनिया की चर्चा बन गई। हर वर्ग, हर जाति, हर धर्म, हर विचार, हर विचार और हर वर्ग के लोगों ने अपने जीवन का बलिदान दिया और अपने वित्त और क्षमता के अनुसार संघर्ष के इस धुएं को जलाए रखने के लिए योगदान दिया। सभी प्रकार के भेदभाव और मतभेदों को अलग रखते हुए, उन्होंने सत्ता और अधिकार के नशे में भारत के अभिमानी शासक के अत्याचार, ज्यादतियों और मनमानी के खिलाफ आवाज उठाई।
हुक्मरानों ने अपने गुर्गों के माध्यम से इस जनसंघर्ष को आतंकवादी, अलगाववादी, खालिस्तानी, नक्सली, आंदोलनकारी बताकर कुचलने के कई असफल प्रयास किए। किसी भी एक संघर्षरत योद्धा का मन नहीं डगमगाया। उनके इरादे और भी मजबूत हो गए।

खेतों के बेटों को सत्ता वालों ने बुरी तरह बदनाम करने में ोकि कस्र नहीं छोड़ी। किसान को अन्नदाता के रूप में स्वीकार करने से यह कहकर इनकार करना कि एक अनाज विक्रेता एक उपकारी कैसे हो सकता है, आंदोलन के समर्थकों और सहानुभूति रखने वालों के लिए आश्चर्य और संकट का का कारण बना। क्योंकि ऐसे सज्जन देश की सीमाओं पर देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले देश के सैनिकों को यह कहकर शहीद मानने से भी इंकार कर सकते हैं कि सैनिकों को वेतन मिलता है और नौकरी मिलती है।

अत्याचारी के अत्याचार से लड़ने के लिए गुरुओं, संतों और नबियों से विरासत में मिली गुड़ती ने विनम्र शासक को झुकने के लिए मजबूर किया। देश भर से गिने-चुने दिग्गज (लोक शक्ति) डंडे में झंडे लिए दिल्ली लौटे। पहले से ही अलग-अलग रंगों के झंडे डंडे पर फहराए गए और सत्ता के भूखे लोग चिल्लाने लगे, वे डंडे पर झंडे क्यों लगा रहे हैं? डंडे में झंडे लगाना हमारा अधिकार है। डंडे में झंडे लगाकर सत्ता हासिल कर लोगों के अमले को परेड करना हमारा अधिकार है।

ऐसे ध्वजवाहक जो खुद को सत्ता का वारिस मानते हैं, शायद भूल गए होंगे कि वे भी लाठी-डंडों के संघर्ष में हिस्सा लेते थे। क्रांति के लिए युद्ध होने दो। अनगिनत बलिदानों, अत्याचारों और यातनाओं को सहने के बाद सभी ने अलग-अलग रंगों के झंडे गाड़ दिए अपने-अपने डंडे में इसे रोकने के लिए उन्हें प्रताड़ित और प्रताड़ित किया जाता है। अभूतपूर्व जीत के बाद लौट रहे हैं, हालांकि, कुछ लड़ाके झंडे को पोल पर लगाने के पक्ष में नहीं हैं। बेशक डंडे की ताकत को नकारा नहीं जा सकता लेकिन झंडे की अपनी हैसियत होती है. झंडे की अपनी गरिमा होती है. लोगों को दर्द होना चाहिए.

यह अच्छी बात है कि वर्षों के संघर्ष के दौरान दिल्ली के पास किसी भी राजनीतिक झंडे को उड़ने नहीं दिया गया। राजनीतिक झण्डे को किसी भी प्रकार का राजनीतिक लाभ लेने की अनुमति नहीं थी।मिर्च अधिक मिलाते हैं, कभी-कभी नमक।

ठीक वैसे ही जैसे नई दुल्हन को बाकी परिवार और पड़ोसियों का दिल जीतने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है. इसी तरह, नए झंडे को लोगों का दिल और दिमाग जीतने के लिए और लोगों का प्यार और सम्मान जीतने के लिए विशेष प्रयास करना होगा। लेकिन किसी का विश्वास जीतकर पल भर में अपनी पहचान बनाना संभव नहीं है।

संघर्ष का सार आत्म-बलिदान है और राजनीति का स्वभाव चालबाजी और चालबाजी है। कोई पेड़ लगाते ही छाया देना शुरू नहीं करता है। पेड़ लगाने के बाद उसकी देखभाल करनी होती है। मेंटेनेंस भी करना पड़ता है। मवेशियों को भी बचाना होगा। संघर्ष की प्रकृति और राजनीति के क्षेत्र की प्रकृति काफी भिन्न है।संघर्ष का मार्ग ऊबड़-खाबड़ है और राजनीति का मार्ग फिसलन भरा है। राजनीति के फिसलन भरे रास्ते पर हर कदम बहुत सावधानी से उठाना पड़ता है। --संजीवन सिंह   

