मंगलवार, 2 सितंबर 2014

AAO PUNJABI SIKHIE 2

 ਆਓ ਪੰਜਾਬੀ ਸਿੱਖੀਏ--ਕਰਮਜੀਤ ਗਰੇਵਾਲ ਦੇ ਸੰਗੀਤਕ ਅੰਦਾਜ਼ ਨਾਲ

Published on Jun 11, 2013
ਬਾਲ ਮਨਾਂ ਨੂੰ ਪੰਜਾਬੀ ਮਾਂ ਬੋਲੀ ਨਾਲ ਜੋੜਨ ਲਈ ਅਨਮੋਲ ਤੋਹਫ਼ਾ American India Foundation Trust ਨੇ ਇਸ ਗੀਤ ਨੂੰ  ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਪਹਿਲਾ ਦਰਜਾ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕੀਤਾ ਹੈ। B. Writer&Singer:karamjit s grewal 9872868913 LALTON KALAN LUDHIANA MUSIC:Jhande Brothers

शुक्रवार, 1 अगस्त 2014

उस दिन बहुत गुस्से में थी हरजिंदर कौर

संगीता भंडारी ने उठाया 40 घंटे तक धरने पर बैठी हरजिंदर को Video 
DC और DCP ने दिया हरजिंदर को हर सम्भव सहयोग का आश्वासन
लुधियाना: 30 जुलाई 2014: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन):
ससुराल पर अन्याय का आरोप लगाकर इन्साफ पाने के लिए लगातार 40 घंटे तक धरने पर बैठने वाली हरजिंदर को  धरने से उठने के लिए मनाने में सफलता मिली भारतीय जनता पार्टी  की जिला सचिव संगीता भंडारी को। इस से पूर्व बेलन ब्रिगेड की अनीता शर्मा, इंकलाबी केंद्र के जसवंत जीरख, आम आदमी पार्टी की  तरफ से के एल शर्मा और जानी मानी लेखिका गुरचरण कौर कौचर ने भी इस मकसद के लिए अनथक प्रयास किये। बुधवार 30 जुलाई की सुबह जब संगीता भंडारी ने धरने पर बैठी हरजिंदर कौर का हाथ थाम तो हरजिंदर भावुक हो गई। गुस्से के मारे उसका चेहरा भी तमतमा रहा था और आँखों में रुक रुक कर आंसू भी आ रहे थे जिन्हे रोकने का वह नाकाम प्रयास भी कर रही थी।  सुश्री संगीता भंडारी ने डिप्टी कमिश्नर रजत से विशेष समय लिया और  हरजिंदर को उसने जा कर मिलवाया। डीसी साहिब ने इस बात का गंभीरता से नोटिस लिया कि उन्हें इसने की समय रहते सूचना क्यों नहीं दी गई। गौरतलब है कि ईद की छुट्टी आ जाने से कहीं न कहीं कम्युनिकेशन गैप रहने से ही सारी गलतफहमी पैदा हुई। डिप्टी कमिश्नर ने सारी बात बहुत ही ध्यान से सुनी और हरजिंदर के भावुक मन पे आये ज़ख्मों पर हमदर्दी की मरहम लगाते हुए उसे हर सम्भव सहयोग का आश्वासन भी दिया।
गौरतलब है कि उसने ससुराल पक्ष पर कई आरोप लगाये। विवाह के बाद मारपीट और दहेज की मांग जैसे मामले सामने आने पर  हरजिंदर करीब तीन माह से इन्साफ के लिए भटक रही है। सोमवार 28 जुलाई को किसी गलतफहमी के चलते उसका प्रशासन से गतिरोध पैदा हो गया और वह रात को भी डीसी आफिस के सामने बैठी रही।  अगले दिन ईद की छुट्टी थी इसलिए 29 जुलाई को भी उसकी मुलाक़ात डीसी साहिब से नहीं हो सकी। इसी बीच बेलन ब्रिगेड की अनीता शर्मा सहित कई लोगों  ने धरने से उठकर उसे अपने घर चलने को भी कहा लेकिन वह उसी जगह पर अड़ी रही। आखिर यह बात भाजपा की सचिव संगीता भण्डारी तक भी पहुंची और इसका पता चलते ही उन्होंने सारे मामले का पता लगाया। मोदी सरकार के होते हुए किसी महिला को 40-40 घंटों तक धरना देना पड़े यह बात उन्हें बहुत बुरी लगी।  वह तुरंत डीसी आफिस पहुंची और हरजिंदर के गुस्से को शांत किया। यही नहीं डीसी साहिब से तुरंत वक़्त लेकर हरजिंदर को उनसे मिलवाया। इधर भाजपा की सचिव थी जो सारे मामले को सुलझाने में लगी थी दूसरी तरफ अकाली नेता गुरिंद्रपाल सिंह पप्पू हरजिंदर के ससुराल पक्ष की प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद थे और उनका पक्ष ले रहे थे। ससुराल पक्ष ने खुद को सही ठहराते हुए कहा कि उनकी बहु उन्हें  बदनाम कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हरजिंदर का विवाह करवाने का मकसद वास्तव में आस्ट्रेलिया की पीआर हासिल करना था। सही कौन है यह तो वक़्त ही बताएगा और फैसला भी कानून ने ही करना है पर एक बात फिर सामने आई कि  अकाली नेता जन-मुद्दों पर भी भाजपा नेताओं के के सामने आने से हिचकचाते नहीं।
गत दिनों गड़वासू छात्रों की स्ट्राइक में भी अखिल भारतीय विद्धार्थी परिषद ने भी छात्र-छात्राओं का समर्थन कर दिया जबकि अकाली नेता यही कहते रहे--हड़तालों/धरनों/रैलियों का सरकार पर कोई असर नहीं होता। 

