सोमवार, 10 जून 2024

सप्लीमेंटस लिए बिना बॉडी बिल्डिंग कैसे संभव है?

Monday 10th June 2024 at 12:15 AM 

कैसे बच हैं सकते सप्लीमेंटस के साइड इफेक्टस से? 


लुधियाना
: 10 जून 2024: (कोमल शर्मा//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी डेस्क)::

आजकल के व्यस्त युग के रंग ढंग बिक्लुल ही अलग हैं। विरोधी चलन भी एक साथ सामने आने लगे हैं। लोग जिम में भी जाने लगे है लेकिन उनका मोटापा भी बढ़ने लगा है। अधखड़ और वृद्ध लोग तो हुए ही युवा वर्ग भी बुरी तरह से मोटापे के शिकार बन रहा है। दिलचस्प बात है कि ये लोग जिम जाने और लंबी सैर के तजुर्बे भी अच्छी तरह से कर चुके हैं।  इसी बीच जो सवाल उठते रहे हैं उनमें एक सवाल जिम जाने वालों में बढ़ते हुए सप्लीमेंटस के चलन से भी है।  सप्लीमेंटस के साईड इफेक्टस में मोटापा जैसी बुराई भी संभव है? क्या सप्लीमेंटस लिए बिना बॉडी बिल्डिंग संभव भी है क्या? कही सप्लीमेंटस का प्रयोग जिम कल्चर का स्थाई हिस्सा तो नहीं बन गया? या जिम संचालक इसे अपने मुनाफे के लिए बिना सही ज़रूरत के तो नहीं बेच रहे?

ऐसे बहुत से सवाल हैं जिनके जवाब हम समय समय पर इस क्षेत्र के एक्सपर्ट लोगों से बात कर के तलाशते रहेंगे।  इस पोस्ट में हम इसी सवाल की चर्चा करते हैं कि क्या सप्लीमेंट्स के बिना बॉडी बिल्डिंग संभव है ?

तो इस सवाल का जवाब है कि जी हाँ, सप्लीमेंट्स लिए बिना भी बॉडी बिल्डिंग पूरी तरह से संभव है। सप्लीमेंटस विशेषज्ञों की सलह के बिना कभी नहीं लेने चाहिएं। बहुत से लोग बिना किसी सप्लीमेंट के अच्छी बॉडी बना सकते हैं। गांवों में तो अब भी अच्छा खानपान पूरी शुद्धता के साथ उपलब्ध है। शहरों में भी जिम जाने वालों के लिए इसके लिए सही डाइट, नियमित एक्सरसाइज, और पर्याप्त आराम की आवश्यकता होती है। यहां कुछ महत्वपूर्ण बिंदु हैं जो बिना सप्लीमेंट्स के बॉडी बिल्डिंग में मदद कर सकते हैं:

इनमें सबसे पहले हम बात करते हैं-सही पोषण की कि यह कितना  महत्वपूर्ण है। इसके लिए नियमित खानपान और खुराक में क्या क्या होना चाहिए?

प्रोटीन: प्रोटीन इस मामले में सबसे पहले आता है। मांसपेशियों के निर्माण के लिए प्रोटीन बहुत ही आवश्यक है। आप प्रोटीन प्राप्त करने के लिए अंडे, चिकन, मछली, दालें, बीन्स, और डेयरी उत्पादों का सेवन कर सकते हैं। इस मकसद के लिए कुछ अन्य स्रोत भी संभव है। 

कार्बोहाइड्रेट्स: इनका भी शरीर के लिए अलग से गहरा महत्व है। ये ऊर्जा प्रदान करते हैं जो वर्कआउट के लिए आवश्यक होती है। आप साबुत अनाज, चावल, आलू, और फल से अच्छे कार्बोहाइड्रेट्स प्राप्त कर सकते हैं। इनसे मिलने अली ऊर्जा बहुत महत्वपूर्ण है। 