किसान आंदोलन की विजय के संबंध में सब्जीवन जी के भाई रंजीवन साहिब ने भी एक काव्य रचना लिखी। इस का वीडियो आप देख सकते हैं  यहां क्लिक कर के। 

ਕਿਸਾਨ ਅੰਦੋਲਨ ਦੀ ਜਿੱਤ ਸਬੰਧੀ ਸੰਜੀਵਨ ਹੁਰਾਂ ਦੇ ਭਰਾ ਰੰਜੀਵਨ ਹੁਰਾਂ ਦੀ ਕਾਵਿ ਰਚਨਾ ਵਾਲਾ ਵੀਡੀਓ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰ ਕੇ। 

रविवार, 23 जनवरी 2022

आत्मनिर्भरता-पहल की ओर प्रशस्त एक मार्ग-बढ़ईगिरी

प्रविष्टि तिथि: 23 JAN 2022 9:11 AM by PIB Delhi

 पंजीकृत सोसायटी एनईसी के अंतर्गत विशेष अभियान 

नई दिल्ली: 23 जनवरी 2022:(पीआईबी//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)::

प्रतीकात्मक फोटो 

चुराचांदपुर जिले के खोचिजंग गांव के निवासी श्री मांगमिनलुन सिंगसिट ने अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए काफी कष्ट सहन किए। संसाधनों और बुनियादी सेवाओं तक सीमित पहुंच के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। उनके जीवनसंकट में थे। हालांकि, वह एक बढ़ई होने के कारण सौभाग्यशाली भी थे। उन्होंने मात्र 300/-रूपए (तीन सौ रुपये) प्रतिदिन पर शहर में एक बड़ी बढ़ईगीरी कार्यशाला में काम करना शुरू किया, इस छोटी धनराशि के कारण वह अपने परिवार की बुनियादी जरूरतों का भी ध्यान नहीं रख पा रहे थे।

भारत सरकार के उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय के एनईसी के तत्वाधान में एनईआरसीआरएमएस की एनईआरसीओआरएम चरण-III परियोजना के तहत उन्हें वर्ष 2018-19 में बढ़ईगीरी लाभार्थी के रूप में चुना गया था और उन्हें वित्तीय सहायता के तौर पर 18000/- (रुपये अठारह हजार मात्र) की मदद मिली। इसके माध्यम से, उन्होंने बढ़ईगिरी गतिविधि के लिए आवश्यक उपकरण खरीदे। बढ़ईगीरी गतिविधि से होने वाली नियमित आय ने उन्हें न सिर्फ अपने परिवार का भरण-पोषण करने में सहायता की बल्कि उन्हें अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए स्कूल भेजने का भी अवसर प्रदान किया।

"मुझे चुनने के लिए मैं एनएआरएमजी का बहुत आभारी हूं और एक आशा की किरण दिखाने के लिए एनईआरसीओआरएम परियोजना का ऋणी रहूंगा। मैं प्रार्थना करता हूं कि यह परियोजना हमारे गांव में अपनी सुंदर यात्रा जारी रखे।” - श्री मांगमिनलुन सिंगसिट, परियोजना लाभार्थी, चुराचांदपुर।

बाद में, उन्होंने अपनी स्वयं की बढ़ईगीरी की दुकान का स्वामित्व हासिल किया और इसके माध्यम से अपने व्यवसाय का विस्तार करते हुएन केवल गाँव में, बल्कि पूरे कस्बे में एक प्रसिद्ध बढ़ई बनने के अपने इरादों को सिद्ध कर दिखाया। एनएआरएमजी के सहयोग से, अब वे एक सफल उद्यमी और मास्टर प्रशिक्षक भी बन गए हैं। उनका जुनून और प्रतिबद्धता ही उन्हें आज भीड़ से अलग बनाता है।

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रविवार, 12 दिसंबर 2021

प्रधानमंत्री ने बैंक जमा बीमा कार्यक्रम में जमाकर्ताओं को संबोधित किया

12 DEC 2021 at 3:44PM by PIB Delhi

 दिल्ली में हुआ बैंक जमा बीमा कार्यक्रम में जमाकर्ताओं का आयोजन 

नई दिल्ली: 12 दिसंबर 2021: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)::


“पिछले कुछ दिनों में, एक लाख से अधिक जमाकर्ताओं को वर्षों से फंसा उनका पैसा वापस मिल गया है, यह धनराशि 1300 करोड़ रुपये से अधिक है

"आज का नया भारत, समस्याओं के समाधान पर जोर देता है, आज का भारत समस्याओं को टालता नहीं है”

बैंक जमाकर्ताओं के पहले कार्यक्रम में महाराष्ट्र से 8 केंद्रीय मंत्री शामिल हुए -  मुंबई से श्री नितिन गडकरी, पुणे से श्री पीयूष गोयल, ठाणे से श्री परषोत्तम रूपाला व अन्य

