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सोमवार, 14 जुलाई 2014
ਲੇਖਕਾਂ ਦੇ ਇੱਕ ਹਿੱਸੇ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕੰਪਿਊਟਰ ਸਿਸਟਮ ਨੂੰ ਪੂਰੀ ਤਰਾਂ ਨਾਕਾਮ
ਹਰਮੀਤ ਵਿਦਿਆਰਥੀ ਅਤੇ ਦੇਸ ਰਾਜ ਕਾਲੀ ਨੇ ਕੀਤੀ ਇਤਰਾਜ਼ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਲੇਖਕਾਂ ਦੀ ਪ੍ਰਤੀਨਿਧਤਾ
ਜੇ ਸਾਡੀ ਗੱਲ ਨਾ ਸੁਣੀ ਗਈ ਤਾਂ ਅਸੀਂ ਅਦਾਲਤ ਤੱਕ ਵੀ ਜਾਵਾਂਗੇ
ਲੁਧਿਆਣਾ: ਕੇਂਦਰੀ ਪੰਜਾਬੀ ਲੇਖਕ ਸਭਾ ਦੀਆਂ ਚੋਣਾਂ ਸਮੇਂ ਪਹਿਲੀ ਵਾਰ ਵਰਤੇ ਗਏ ਕੰਪਿਊਟਰ ਸਿਸਟਮ ਨੂੰ ਸੰਗਠਨ ਦੇ ਕੁਝ ਮੈਂਬਰਾਂ ਨੇ ਬੁਰੀ ਤਰਾਂ ਨਾਕਾਮ ਦਸਦਿਆਂ ਇਸਨੂੰ ਪੂਰੀ ਤਰਾਂ ਰੱਦ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਹੈ। ਕਾਬਿਲੇ ਜ਼ਿਕਰ ਹੈ ਕਿ ਇਸ ਦੀ ਸ਼ੁਰੁਆਤ ਪੰਜਾਬੀ ਭਾਸ਼ਾ ਅਤੇ ਸਾਹਿਤ ਵਿੱਚ ਚੰਗਾ ਨਾਮਣਾ ਖੱਟਣ ਵਾਲੇ ਜਨਮੇਜਾ ਸਿੰਘ ਜੌਹਲ ਨੇ ਬੜੇ ਚਾਵਾਂ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਸੀ। ਉਮੀਦ ਸੀ ਕਿ ਸਾਹਿਤਕ ਅਤੇ ਜੱਥੇਬੰਦਕ ਮਾਮਲਿਆਂ ਵਿੱਚ ਇਸ ਡਿਜਿਟਲ ਯੁਗ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਦਾ ਗਰਮਜੋਸ਼ੀ ਨਾਲ ਸਵਾਗਤ ਕੀਤਾ ਜਾਏਗਾ। ਹੁਣ ਵੀ ਆਸ ਕੀਤੀ ਜਾਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਕਿ ਕਮੀਆਂ ਪੇਸ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਦੂਰ ਕਰਕੇ ਇਸ ਸਿਸਟਮ ਨੂੰ ਹੋਰ ਬੇਹਤਰ ਬਣਾ ਲਿਆ ਜਾਣਾ ਚਾਹਿਦਾ ਹੈ। --ਰੈਕਟਰ ਕਥੂਰੀਆ
ਇਹ ਲਿੰਕ ਵੀ ਦੇਖੋ -----430 ਤੋਂ ਵਧੇਰੇ ਵੋਟਾਂ ਹੀ ਗਾਇਬ ਹਨ
ਜੇ ਸਾਡੀ ਗੱਲ ਨਾ ਸੁਣੀ ਗਈ ਤਾਂ ਅਸੀਂ ਅਦਾਲਤ ਤੱਕ ਵੀ ਜਾਵਾਂਗੇ
ਲੁਧਿਆਣਾ: ਕੇਂਦਰੀ ਪੰਜਾਬੀ ਲੇਖਕ ਸਭਾ ਦੀਆਂ ਚੋਣਾਂ ਸਮੇਂ ਪਹਿਲੀ ਵਾਰ ਵਰਤੇ ਗਏ ਕੰਪਿਊਟਰ ਸਿਸਟਮ ਨੂੰ ਸੰਗਠਨ ਦੇ ਕੁਝ ਮੈਂਬਰਾਂ ਨੇ ਬੁਰੀ ਤਰਾਂ ਨਾਕਾਮ ਦਸਦਿਆਂ ਇਸਨੂੰ ਪੂਰੀ ਤਰਾਂ ਰੱਦ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਹੈ। ਕਾਬਿਲੇ ਜ਼ਿਕਰ ਹੈ ਕਿ ਇਸ ਦੀ ਸ਼ੁਰੁਆਤ ਪੰਜਾਬੀ ਭਾਸ਼ਾ ਅਤੇ ਸਾਹਿਤ ਵਿੱਚ ਚੰਗਾ ਨਾਮਣਾ ਖੱਟਣ ਵਾਲੇ ਜਨਮੇਜਾ ਸਿੰਘ ਜੌਹਲ ਨੇ ਬੜੇ ਚਾਵਾਂ ਨਾਲ ਕੀਤੀ ਸੀ। ਉਮੀਦ ਸੀ ਕਿ ਸਾਹਿਤਕ ਅਤੇ ਜੱਥੇਬੰਦਕ ਮਾਮਲਿਆਂ ਵਿੱਚ ਇਸ ਡਿਜਿਟਲ ਯੁਗ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਦਾ ਗਰਮਜੋਸ਼ੀ ਨਾਲ ਸਵਾਗਤ ਕੀਤਾ ਜਾਏਗਾ। ਹੁਣ ਵੀ ਆਸ ਕੀਤੀ ਜਾਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਕਿ ਕਮੀਆਂ ਪੇਸ਼ਿਆਂ ਨੂੰ ਦੂਰ ਕਰਕੇ ਇਸ ਸਿਸਟਮ ਨੂੰ ਹੋਰ ਬੇਹਤਰ ਬਣਾ ਲਿਆ ਜਾਣਾ ਚਾਹਿਦਾ ਹੈ। --ਰੈਕਟਰ ਕਥੂਰੀਆ
ਇਹ ਲਿੰਕ ਵੀ ਦੇਖੋ -----430 ਤੋਂ ਵਧੇਰੇ ਵੋਟਾਂ ਹੀ ਗਾਇਬ ਹਨ
शनिवार, 7 जून 2014
शुद्ध हिंदी के जादू को जगाता जनाब नीरज का एक यादगारी गीत
कारवां गुज़र गया गुबार देखते रहे
Courtesy:krhapa pukhtunkhwa//YouTube //Uploaded on Apr 8, 2011
नीरज साहिब का एक यादगारी गीत जो आज भी ज़िंदगी की हकीकत को हिंदी के शुद्ध शब्दों में पूरी शिद्दत से बताता है। ज़रा ध्यान से सुनिए उअर चाहें तो साथ साथ पढ़ भी सकते हैं। ज़िंदगी के हर कदम का अहसास दिलाता और साथ ही उसका हिसाब मांगता---यह मधुर सा गीत----।