फैटस: के बिना भी इस मामले में पूरी बात नहीं बनती। स्वस्थ फैटस भी बॉडी के लिए बहुत ही जरूरी हैं। आप नटस, बीज, एवोकाडो, और ओलिव ऑयल से स्वस्थ फैट्स प्राप्त कर सकते हैं।

विटामिन और मिनरल्स: प्राप्त करने के लिए ताज़े फल और सब्जियों का सेवन करें ताकि आपके शरीर को सभी आवश्यक विटामिन और मिनरल्स मिल सकें। इनका महत्व इतना कि इन पर अलग से ही काफी कुछ कहा और लिखा जा सकता है। 

नियमित एक्सरसाइज: नियमित व्यायाम या एक्सरसाइज़ तो हर हाल में लाइफ स्टाईल में होनी ही चाहिए। इनसे बॉडी के साथ दिमाग और मन ोकभी शक्ति मिलती है। साथ में प्राणायाम शामिल हो सके तो और भी अच्छा। इसके फायदों की तो कोई सीमा ही नहीं। 

वजन उठाना या वेट लिफ्टिंग (Strength Training) मांसपेशियों के विकास के लिए बहुत ही आवश्यक है। इसमें कंपाउंड एक्सरसाइज जैसे स्क्वाट्स, डेडलिफ्ट्स, बेंच प्रेस, और रोविंग शामिल हैं।

इस सब के साथ साथ कार्डियोवस्कुलर एक्सरसाइज भी करें ताकि आपका हृदय स्वस्थ रहे और आपकी सहन शक्ति लगातार बढ़ती रहे। 

आराम और रिकवरी भी काम महत्वपूर्ण नहीं हैं। यह बहुत ही ज़रूरी है कि उचित नींद लें। मांसपेशियों की रिकवरी और विकास के लिए नींद बहुत महत्वपूर्ण है। वर्कआउट के बाद उचित आराम दें ताकि आपकी मांसपेशियाँ ठीक से ठीक हो सकें और बढ़ सकें। कुछ लोग जो निरंतर सख्त मेहनत करते हैं उनमें वे लोग  रहते  हर डेड  के बा कुछ पलों का  हैं या अपनी सीट  छोटी सी झपकी ले लेते हैं। 

हाइड्रेशन की तरफ ध्यान देना बहुत आवश्यक है। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। पानी आपके शरीर की सभी प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक है, खासकर जब आप भारी वर्कआउट करते हैं। इस तरह विशेष ध्यान लगातार ज़रूरी। है 

समयबद्धता और अनुशासन  तन और मन दोनों को ही संगीत माय बनाए रकने में सहायक रहते हैं।नियमितता और अनुशासन बिना भूले लगातार बनाए रखें। प्रगति धीरे-धीरे होती है, इसलिए धैर्य और मेहनत से काम करें। अनुशासन के फायदे भी अनगिनत हैं। 

आखिर में एक बार फिर स्पष्ट कर दें कि बॉडी बिल्डिंग में सप्लीमेंट्स की आवश्यकता इतनी भी नहीं होती जितनी अब समझी जाने लगी है। लेकिन वे कुछ लोगों के लिए सुविधाजनक हो सकते हैं। अगर आप सही तरीके से पोषण लेते हैं और नियमित रूप से व्यायाम करते हैं, तो बिना सप्लीमेंटस के भी आप अच्छी बॉडी बना सकते हैं।

बुधवार, 22 मई 2024

भाजपा की चुनावी स्टार प्रचारक प्रीति सप्रू को याद है लहूलुहान दिनों का दर्द

Wednesday 22nd May 2024 at 17:07

वरिंदर की हत्या को कभी नहीं भूल पाई प्रीति सप्रू


लुधियाना
: 22 मई 2024: (मीडिया लिंक टीम//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी डेस्क)::