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में "जमाकर्ता पहले: गारंटी के साथ व तय समयसीमा में बैंक जमा पर 5 लाख रुपये तक का बीमा भुगतान" विषय पर आयोजित एक समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर केंद्रीय वित्त मंत्री, वित्त राज्य मंत्री, आरबीआई गवर्नर तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। प्रधानमंत्री ने कुछ जमाकर्ताओं को चेक भी सौंपे।

सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का दिन, बैंकिंग क्षेत्र और देश के करोड़ों बैंक खाताधारकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दिन गवाह है कि कैसे दशकों से चली आ रही एक बड़ी समस्या का समाधान हो गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'जमाकर्ता पहले' की भावना बहुत अर्थपूर्ण है। श्री मोदी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में, एक लाख से अधिक जमाकर्ताओं को वर्षों से फंसा उनका पैसा वापस मिल गया है। यह धनराशि 1300 करोड़ रुपये से अधिक है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई भी देश समस्याओं का समय पर समाधान करके  ही उन्हें विकराल होने से बचा सकता है। उन्होंने कहा कि हालांकि, वर्षों से एक प्रवृत्ति रही कि समस्याओं को टाल दो। आज का नया भारत, समस्याओं के समाधान पर जोर देता है, आज का भारत समस्याओं को टालता नहीं है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत में बैंक जमाकर्ताओं के लिए इंश्योरेंस की व्यवस्था 60 के दशक में बनाई गई थी। पहले बैंक में जमा रकम में से सिर्फ 50 हजार रुपए तक की राशि पर ही गारंटी थी। फिर इसे बढ़ाकर एक लाख रुपए कर दिया गया था। यानि अगर बैंक डूबा, तो जमाकर्ताओं को सिर्फ एक लाख रुपए तक ही मिलता था, लेकिन वो भी गारंटी नहीं कि कब मिलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा, “ गरीब की चिंता को समझते हुए, मध्यम वर्ग की चिंता को समझते हुए हमने इस राशि को 1 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया है। यानि आज की तारीख में यदि कोई भी बैंक संकट में आता है, तो जमाकर्ताओं को, 5 लाख रुपए तक तो जरूर वापस मिलेगा।” कानून में संशोधन करके एक और समस्या का समाधान किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले जहां पैसा वापसी की कोई समय सीमा नहीं थी, हमारी सरकार ने 90 दिन अर्थात् 3 महीने के भीतर पैसा वापसी (रिफंड) की समय सीमा निर्धारित कर दी है। उन्‍होंने कहा कि बैंक अगर डूबने की स्थिति में भी है, तो 90 दिन के भीतर जमाकर्ताओं को उनका पैसा वापस मिल जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की समृद्धि में बैंकों की बड़ी भूमिका है और बैंकों की समृद्धि के लिए जमाकर्ताओं की राशि सुरक्षित होना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि हमें बैंक बचाने हैं, तो जमाकर्ताओं को सुरक्षा देनी ही होगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में अनेक छोटे सरकारी बैंकों को बड़े बैंकों के साथ मर्ज करके, उनकी कैपेसिटी, कैपेबिलिटी और ट्रांसपेरेंसी हर प्रकार से सशक्त की गई है। जब आरबीआई, को-ऑपरेटिव बैंकों की निगरानी करेगा तो उससे भी इनके प्रति सामान्य जमाकर्ता का भरोसा और बढ़ेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि समस्या सिर्फ बैंक अकाउंट की ही नहीं थी, बल्कि दूर-सुदूर तक गांवों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने की भी थी। आज देश के करीब-करीब हर गांव में 5 किलोमीटर के दायरे में बैंक ब्रांच या बैंकिंग कॉरस्पोंडेंट की सुविधा पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि आज भारत का सामान्य नागरिक कभी भी, कहीं भी, सातों दिन, 24 घंटे, छोटे से छोटा लेनदेन भी डिजिटली कर पा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे अनेक सुधार हैं जिन्होंने 100 साल की सबसे बड़ी आपदा में भी भारत के बैंकिंग सिस्टम को सुचारु रूप से चलाने में मदद की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब दुनिया के समर्थ देश अपने नागरिकों तक मदद पहुंचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब भारत ने तेज़ गति से देश के करीब-करीब हर वर्ग तक सीधी मदद पहुंचाई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में किए गए उपायों से बीमा, बैंक ऋण और वित्तीय सशक्तिकरण जैसी सुविधाओं को गरीबों, महिलाओं, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे किसानों के बड़े वंचित वर्ग तक पहुंचा दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे पहले किसी भी विशेष तरीके से देश की महिलाओं तक बैंकिंग व्यवस्था नहीं पहुंची थी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इसे प्राथमिकता के तौर पर लिया है। जन धन योजना के अंतर्गत खोले गए करोड़ों बैंक खातों में से आधे से अधिक महिलाओं के खाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर इन बैंक खातों का प्रभाव पड़ा है और हमने हाल के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में भी इसे देखा है।”