स्वप्न झरे फूल से,
मीत चुभे शूल से,
लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से,
और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे
कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे!
नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गई,
पाँव जब तलक उठे कि ज़िन्दगी फिसल गई,
पात-पात झर गये कि शाख़-शाख़ जल गई,
चाह तो निकल सकी न, पर उमर निकल गई,
गीत अश्क़ बन गए,
छंद हो दफ़न गए,
साथ के सभी दिऐ धुआँ-धुआँ पहन गये,
और हम झुके-झुके,
मोड़ पर रुके-रुके
उम्र के चढ़ाव का उतार देखते रहे
कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे।
क्या शबाब था कि फूल-फूल प्यार कर उठा,
क्या सुरूप था कि देख आइना मचल उठा
इस तरफ जमीन और आसमां उधर उठा,
थाम कर जिगर उठा कि जो मिला नज़र उठा,
एक दिन मगर यहाँ,
ऐसी कुछ हवा चली,
लुट गयी कली-कली कि घुट गयी गली-गली,
और हम लुटे-लुटे,
वक्त से पिटे-पिटे,
साँस की शराब का खुमार देखते रहे
कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे।
हाथ थे मिले कि जुल्फ चाँद की सँवार दूँ,
होंठ थे खुले कि हर बहार को पुकार दूँ,
दर्द था दिया गया कि हर दुखी को प्यार दूँ,
और साँस यूँ कि स्वर्ग भूमी पर उतार दूँ,
हो सका न कुछ मगर,
शाम बन गई सहर,
वह उठी लहर कि दह गये किले बिखर-बिखर,
और हम डरे-डरे,
नीर नयन में भरे,
ओढ़कर कफ़न, पड़े मज़ार देखते रहे
कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे!
माँग भर चली कि एक, जब नई-नई किरन,
ढोलकें धुमुक उठीं, ठुमक उठे चरण-चरण,
शोर मच गया कि लो चली दुल्हन, चली दुल्हन,
गाँव सब उमड़ पड़ा, बहक उठे नयन-नयन,
पर तभी ज़हर भरी,
ग़ाज एक वह गिरी,
पुंछ गया सिंदूर तार-तार हुई चूनरी,
और हम अजान से,
दूर के मकान से,
पालकी लिये हुए कहार देखते रहे।
कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे।
--गोपालदास 'नीरज'
Courtesy:krhapa pukhtunkhwa//YouTube //Uploaded on Apr 8, 2011
![]() |
| Courtesy Photo |
Film.........नई उम्र की नई फ़स्ल
Singer.............मोहम्मद रफ़ी
Lyrics...............नीरज j
Music...............रौशन
Starring...........Tanuja..Shobhan samrath..s.k.prem..ulhas & leela chitnis.. lyrics,with english translation provided by ASAD at the following site.excellent work.....
http://www.hamaraforums.com/index.php... .........karvan guzar gaya.......