इस बार के लोकसभा चुनावों में कुछ बातें उभर का सामने आई हैं। केवल कुर्सी की ललक रखने वाले एक भीड़ की तरह सामने आए हैं। इसके साथ ही आई ए एस और आई पी एस अधिकारी भी खुल कर सामने आए हैं। इन के साथ ही प्रीति सप्रू जैसी संवेदनशील और बेहद अनुभवी फ़िल्मी शख्सियतें भी सामने आई हैं।  इसके साथ ही आम लोगों के लिए किए गए काम भी चर्चा का विषय बने हैं। आज भाजपा समर्थक बैठकों में इस बात की चर्चा रही कि पिछले दस वर्षों के दौरान केन्द्र सरकार की योजनाओं को शत-प्रतिशत संतृप्ति के करीब लाने में सफल रही है केंद्र सरकार। इसके सच की चर्चा भी हम करते रहेंगे लेकिन फ़िलहाल सबसे पहले बात करते हैं प्रीति सप्रू के पंजाब आने की। 

प्रीति सप्रू वह शख्सियत है जिसने फिल्म निर्माण, फिल्म निर्देशन और अदाकरी को बेहद नज़दीक से देख और समझा है।   वह बहुत से अवार्डों और सम्मानों से भी सम्मानित हो चुकी हैं। पंजाब के लिए कुछ करने की तमन्ना भी उनके मन में शिद्द्त है तांकि पंजाब के दर्द की दवा हो सके। इसकी वजह है कि उन्होंने पंजाब के इस दर्द को बहुत शिद्दत से महसूस किया है। अपने वरिष्ठ नायक, निर्देशक और निर्माता की जघन्य हत्या उनके लिए बहुत बड़ा सदमा रही। पंजाब के लहूलुहान इतिहास में छह दिसंबर 1988 का दिन आज भी बहुत से लोगों को याद होगा जब पंजाब की फिल्म इंडस्ट्री में जान फूंकने वाले जानेमाने फिल्म मेकर विरेंद्र की फिल्म शूटिंग के दौरान ही गांव  तलवंडी सलेम में हत्या कर दी गई थी। स्वर्गीय विरेंद्र की फिल्म मेकिंग टीम में बहुत सी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाने वाली प्रीति सप्रू के मन में अब भी वह दर्द ताज़ा है। वह पंजाब के दर्द की दवा भी करना चाहती हैं। 

आज उन्होंने कहा कि प्रत्येक कल्याणकारी योजना आम आदमी को ध्यान में रखकर बनाई गई है और इस मकसद के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं रूचि लेते रहे। भारतीय जनता पार्टी लुधियाना द्वारा प्रेस वार्ता का आयोजन वेलकम पैलेस में किया गया।जिसमे भाजपा नेत्री प्रीति सप्रू,भाजपा जिला प्रधान रजनीश धीमान,प्रदेश सचिव रेनू थापर व महिला मोर्चा की प्रधान शीनू चुग उपस्थित थे । भाजपा नेत्री प्रीति सप्रू ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नागरिकों को सरकारी कल्याणकारी लाभों की पहुँच हर घर तक सुनिश्चित की है।

एक समय था जब गरीब नागरिक को छोटे-छोटे लाभों के लिए भी उनके दफ्तरों के  बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे और उनको हताशा में अपना अधिकार छोड़ना पड़ता था। परंतु अब,प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने सब कुछ बदल दिया है। देश के नागरिकों को सरकारी योजना का केंद्र बिंदु बना दिया है और प्रत्येक कल्याणकारी योजना आम आदमी को ध्यान में रखकर बनाई गई है, यह प्रधानमंत्री के दूरदर्शी और कल्पनाशील नेतृत्व के कारण संभव हुआ है।भारत में एक नई कार्य संस्कृति शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को हमेशा श्रेय दिया जाएगा, जिसमें प्रत्येक गरीब समर्थक और लोक कल्याण योजनाओं को इस तरह से डिजाइन किया गया, ताकि वह जाति, पंथ, धर्म या वोट की परवाह किए बिना अंतिम पंक्ति में सबसे जरूरतमंद या अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।प्रीति स्प्रू  ने कहा को पिछले दस वर्षों की छोटी सी अवधि के दौरान केन्द्र कई योजनाओं को शत-प्रतिशत संतृप्ति के करीब लाने में सफल रहा है और 'सबका साथ,सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास' के सिद्धांत का पालन करते हुए पात्र लोगों को लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत संकल्प यात्रा एक नई अवधारणा थी, जिसका उद्देश्य उज्ज्वला योजना, स्वनिधि, पीएम आवास योजना आदि जैसी सभी सरकारी योजनाओं को संतृप्त करना था।