कई केंद्रीय मंत्री भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए

महाराष्ट्र से जमाकर्ताओं के पहले कार्यक्रम में 8 केंद्रीय मंत्री शामिल हुए। मुंबई से श्री नितिन गडकरी, पुणे से श्री पीयूष गोयल और ठाणे से श्री परषोत्तम रूपाला शामिल हुए।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने कहा, “बीमा कवर को बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने के सरकार के फैसले से वरिष्ठ नागरिकों और मध्यम वर्ग के जमाकर्ताओं को सबसे ज्यादा लाभ होगा। देरी से ही सही, लेकिन उपभोक्ताओं को अंतत: न्याय मिल गया है।”

वाणिज्य एवं उद्योग और वस्त्र मंत्री श्री पीयूष गोयल ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने जमा राशि पर बीमा कवर बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार को एक पत्र लिखा था।

श्री गोयल ने आगे कहा, “पहले जमाकर्ताओं को उनका पैसा 8-9 साल बाद मिलता था जिसे जमा बीमा ऋण गारंटी योजना के अंतर्गत घटाकर 90 दिन कर दिया गया है। इससे लोगों का बैंकों पर भरोसा बढ़ाने में मदद मिलेगी।”

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री परषोत्तम रूपाला ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों, विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और जवाबदेही को प्रदर्शित किया है।

केंद्रीय मंत्रियों ने जमा बीमा योजना के आमंत्रित लाभार्थियों से उनके संबंधित स्थानों पर बातचीत की और रिफंड राशि के चेक भी वितरित किए।

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एमजी/एएम/जेके/आरके/एमएस/एसके/डीए



रविवार, 15 अगस्त 2021

इतिहास में शामिल की गई गंभीर गलतबयानियों में सुधार लाया जाएगा

 प्रविष्टि तिथि: 15 AUG 2021 7:34 PM by PIB Delhi

श्री जी किशन रेड्डी ने उठाया का मुद्दा

कहा- देश के इतिहास में शामिल हैं बहुत सी गलतबयानियां 

उन्होंने आजादी के अमृत महोत्सव के भाग के रूप में स्वतंत्रता के 75 वर्षों को चिह्नित करने के लिए एनएमए में आयोजित एक प्रदर्शनी 'विजय एवं शौर्य स्मारक' का उद्घाटन भी किया


नई दिल्ली
:15 अगस्त 2021: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)::

राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (एनएमए) द्वारा 'विजय एवं शौर्य स्मारकों' पर आयोजित की गई फोटो प्रदर्शनी के माध्यम से हजारों वर्षों तक हमारी सभ्यता के लोकाचार को उजागर करने की दिशा में प्रयास किए गए।

श्री जी किशन रेड्डी ने देश की कला, संस्कृति और सभ्यता वाले मूल्यों के संदर्भ में जानकारी प्रदान करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

संस्कृति राज्य मंत्री, श्री अर्जुन राम मेघवाल और श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने भी इस उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया।

इस अवसर पर उपस्थित प्रसिद्ध कवियों के माध्यम से सुनायी गई कविताओं का उपस्थित गणमान्य लोगों ने भरपूर आनंद लिया।

केंद्रीय संस्कृति, पर्यटन और पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्री (डोनर), श्री जी किशन रेड्डी ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण में 'विजय एवं शौर्य स्मारक' पर आयोजित की गई एक फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर संस्कृति राज्य मंत्री, श्री अर्जुन राम मेघवाल और श्रीमती मीनाक्षी लेखी भी उपस्थित हुए। देश की स्वतंत्रता के 75 वर्षों के उपलक्ष्य के अवसर पर मनाए जा रहे 'आजादी के अमृत महोत्सव' के एक हिस्से के रूप में, राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण में 'विजय एवं शौर्य स्मारक' पर एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

इस उद्घाटन समारोह के दौरान एनएमए, श्री तरुण विजय के साथ संस्कृति मंत्रालय एवं राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के अन्य अधिकारी भी उपस्थित हुए। राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (एनएमए) के माध्यम से 'विजय एवं शौर्य स्मारक' की फोटो प्रदर्शनी द्वारा उन लोगों के बारे में जानकारी प्रदान करने की कोशिश की गई, जिन्होंने हजारों वर्षों तक हमारी सभ्यता के लोकाचारों को संभाल कर रखा और हमारे देश में पिछले 750 वर्षों में हुए आक्रमणों और उपनिवेशीकरण के कारण हमारी सभ्यता की रक्षा करने वाले लोगों को भुला दिया गया था। इसके माध्यम से, प्रदर्शनी में सहस्राब्दियों से चलने वाले प्रतिरोधों और वीरता का प्रदर्शन किया गया है। इसमें वारंगल के काकैत्य कला थोरानम की तस्वीरें शामिल की गईं, साथ ही झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का किला, जो कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के युद्ध में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाली उनकी वीरता का प्रतीक है और चित्तौड़गढ़ का विजयस्तंभ जो महमूद खिलजी के नेतृत्व वाली सल्तनत पर जीत की याद को दोहराता है, उनको भी शामिल किया गया।