(dreams wilted like flowers,friends hurt like thorns.All embellishments were like autumn tree adorns.The passing of spring:we just stood and watched,dust was all we saw,when the caravan had passed.
Before we had woken up,darkness held sway before our feet could get a grip,life slipped away.
Every leaf fell from the branches,all branches were burnt life came to an end,unfulfilled desires bearing the brunt.songs dissolved in tears and dreams got buried,after they broke and light from lamps departed clothed in smoke.
And we just waited,bent and broken for the flow of life to ebb,to slacken.
dust was all we saw, when the caravan had passed.
Such beauty! flowers fell in love amazed
Such charm! even the mirror shivered totally dazed.
Be it earth,be it sky; every girl and every guy in one direction they all gazed.
Everything just changed one day, buds were trampled and roads strangled what could we do? beaten by time near the edge..on the brink,but nurse the hangover of last night's drink...................................
मीत चुभे शूल से,
लुट गये सिंगार सभी बाग़ के बबूल से,
और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे
कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे!
नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गई,
पाँव जब तलक उठे कि ज़िन्दगी फिसल गई,
पात-पात झर गये कि शाख़-शाख़ जल गई,
चाह तो निकल सकी न, पर उमर निकल गई,
गीत अश्क़ बन गए,
छंद हो दफ़न गए,
साथ के सभी दिऐ धुआँ-धुआँ पहन गये,
और हम झुके-झुके,
मोड़ पर रुके-रुके
उम्र के चढ़ाव का उतार देखते रहे
कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे।
क्या शबाब था कि फूल-फूल प्यार कर उठा,
क्या सुरूप था कि देख आइना मचल उठा
इस तरफ जमीन और आसमां उधर उठा,
थाम कर जिगर उठा कि जो मिला नज़र उठा,
एक दिन मगर यहाँ,
ऐसी कुछ हवा चली,
लुट गयी कली-कली कि घुट गयी गली-गली,
और हम लुटे-लुटे,
वक्त से पिटे-पिटे,
साँस की शराब का खुमार देखते रहे
कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे।
हाथ थे मिले कि जुल्फ चाँद की सँवार दूँ,
होंठ थे खुले कि हर बहार को पुकार दूँ,
दर्द था दिया गया कि हर दुखी को प्यार दूँ,
और साँस यूँ कि स्वर्ग भूमी पर उतार दूँ,
हो सका न कुछ मगर,
शाम बन गई सहर,
वह उठी लहर कि दह गये किले बिखर-बिखर,
और हम डरे-डरे,
नीर नयन में भरे,
ओढ़कर कफ़न, पड़े मज़ार देखते रहे
कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे!
माँग भर चली कि एक, जब नई-नई किरन,
ढोलकें धुमुक उठीं, ठुमक उठे चरण-चरण,
शोर मच गया कि लो चली दुल्हन, चली दुल्हन,
गाँव सब उमड़ पड़ा, बहक उठे नयन-नयन,
पर तभी ज़हर भरी,
ग़ाज एक वह गिरी,
पुंछ गया सिंदूर तार-तार हुई चूनरी,
और हम अजान से,
दूर के मकान से,
पालकी लिये हुए कहार देखते रहे।
कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे।
--गोपालदास 'नीरज'
बुधवार, 21 मई 2014
बुधवार, 14 मई 2014
Aye Ho Tum-Shrii Shrii Anandamurti
Courtesy: AMPS0521//YouTube
Uploaded on Dec 5, 2011
1 of the 5018 songs by PR Sarkar. This is a Prabhat Samgiita, a category of music, in which the singer sings about how happy he is that his lord has come in his heart after a long long time. TYPES OF DEVOTEES; Spiritual discourse Spirituality "Spiritual (music)" Yoga Meditation Guru India MantraAnandaMurti Krsna PR Sarkar Shiva Baba bubu Neohumanism spirituality Microvita economics Prout kaoshiki Kiirtana Tandava nam Kevalam prabhat samgiita Ananda Nagar Types of devotees AMURT Marga; Shrii Anandamurtiji talks about different types Prabhat sangeet Aye Ho Tum. DEVOTIONAL MUSIC; SPIRITUAL MUSI
शनिवार, 10 मई 2014
Dr. Amarjit Singh on:Destruction of Sikh Heritage
07-05-2014 पर प्रकाशित
Dr. Amarjit Singh on : Destruction of Sikh Heritage By 'Kar Sewa 'At Anandpur Sahib
शुक्रवार, 9 मई 2014
"SHAME-GAM KI KASAM"
Courtesy:rajeev pradhan//YouTube
17-02-2011 को अपलोड किया गया
FOOTPATH-1953,MEENA KUMARI,DILIP KUMAR,L:M.SULTANPURI
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