उन्होंने बताया कि लुधियाना के 45116 किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत हर साल 6000 रुपये मिल रहे हैं। इतना ही नहीं लुधियाना में 4981 सॉयल हेल्थ कार्ड बने हैं । इतना ही नहीं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के लुधियाना हल्के में 734338 कार्ड धारकों को मुफ्त राशन और आयुष्मान भारत योजना के तहत 402024 लोगों को मुफ्त ईलाज मिल रहा है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत लुधियाना के 26,803 युवाओं को प्रशिक्षित किया गया,प्रीति सप्रू ने सभी मतदाताओं से अपील की कि वह आप,कांग्रेस और अकाली दल के झांसे में न आएं और विकसित देश और विकसित पंजाब को ध्यान में रखते हुए भाजपा के पक्ष में वोट दें। 

आज की इस प्रेस वार्ता में भाजपा जिला उपाध्यक्ष यशपाल जनोत्रा,पंकज जैन,प्रेस सचिव डा.सतीश कुमार, कारण गोसाई,अरुण कुमार आदि मौजूद थे।

रविवार, 11 फ़रवरी 2024

सर्दियों की सर्द रात को लुधियाना में रही गीत संगीत की गर्माहट

Sunday 11th February 2024 at 3:16 PM

5000 से अधिक संगीत प्रेमी और प्रशंसक पहुंचे हीरो होम लुधियाना में 


लुधियाना
: 11 फरवरी 2024: (शीबा सिंह//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)::

सर्दियों की सर्द रात को रोशन करते हुए लुधियाना में बी प्राक और हीरो रियल्टी ने सिधवां कैनाल रोड पर हीरो होम्स लुधियाना में एक भव्य संगीत कार्यक्रम का आयोजन कर लुधियाना में गर्माहट ला दी। प्रसिद्ध गायक बी प्राक ने हीरो रियल्टी के दूसरे चरण के लॉन्च से पहले देश भर से 5000 से अधिक संगीत प्रेमियों और प्रशंसकों की मेज़बानी की। कुल मिला कर यह सारा आयोजन बहुत ही यादगारी रहा।

शनिवार, 30 दिसंबर 2023

बिछ्ड़ी आत्मा ही निरंतर प्रेरणा बनी हुई है फिल्म मेकर परिवार की

शार्ट फिल्म ''पिंक लिटिल सांता'' ने हिमाचल फिल्म फेस्टिवल में भी बिखेरा अपना रंग

जीवन संगिनी के नाम पर ही रखा प्रोडक्शन हाउस का नाम

पत्नी के साथ बिताये 26 वर्षों के साथ को आज भी बरक़रार रखे हुए एस. पी. सिंह  

चंडीगढ़: 30 दिसंबर, 2023: (कार्तिका कल्याणी सिंह/पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)::

हम चीज़ों को, दुनिया को और लोगों को अपनीं आँखों और अपनी समझ के अनुसार देखते हैं। जैसे हम अंदर से होंगे, वैसे ही हमें दुनिया नज़र आएगी।  जैसे अध्यात्म में वो कथन है-जो ब्रहमंडे, सोई पिंडे; जो खोजै, सो पावै ॥ अर्थात वो सब कुछ जो इस ब्रह्माण्ड में है वो हमारे अंदर भी है। जिन चीज़ों को हम बाहर  ढूंढ रहे हैं, वो असल में हमारे भीतर ही मौजूद हैं।  जिस खुशी और आनंद को हम दूसरों में खोजते हैं, वो हमारे अंदर ही समाया हुआ है। ये सारे सुख, खुशियां, आनंद,  सारे ही ब्रह्माण्ड, अनगिनत सूरज, तारे, धरतियां सब हमारे अंदर ही है। बस ज़रुरत है तो खुद को खोजने की। खुद को जानने की। खुद को समझने की।  इसे जानने और समझने की प्रक्रिया साधना बन जाती है। वही कोशिश ध्यान बन जाती है। तब उस गीत का मर्म भी समझ में आने लगता है जो वर्ष 1963 में आई फिल्म ताजमहल में था। गीत का मुखड़ा था-जब वायदा किया वो निभाना पड़ेगा..!