गुरुवार, 24 जुलाई 2014

बालटाल हिंसा:अब हम और सहन नहीं करेंगे--Gaurav Bhatti

बालटाल में हुई हिंसा के खिलाफ ज़ोरदार रोष प्रदर्शन

पुतला फूंक कर दी संघर्ष तेज़ करने की चेतावनी
लुधियाना: 23 जुलाई 2014: (मोहन लाल//पंजाब स्क्रीन):
बालटाल हिंसा के विरोध में रोष प्रदर्शनों का सिलसिला आज भी जारी रहा। श्री नीलकंठ सेवा सोसायटी ने सुभानी बिल्डिंग चौंक में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के खिलाफ ज़ोरदार रोष प्रदर्शन किया। अध्यक्ष गौरव भट्टी के नेतृत्व में हुए इस रोष प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने उम्र अब्दुल्ला के पुतले को जूते मारे और और उसे आग दिखाई। इस मौके पर इन लोगों ने जम्मू कश्मीर पुलिस के खिलाफ भी ज़बरदस्त नारेबाजी की  स्पष्ट कहा कि हिन्दू शरीफ अवश्य होते हैं पर कमज़ोर नहीं। 
अगर यह सिलसिला नहीं रुका तो हम इसका मुँहतोड़ जवाब देंगें। धरने प्रदर्शनों का सिलसिला तेज़ किया जायेगा। 
ज्ञान स्थल मंदिर के नज़दीक एकत्रित इस संगठन के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए गौरव भट्टी ने बहुत ही साफ़ शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार व वहां की पुलिस साजिश के तहत अलगाववादी ताकतों पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय उन्हे प्रोत्साहित करके लंगर स्थलों पर हमले करने वाले देश विरोधियों को खुली छूट देकर अमरनाथ यात्रा में विघ्न डाल रही है, जिसे हिंदू समाज बर्दाश्त नहीं करेगा।
इस अवसर पर अमित दूआ,  जतिंदर सलूजा, साहिल सेठी, राहुल डंग, दीपक, यश, लव मैनी, कमल भाटिया, रोहित, आशू कुणाल, जतिन, इतिन, सुनील अंकुश, माणिक गोयल, सुशील मल्होत्रा, सूरज गगनेजा, लक्की, तरन कत्याल, पंकज आदि भी उपस्थित थे।