प्रदर्शनी का संपूर्ण दौरा करने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए, श्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि आज 130 करोड़ देशवासियों के लिए एक बड़ा ही ऐतिहासिक दिन है क्योंकि आज हम आजादी के 74 वर्ष पूरे कर चुके हैं और 75वें वर्ष की ओर बढ़ रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से सरकार द्वारा देश के वास्तविक इतिहास को नागरिकों के सामने लाने की कोशिश की जा रही है और वीरता स्मारकों पर आयोजित किया गया यह प्रदर्शन, उसी लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। श्री जी किशन रेड्डी ने देश की कला, संस्कृति और सभ्यता वाले मूल्यों की जानकारी के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में संस्कृति मंत्रालय द्वारा इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए काम किया जा रहा है।

श्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि "हमारे देश का इतिहास वीरता एवं बहादुरी वाली कहानियों से भरा हुआ है, जिन्होंने या तो दिन का उजाला नहीं देखा है या औपनिवेशिक विचारों के कारण उन्हें पूर्ण रूप से गलत प्रकार से प्रस्तुत किया गया है। हमारे देश के इतिहास में इन गलतबयानियों में सुधार किया जाएगा।"

मंत्री द्वारा यह भी कहा गया कि "जब भारत के अधिकांश इलाकों में 15 अगस्त, 1947 के दिन स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाया जा रहा था, तब निजाम क्षेत्र को 17 सितंबर, 1948 तक यानी 1 वर्ष, 1 महीना और 1 दिन तक इंतजार करना पड़ा था, जब तक इस क्षेत्र को सरदार पटेल द्वारा आजाद नहीं करवाया गया।" उन्होंने कहा कि "निजाम की अराजक सेनाओं द्वारा न सिर्फ गांवों को लूटने और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करने का काम किया गया बल्कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने की कोशिश करने वाले लोगों पर गोलियां भी चलाई गई, लेकिन इन बातों को दबा दिया गया और शायद ही कभी इन विषयों पर चर्चा की गई। इन कहानियों को अब प्रकाश में लाया जाएगा।" श्री किशन रेड्डी ने देश के युवाओं से इतिहास में घटित हुई ऐसी घटनाओं के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करने के महत्व पर भी बल दिया गया। उन्होंने कहा कि "युवाओं को इतिहास में लोगों द्वारा दी गई उनकी आहुतियों और योगदान के बारे में जानकारी प्राप्त होनी चाहिए।"

श्री किशन रेड्डी ने मीडिया से भी अनुरोध किया कि वे एकता के संदेश के प्रचार-प्रसार के लिए सरकार की पहल एवं प्रधानमंत्री श्री मोदी के विजन को समर्थन प्रदान करें, जैसा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिए गए अपने भाषण में अभी से लेकर 25 वर्षों तक के लिए एक भारत की परिकल्पना की है। उन्होंने कहा कि जब 2047 में भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे कर रहा होगा तो उसे भ्रष्टाचार से मुक्त एवं संस्कृति, अर्थव्यवस्था के मामले में एक मजबूत देश होना चाहिए।

मंत्री ने सरकारी कार्यक्रमों में लोगों की भागीदारी के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि "सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए लेकिन उनमें लोगों को भी शामिल होना चाहिए।"

संस्कृति राज्य मंत्री, श्री अर्जुन राम मेघवाल ने स्मारकों के संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, चित्तौड़गढ़ में विजय स्‍तंभ के संरक्षण को बनाए रखने के लिए आवश्यक उपाय करने की ओर इशारा किया। उन्होंने देश में घटित हुई ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में हमारे इतिहास की किताबों और समाचार पत्रों में सही रूप से दर्शाने के महत्व पर भी बल दिया और इसमें शामिल संस्थानों से इस विषय पर ध्यान देने के लिए कहा। उन्होंने महाराणा प्रताप सिंह के साहस और पराक्रम को याद करते हुए कहा कि "शौर्य की कहानियों को उजागर किया जाना चाहिए और उनमें सुधार करने की आवश्यकता है।"

संस्कृति राज्य मंत्री, श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने कहा कि लोगों को हमारे देश के संपूर्ण इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि वर्तमान समय में लोगों को दिल्ली के राजा अननपाल और महरौली के महत्व के बारे में बहुत जानकारी प्राप्त नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है और इतिहास के बारे में लोगों को सच्चाई जानने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमृत महोत्सव के दौरान समुद्र मंथन किए जाने कि आवश्यकता है जिससे सत्य रूपी अमृत की प्राप्ति हो सके।

इस अवसर पर आयोजित किए गए कवि सम्मेलन में प्रसिद्ध कवियों ने अपनी कुछ कविताओं का पाठ भी किया।