इसका संगीत तैयार किया था जानेमाने संगीतकार रोशन साहिब ने और गीत लिखा था ख्यालों की दुनिया तक जादुई उड़ान भरने में माहिर समझे जाने वाले शायर जनाब साहिर लुधियानवी साहिब ने। 
उस पर आवाज़ का जादू था जनाब मोहम्मद  साम्राज्ञी लता मंगेशकर  साहिबा का। 
गीत की शुरुआत में ही इश्क का दावा था। एक पुकार भी थी। वह पुकार जिसमें एक आदेश जैसा भाव भी। था 

जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा
रोके ज़माना चाहे, रोके खुदाई, तुमको आना पड़ेगा
इसके बाद इस पुकार में तड़प और मिन्नत भी है जब गीत के बोल सुनाई देते हैं:
तरसती निगाहों ने आवाज दी है
मोहब्बत की राहों ने आवाज दी है
जान-ए-हया, जान-ए-अदा छोड़ो तरसाना
तुमको आना पडेगा...
इसके बाद हुसन और मोहब्बत  वायदा भी सुनवाया जाता है:
हम अपनी वफ़ा पे ना इलज़ाम लेंगे
तुम्हें दिल दिया है, तुम्हें जां भी देंगे
जब इश्क का सौदा किया, फिर क्या घबराना
हमको आना पड़ेगा
जो वादा किया वो...
इससे आगे वाले अन्तरे में भी इसी वायदे को दृढ़ शब्दों में दोहराया गया है, ज़रा देखिए कुछ बोल:
चमकते हैं जब तक ये चाँद और तारे
ना टूटेंगे अब ऐह दो पैमां हमारे
एक दूसरा जब दे सदा, हो के दीवाना
हमको आना पड़ेगा
जो वादा किया वो...

लेकिन मौत तो हर बंधन तोड़ देती है। ज़िंदगी में कही सुनी बातें मौत के अंधेरों में अक्सर गुम हो जाती हैं। कौन लौट कर आता है उस  जहां  से? शायद कोई नहीं लौटता। अध्यात्म की दुनिया में ऐसी यकीन भरी सच्ची बातें ज़रुर मिलती हैं लेकिन वे भी बहुत कम।  जो साथी जीवित भी रह जाता है दुनिया केवल उनकी तड़प ही देख पाती है। यह एक ऐसी कड़वी हकीकत होती है जिसे जीवित बचा साथी हर पल तड़पने के बावजूद उसे स्वीकार नहीं कर पाता। शायद यही होती है मुहब्बत के करिश्मे को दर्शाने  वाली जादू भरी शक्ति। चिता की अग्नि में सब कुछ अपने सामने राख हो  चुका देखने के बाद भी एक उम्मीद कायम रहती है।  अस्थि-कलश को बहते पानी में बहा देने के बावजूद भी एक  यकीन सा बना रहता है। प्रकृति के नियम को चुनौती की  ही देती है। यमराज से टकराने की हिम्मत भी इसी से आती है। दरअसल कुछ बहुत ही कम विवाह ऐसे होते हैं जिन में रेडियो की तरह सच्चे प्रेमी की फ़्रीकुएंसी जुड़ जाती है। तब कहीं जा कर ऐसे प्रेमी और प्रेमिका सच्चे पति पत्नी बन पाते हैं। वर्ण तो दुनिया नफे नुकसान और औपचारिकताओं में उलझ कर ही समाप्त हो जाती है।  शायद  यही होता है मानव जीवन का मिलना भी और व्यर्थ भी चले जाना। फ़्रीकुएंसी मिले बिना बने संबंध सचमुच जीवन को व्यर्थ जैसा कर देते हैं। जब फ्रीकवेंसी मिल जाती है, तो अलौकिक शक्तियां भी सहायक बन जाती हैं। इसका अहसास ऊपर दिए गीत के दूसरे भाग में है। 

हम आते रहे हैं, हम आते रहेंगे
मुहब्बत की रस्में निभाते रहेंगे
जान-ए-वफ़ा तुम दो सदा होके दीवाना
हमको आना पड़ेगा
जो वादा किया वो...