शुक्रवार, 18 जुलाई 2014

लाखों बैंक मुलाज़िम मना रहे हैं राष्ट्रीयकरण की 45वीं वर्षगांठ

साथ ही ले रहे हैं निजीकरण के दानव को रोकने का संकल्प 
लुधियाना:18 जुलाई 2014:(रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन//कैमरा: मोहन लाल):
बैंकों का राष्ट्रीयकरण किये जाने की ऐतिहासिक घटना को लम्बा समय व्यतीत हो चूका है। उस जनहित कदम की यादें ताज़ा करते हुए और संगठन की इस गौरवशाली जीत की 45 वीं वर्षगांठ के संबंध में जगह जगह कार्यक्रम किये जा रहे हैं। गौरतलब है कि कल 19 जुलाई को इसकी 45 वीं वर्षगांठ है। ख़ुशी के इस अवसर पर बैंक मुलाज़िम चिंतित भी थे। यह उपलब्धि अब खतरे में है। इस के सर पर लटक रही है निजीकरण की तलवार। लोग अच्छे कदमों का विकास करते हैं लेकिन हमारे यहाँ अच्छे कदमों को फिर से पीछे की तरफ लेजाने की साज़िशें  रची जा रही हैं। उन्होंने सावधान किया कि आजकल किसी देश को वष में करने के लिए सेना या हथियारों से जंग की  पड़ती बल्कि दुश्मन उस देश की अर्थ  व्यवस्था को ही अपने हाथों में कर लेता है।  यहाँ भी यही हो रहा है लेकिन हम इस कुचेष्टा को सफल नहीं होने देंगें।
लुधियाना में भी आल इण्डिया बैंक इम्प्लाईज़ एसोसिएशन (AIBEA) ने 19 जुलाई के दिन को  अखिल भारतीय मांग दिवस के रूप में मनाया।  संगठन के नेता और वर्कर सख्त गर्मी के बावजूद दूर दूर से आये थे पूरे जोश और संकल्प के साथ कि इस राष्ट्रीयकरण को हमें किसी भी रूप में कायम रखना है।  निजीकरण का दानव इसे निगलने न पाये इस पर नज़र रखनी है। सरकारी बैंकों के कामकाज को जानबूझ कर कमज़ोर करने की साज़िशों को नाकाम बनाना है। 
गौरतलब है कि अगर आज गाँव गाँव में आम इन्सान बैंक सेवाओं का लाभ ले पा रहा है तो इसका 
श्रेय राष्ट्रीकरण को ही जाता है। 
   विवरण                                                   1969                                          2014 
बैंक शाखाएं                                                 8268                                         85,000 
ग्रामी अर्ध शहरी शाखाएं                               1833                                         44,000 
जमाराशियां                                                 4,646 करोड़ रूपये                      80 लाख करोड़ रूपये 
अग्रिम                                                        3,599  करोड़ रूपये                    62 लाख करोड़ रूपये                 ग्राहकों की संख्या                                                                                          60 करोड़               
कृषि हेतु ऋण                                               162 करोड़ रूपये                         6,90,000  करोड़ रूपये    
कुल स्टाफ                                                    1,65,000                                   10,68,000 
प्रति शाखा औसत आबादी                              65,000:1                                  15,000:1 

इस शानदार हकीकत के बावजूद कुछ कड़वे सत्य अभी बाकी हैं। अभी भी देश में 50 करोड़ से अधिक लोगों के पास बैंक का खता नहीं है। पांच लाख से अधिक गाँवों में एक भी  है। इन कुछ कड़वे सत्यों को आधार बनाकर ही सरकार अपने कदम बढ़ा रही निजीकरण की ओर। दूसरी तरफ कार्पोरेट सेक्टर लगातार सार्वजनिक धन को बैंक ऋण अदा न करके लूटने में कामयाब है। इस तरह के डिफल्ट्रॉन को बैंक संगठन अपने तौर पर कई बार उनके नाम सार्वजनिक करके बेनकाब कर चुके हैं लेकिन सरकार इस मामले में कभी गंभीर नहीं दिखी। सरकार और पूंजीपति लगातार बैंकों के निजीकरण और बैंकों के विलय के प्रयासों में लगे हैं। 
जिन लोगों के खाते सरकारी बैंकों में  शून्य एकाउंट से भी खुल जाते हैं वे ज़रा निजी बैंकों में जा कर देखें की वहां खाता कैसे खुलता है? इस लिए बैंकों को निजीकरण से बचाने का संघर्ष केवल बैंक मुलाज़िमों का नहीं बल्कि आम जनता का भी होना चाहिए वरना आपके खाते, आपकी पूंजी सब कुछ पहुँच जायेगा पूंजीपतियों के निजी हाथों में। क्या आपको यह सब खतरनाक नहीं लगता?