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मंगलवार, 27 जुलाई 2021

तीनों सेनाओं के संयुक्त प्रशिक्षण पर जोर दिया

प्रविष्टि तिथि: 27 JUL 2021 7:03PM by PIB Delhi

अंडमान और निकोबार के एयर डिफेन्स को मजबूत करने पर जोर

अंडमान निकोबार कमान के कमांडर-इन-चीफ ने  किया दौरा 

पोर्ट ब्लेयर स्थित वायु सेना कंपोनेट का किया विशेष दौरा 

*अंडमान और निकोबार कमान के कमांडर-इन-चीफ ने ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा की

*तीनों सेनाओं के संयुक्त प्रशिक्षण पर जोर दिया

*अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के एयर डिफेन्स को मजबूत करने पर जोर दिया

*एयर वारियर्स के असाधारण समर्पण के लिए पुरस्कार देने की बात कही

नई दिल्ली: 27 जुलाई 2021: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)::

अंडमान और निकोबार कमान के कमांडर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अजय सिंह ने 27 जुलाई, 2021 को परिचालन संबंधी तैयारियों की समीक्षा करने के लिए पोर्ट ब्लेयर में वायु सेना मुख्यालय के कंपोनेंट का दौरा किया। एयर फोर्स कंपोनेंट कमांडर एयर कमोडोर एस श्रीधर ने उनका स्वागत किया। लेफ्टिनेंट जनरल अजय सिंह को मुख्यालय वायु सेना कंपोनेंट के लेआउट और इसके इंफ्रास्ट्रक्चर विकास योजना के बारे में जानकारी दी गई।

लेफ्टिनेंट जनरल अजय सिंह ने वायु योद्धाओं के साथ बातचीत की और तीनों सेवाओं के संयुक्त उपयोग पर अपना दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने तीनों सेवाओं के संयुक्त प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित किया और विरोधियों पर बढ़त के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ तालमेल बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि पेशेवर ज्ञान और कड़ी मेहनत सफलता की कुंजी है।

लेफ्टिनेंट जनरल अजय सिंह ने वायु सेना स्टेशन पर्थरापुर और 153 स्क्वाड्रन का भी दौरा किया, जिन्हें 'द्वीप प्रहरी' के रूप में जाना जाता है। भारतीय वायु सेना कर्मियों के साथ अपनी बातचीत के दौरान, उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के एयर डिफेन्स को मजबूत करने पर जोर दिया, जिसका हिंद महासागर क्षेत्र में बदलती भू-राजनीतिक स्थिति के कारण सामरिक महत्व है। उन्होंने कुछ एयर वारियर्स के असाधारण समर्पण और कर्तव्य निर्वहन के लिए मौके पर ही प्रशंसा दी।

लेफ्टिनेंट जनरल अजय सिंह ने वायु विहार, ब्रुकशाबाद में वायु सेना कर्मियों के लिए नवनिर्मित आवासीय क्षेत्र का भी दौरा किया, जहां उन्हें आवासीय क्षेत्र में विकसित विभिन्न कल्याणकारी सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने सुदूर द्वीपों में विभिन्न चुनौतियों के बावजूद प्रभावी हवाई निगरानी में वायु सेना कंपोनेंट द्वारा किए गए प्रयासों की भी सराहना की।

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बुधवार, 23 जून 2021

मामला भारत श्रम शक्ति भागीदारी में लैंगिक अंतर का

प्रविष्टि तिथि: 23 JUN 2021 5:05 PM by PIB Delhi

लैंगिक अंतर को कम करने का सामूहिक प्रयास जारी--श्रम मंत्री

संतोष गंगवार की जी-20 श्रम और रोजगार मंत्रियों की बैठक में घोषणा 

ईडब्ल्यूजी प्राथमिकताओं पर मंत्रिस्तरीय पर किया विशेष संबोधन  


लुधियाना
: 23 जून 2021: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)::

केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री श्री संतोष गंगवार ने कहा है कि भारत श्रम शक्ति भागीदारी में लैंगिक अंतर कम करने के लिए सामूहिक प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश शिक्षा, प्रशिक्षण, कुशलता, उद्यमिता विकास और समान कार्य के लिए समान वेतन सुनिश्चित कर रहा है। श्री गंगवार आज यहां जी-20 श्रम और रोजगार मंत्रियों की बैठक में घोषणा और कार्य समूह प्राथमिकताओं पर मंत्रिस्तरीय संबोधन कर रहे थे। श्री गंगवार ने कहा कि मजदूरी पर नई संहिता, 2019 से मजदूरी, भर्ती और रोजगार की शर्तों में लिंग आधारित भेदभाव कम होगा। सभी प्रतिष्ठानों में सभी प्रकार के कार्य के लिए महिलाएं हकदार हैं। नियोक्ताओं को उनकी सुरक्षा और काम के घंटों के प्रावधान सुनिश्चित करने होंगे। महिलाएं अब रात के समय भी काम कर सकती हैं। 

श्री गंगवार ने बताया कि सवैतनिक मातृत्व अवकाश की अवधि 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दी गई है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में महिला उद्यमियों को छोटे उद्यम शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता दी गई है। इस योजना के तहत 9 हजार बिलियन रुपये के जमानत मुक्त ऋण वितरित किए गए हैं। इस योजना में लगभग 70 प्रतिशत खाते महिलाओं के हैं। 