हमारी कहानी तुम्हारा फ़साना
हमेशा हमेशा कहेगा ज़माना
कैसी बला, कैसी सज़ा, हमको है आना
हमको आना पड़ेगा
जो वादा किया वो...

यह एक गहरी मेडिटेशन की अनुभूति है जिसे कहना, सुनना और समझना-समझाना शायद नामुमकिन जैसी कठिन बात हो सकती है। यह अनुभूति भी किस्मत से ही हो पाती है।  बस इसी ध्यान रुपी गंगा में डुबकी लगाने की एक विधि है, अपने काम में ही खो जाना। इस डुबकी के आनंद  और इसकी उपलब्धि को एक बार फिर कर दिखाया है फिल्म मेकर सम्राट सिंह।  मां ला बिछड़ना सम्राट सिंह के लिए असहनीय था। उसके प्रेरणा स्रोत पिता बब्बू सिंह के लिए भी नामुमकिन था जिन्हें हम स्नेह और सम्मान से एस पी सिंह  जानते हैं। 

इस हद तक मगन हो जाना कि न दुनिया की सुध रहे और न खुद की सेहत की। ऐसा ध्यान अपने काम में पूर्ण एकाग्रता के साथ ही आता है। जब आप में  और आप जो कर रहे हैं, दोनों भेद न रहे।  दोनों एक दूसरे में इतना संयोजित हो जाये कि कोई दोनों में भेद ढूंढ न पाए। चाहे आप को देखे या आप के काम को, दोनों ही अभिन्न लगें। जैसे नृत्य को नृत्यकार से अलग नहीं किया सकता। जैसे किसी कलाकार को उसकी कला से अलग नहीं सकता।  ऐसी साधना, ऐसा ध्यान ही साधने योग्य है।  

ऐसा ही ध्यान, कला जगत और रचनात्मकता से जुड़ा तकरीबन हर इंसान करता है। इसी कला जगत में फिल्में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाती है। तमाम तरह के बैनर्स और बहुत बड़े बजट में बनने वाले फिल्मो से इतर शार्ट मूवीज का ट्रेंड आज कल बढ़ता है। कम बजट, दुगनी क्रिएटिविटी के साथ बनने वाली इन फिल्मों में समाज के कई मुद्दों से लेकर, अनदेखी कर दी जाने चीज़ें और ऑफ बीट टॉपिक्स को पहल दी जाती है।  कोरोना के दौरान  इन फिल्मों का दायरा काफी फ़ैल गया है।  ये फिल्में और डॉक्यूमेंटरीज, OTT प्लेटफॉर्म्स की ताकत बन गयी है।  इन्ही शार्ट फिल्मों में फिल्म निर्मातों और निर्देशकों को प्रोत्साहित करने के तमाम राज्य की सरकारों और प्राइवेट आर्गेनाईजेशन द्वारा फिल्म फेस्टिवल्स आयोजित करवाए जाते हैं।  जिन में से अलग अलग कैटेगरी और सिलेक्शन प्रोसेस के बाद उस साल की बेस्ट शार्ट फिल्म्स का चयन किया जाता है। जिस से इन फिल्ममकेर्स और एक्टर्स को अपने काम और अपनी कला को जारी रखने की प्रेरणा मिलने के साथ साथ उनका उत्साहवर्धन भी होता है।  

अभी हाल ही में हिमाचल शार्ट फिल्म फेस्टिवल 2023 दिसंबर महीने में हुआ। ये फेस्टिवल मनाली के अटल बिहारी वाजपेयी मॉउंटरिंग थिएटर में आयोजित किया गया था। इस फेस्टिवल में देश भर के तमाम शार्ट फिल्म मेकर्स ने अप्लाई किया और एक काढ़े सिलेक्शन प्रोसेस के बाद कुछ चुनिंदा फिल्मों को बेस्ट अवार्ड्स की केटेगरी में जगह दी गयी है।  इन में एक बेस्ट चिल्ड्रनस फिल्म अवार्ड हाल ही में बनी शार्ट फिल्म ''पिंक लिटिल सांता'' को भी दिया गया।  ये फिल्म पिछले साल यानी 2022 क्रिसमस वाले दिन यूट्यूब के परदे पर पाई।  इस फिल्म के निर्माता व् निर्देशक सम्राट सिंह द्वारा निर्मित व् निर्देशित 6 मिनट 39 सेकंड की ये फिल्म एक उम्मीद की किरण है। ये फिल्म इस बात पर जोर देती है, कि खुशी बांटने से ही बढ़ती है।  दूसरों के चेहरों की मुस्कान, हमारा पूरा दिन, क्या पूरी ज़िन्दगी भी बना सकती है। एक छोटी सी बच्चा का किरदार आपको पूरी फिल्म देखने के लिए विवश कर देगा।  एक चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर ऐसी एक्टिंग आपको अपने अंदर के बच्चे से प्यार करना सीखा देगी। 


मोटी मोटी जानकारी के तौर पर आपको बता दें कि ये फिल्म लकी 26 प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी है। इस प्रोडक्शन हाउस के नाम के पीछे भी एक बैकग्राउंड स्टोरी है। इस प्रोडक्शन हाउस के फाउंडर एस.पी. सिंह (अभिनेता व् निर्देशक) ये नाम अपनी पत्नी लकी (स्व: जसपाल कौर) के नाम पर रखा है। उनकी याद में रखा है। वो ही उनकी पहली मोहब्बत थी, प्रेमिका थी, वही पत्नी बनी, जीवन संगिनी बनी और जब वह पत्नी भी न रह सकी, तो एक याद बन कर रह गई।  इसी याद को संजो कर उन्होंने इस प्रोडक्शन हाउस को खड़ा किया है। दूसरों के लिए ये एक प्रोडक्शन हाउस हो सकता है, लेकिन उनके लिए ये उनका प्रेम है। 

यह फ़िल्में तो केवल उस जुड़ाव से मिल रही प्रेरणा का ही परिणाम हैं जो मौत के बाद भी लगातार बना हुआ है। इन संबंधों में बिछड़ने का दर्द भी दिखाई देता है और अलौकिक मिलन के आनंद की अनुभूति भी। बहुत सी बातें और भी हैं जिन्हें फर्क कभी किसी अलग पोस्ट में आपके सामने रखा जाएगा। 

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मंगलवार, 14 मार्च 2023

52 वें अखिल भारतीय भास्कर राव नृत्य एवं संगीत सम्मलेन की तैयारियां पूर्ण

Tuesday 14th March 2023 at 3:54 PM

52 वें वार्षिक आयोजन का शानदार आगाज 17  मार्च से  टैगोर में   


चंडीगढ़: 14 मार्च 2023: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)::