श्रम और रोजगार मंत्री ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा संबंधी नई संहिता में अब स्वरोजगार और कार्य बल के अन्य सभी वर्गों को भी सामाजिक सुरक्षा कवरेज के दायरे में शामिल किया जा सकता है। असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए 2019 में शुरू की गई स्वैच्छिक और अंशदायी पेंशन योजना में 60 वर्ष की आयु के बाद न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन का प्रावधान है।

श्रम मंत्री ने संयुक्त मंत्रिस्तरीय घोषणा को अपनाने का समर्थन करते हुए इस बात पर जोर दिया कि सदस्य देशों द्वारा इस तरह की पहल पूरी युवा पीढ़ी के समग्र विकास और क्षमता निर्माण के लिए काफी मददगार साबित होगी, जो तेजी से विकसित हो रही है और अब महामारी के कारण अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है।

रोजगार कार्य समूह ने महिलाओं के रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और दूरदराज के कामकाज सहित प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। बैठक का विषय श्रम बाजारों और समाजों की समावेशी, टिकाऊ और लचीली वसूली को प्रोत्साहन रहा।

वर्ष 2014 में जी-20 के नेताओं ने ब्रिसबेन में श्रम शक्ति भागीदारी दरों में पुरुषों और महिलाओं के बीच के अंतर को 2025 तक 25 प्रतिशत कम करने का संकल्प किया था। यह संकल्प श्रम बाजार में 100 मिलियन महिलाओं को लाने, वैश्विक और समावेशी विकास को बढ़ाने तथा गरीबी और असमानता को कम करने के उद्देश्य के साथ व्यक्त किया गया था। हाल के वर्षों में लगभग सभी जी-20 देशों ने समान अवसरों, श्रम बाजार में महिलाओं की भागीदारी और लैंगिक वेतन अंतर को कम करने के मामले में प्रगति की है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 महामारी के प्रभाव के कारण लैंगिक असमानताओं को कम करने की प्रक्रिया धीमी हो गई है। जी-20 देशों द्वारा लागू किए गए उपायों से रोजगार और कोविड-19 के सामाजिक प्रभाव को कम करने में मदद मिली। फिर भी कई देशों के साक्ष्य महिलाओं पर असंगत प्रभाव दिखाते हैं। श्रम बाजारों और समाजों में लैंगिक असमानता बढ़ने के जोखिम को स्वीकार करते हुए रियाद शिखर सम्मेलन में जी-20 नेताओं ने महिलाओं के रोजगार की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ ब्रिस्बेन लक्ष्य को हासिल करने के लिए रोडमैप तैयार करने का आह्वान किया था।

इस आह्वान के उत्तर में ब्रिस्बेन लक्ष्य की ओर और उससे आगे के जी-20 रोडमैप को हमारे श्रम बाजारों के साथ-साथ सामान्य रूप से समाजों में महिलाओं और पुरुषों के लिए समान अवसर और परिणाम प्राप्त करने के लिए विकसित किया गया है। यह रोडमैप महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, रोजगार और लैंगिक समानता की गुणवत्ता (ऑस्ट्रेलिया, 2014) और श्रम शक्ति भागीदारी में लैंगिक अंतर कम करने की जी-20 नीति सिफारिशों तथा महिलाओं की रोजगार गुणवत्ता में सुधार करके वेतन (जर्मनी 2017) के लिए जी-20 नीति प्राथमिकताओं पर आधारित है।

श्रम बाजार में महिलाओं की भागीदारी और उनके रोजगार की गुणवत्ता में सुधार में अनेक कारक बाधक बने हुए हैं। इन बाधाओं पर काबू पाना न केवल ब्रिस्बेन लक्ष्य और सदस्य देशों की पिछली प्रतिबद्धताओं को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि श्रम बाजार और समाजों में पूर्ण लैंगिक समानता पर भी लक्ष्य साधना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि नीतिगत उपायों को व्यवहारवादी अंतर्दृष्टि द्वारा, आंकड़ों और साक्ष्यों के आधार पर सूचित किया जाए और राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार अनुकूल बनाया जाए। इस पृष्ठभूमि में ब्रिस्बेन लक्ष्य की ओर और उससे आगे का रोडमैप महिलाओं के रोजगार की मात्रा और गुणवत्ता बढ़ाने, समान अवसर सुनिश्चित करने तथा श्रम बाजार में बेहतर परिणाम प्राप्त करने, सभी क्षेत्रों और व्यवसायों में महिलाओं और पुरुषों के समान वितरण को प्रोत्साहित करने, लैंगिक वेतन अंतर से निपटने, महिलाओं तथा पुरुषों के बीच भुगतान और अवैतनिक काम के अधिक संतुलित वितरण को प्रोत्साहित करने और श्रम बाजार में भेदभाव और लैंगिक रुढ़िबद्धता के समाधान के रूप में तय किया गया है।

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सोमवार, 21 जून 2021

पूरे भारत में 75 विरासत स्थलों पर आयोजित हुए योग कार्यक्रम

 21-जून-2021 13:04 IST

'योग, एक भारतीय विरासत' के अंतर्गत चला विशेष अभियान 

श्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने युवाओं से स्वस्थ और खुशहाल भविष्य के लिए योग को अपनाने का आग्रह किया


नई दिल्ली
: 21 जून 2021: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)::

संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)श्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने आज सातवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में संस्कृति और पर्यटन मंत्रालयों के अधिकारियों,योग विशेषज्ञों और योग प्रशंसकों के साथ योग किया। केंद्रीय मंत्री "योग, एक भारतीय विरासत" अभियान का नेतृत्व कर रहे थे। यह कार्यक्रम 75 सांस्कृतिक विरासत स्थलों पर आयोजित किया गया था, जिसमें स्वतंत्रता के 75 वर्ष मनाने के उपलक्ष्य में मंत्रालय के सभी संस्थानों/निकायों की सक्रिय भागीदारी थी। वर्तमान महामारी की स्थिति को देखते हुएयोग के लिए भाग लेने वालों की संख्या प्रत्येक स्थल पर 20 तक सीमित थी। योग प्रदर्शन से पहले केंद्रीय मंत्री और कार्यक्रम में शामिल लोगों ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन का सीधा प्रसारण देखा।

लाल किले पर योग समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत में श्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि योग हमारी सबसे बड़ी धरोहर है। इसका श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को जाता है कि उन्होंने इस आरोग्य मंत्र को पूरी दुनिया में लोकप्रिय बनायाहै। परिणामस्वरूप आज पूरा विश्व अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाता है और लोगों ने इसे अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लिया है।उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में अमृत महोत्सव के तहत अंतर्राष्ट्रीययोग दिवस 2021 मनाया जा रहा है। इसी के अनुसार संस्कृति मंत्रालय ने देश भर में 75 विरासत स्थलों पर योग कार्यक्रम आयोजित किए हैं। उन्होंने युवाओं से स्वस्थ और खुशहाल भविष्य का आनंद लेने के लिए अपने जीवन में योग को अपनाने का आग्रह किया।

श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि आज दुनिया को एमयोग ऐप मिल रहा है, जिसमें कई भाषाओं में सामान्य योग प्रोटोकॉल पर आधारित योग प्रशिक्षण के अनेक वीडियो उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि एमयोग ऐप निश्चित रूप से विश्व के सभी लोगों को स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीने में सहायक होगा।

आचार्य प्रतिष्ठा के मार्गदर्शन में लाल किले पर योग प्रोटोकॉल प्रदर्शन किया गया। भारत सरकार के सचिव (संस्कृति) श्री राघवेन्द्र सिंह, भारत सरकार के सचिव (पर्यटन) श्री अरविंद सिंह और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस योग अभियान में शामिल हुए।

संस्कृति मंत्रालय ने एलोरा गुफा (औरंगाबाद), नालंदा (बिहार), साबरमती आश्रम (गुजरात), हम्पी (कर्नाटक), लद्दाख शांति स्तूप (लेह), सांची स्तूप (विदिशा), शीश महल (पटियाला), राजीव लोचन मंदिर (छत्तीसगढ़), बोमडिला (अरुणाचल प्रदेश) जैसे विरासत स्थलों पर योग और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए।

शीश महल, पटियाला के योग कैंप का दृश्य देखने वाला था। शाही शहर में योग का जलवा भी अलग सी छटा बिखेर रहा था। कभी किसी ज़माने में क्रिकेट को भारतीय आसमान पर ले जाने वाला पटियाला अब भारतीय योग को बुलंदियों पर लेजाने में योगदान दे रहा था। 

वारंगल के वारंगल किला में लगा योग शिविर भी कमाल का रहा। कभी नक्सलवाद का गढ़ रहे वारंगल में योग की शांति एक नया इतिहास रच रही थी। अंतर्मन की कलह और बेचैनी के आतंक को नियंत्रित करने के भी अशोक उपाय बता रहा था आज का योग शिविर।  

एलोरा गुफा,एलोरा,औरंगाबाद में पहले पहल केवल गुफाओं का नाम था। ये गुफाएं भी गहरे योग के बिना कुछ समझा पाने में सफल नहीं रहती। इन गुफाओं में बनी ,मूर्तियां क्या संदेश देती हैं इसे गहरे योग के ध्यान से ही समझा जा सकता है। ाजका का योग शिविर इस मकसद से भी सफलता पूर्वक ज्ञान दे रहा था। 

गंगईकोंडा चोलापुरम, बोमडिला(अरुणाचल प्रदेश), राजीव लोचन मंदिर,छत्तीसगढ़ और हम्पी सर्किल में लगे योग शिविर भी पूरी तरह सफल रहे।