कलम, कला और संगीत से जुड़े लोगों का संगम प्राचीन कला केंद्र नियमित तौर पर आयोजित करता आ रहा है। बिना किसी शोरशराबे के लगातार करता आ रहा है। इस आयोजन में पहुंचने वाले अधिकतर लोग अपने अपने क्षेत्र में पूरी तरह से समर्पित भी होते हैं। जब समाज और मीडिया सनसनी और मुनाफागिरि पर ही आधारित हो गया हो तब इस तरह के आयोजनों की अहमियत और भी बढ़ जाती है। इसी मकसद की औपचारिक घोषणा को लेकर आज सेक्टर 27  के प्रेस क्लब में एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन प्राचीन कला केंद्र द्वारा किया गया।  इस प्रेस मीट का आयोजन केंद्र के आगामी वार्षिक महोत्सव  52 वें अखिल भारतीय भास्कर राव नृत्य एवं संगीत सम्मलेन का शानदार आगाज  से सम्बंधित था  जोकि  17  मार्च से   टैगोर थिएटर में शुरू  होने जा रहा है।  तीन दिवसीय इस सम्मलेन में देश भर से जाने माने कलाकार अपनी प्रस्तुतिया पेश करेंगे।  इस अवसर पर सम्मलेन और प्राचीन कला केंद्र  की भावी योजनाओं के बारे में भी चर्चा की गई।  इस प्रेस कांफ्रेंस को केंद्र की रजिस्ट्रार एवं वरिष्ठ कत्थक गुरु  शोभा कौसर, सचिव सजल कौसर एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री एस डी शर्मा ने संबोधित किया। गौरतलब है कि श्री शर्मा इस संस्थान से करीब चार दशकों से जुड़े हुए हैं। 

प्राचीन कला केन्द्र की पिछले 51वर्षो से निरंतर चली आ रही संगीत एवं नृत्य से परिपूर्ण सम्मेलन  को आयोजित करने की परम्परा इस वर्ष 52 वें वर्ष में प्रवेश कर गई । इस संगीतिक जमावड़े   में  देश के लगभग सभी कलाकारों ने अपनी मंच प्रस्तुतियों से इस सम्मेलन की शोभा बढ़ाई है। प्राचीन कला केन्द्र द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में इस वर्ष भी सधे हुए कलाकारों का जमावड़ा है और हरेक कलाकार का अपना एक विशेष महत्व है।  इस बार चंडीगढ़ के कला प्रेमियों को अपनी कला के जादू जगाने प्रसाद खापरदे (गायन) , गीता महालिक (ओडिशी नृत्य ), उस्ताद शाहिद परवेज़ खान (सितार), रुक्मिणी विजयकुमार (भरतनाट्यम), पंडित सतीश व्यास (संतूर ) , श्री चेतन जोशी (बांसुरी), पंडिता अनुराधा पाल (तबला )  एवं कुमार शर्मा (कत्थक नृत्य ) जैसे प्रतिभावान एवं सधे हुए कलाकार अपनी चुनिंदा प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे।   

 इसके अलावा केन्द्र की पुरानी परंपरा के अनुसार केन्द्र कला जगत की दो महान हस्तियों को भी सम्मानित करने जा रहा है । इनमें पंजाब क्षेत्र के जाने माने सितार वादक एवं गुरु श्री सुरिंदर कुमार दत्ता को पीकेके लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड एवं शायदा जोकि दैनिक भास्कर की डिप्टी एडिटर भी हैं , को पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने विशिष्ट योगदान के लिए पीकेके अवार्ड ऑफ़ एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवार्ड से सम्मानित किया जायेगा।  

इसके पश्चात सम्मेलन के पहले दिन नासिक से आये जाने माने शास्त्रीय गायक श्री प्रसाद खापरदे  और  ओडिशी नृत्यांगना श्रीमती गीता महालिक अपने समूह के साथ खूबसूरत नृत्य प्रस्तुतियां पेश करेंगे।  

सोमवार, 2 जनवरी 2023

राज्यपाल ने लोकायुक्त का वार्षिक केलेण्डर-2023 जारी किया

 2nd January 2023 at  6:22 PM

इस बार का कैलेंडर भी यादगारी रहा 


शिमला
: 02 जनवरी, 2023: (पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)::

ज़मीन पर खिंची गई रेखाएं नए नक्शे बनाने में में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं लेकिन दिल में जो एकता होती है वह इन रेखयों के खींचने से भी नहीं मिटती। प्रेम, सौहार्द और सदभाव का रंग हमेशा गहरा रहता है। इसका अहसास उस समय भी हुआ जब हिमाचल का नया राजकीय कैलंडर जारी किया गया। 
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने आज राजभवन में लोकायुक्त हिमाचल प्रदेश का वार्षिक केलेण्डर-2023 जारी किया। कैलेंडर इस बार भी आकर्षक बन पड़ा। इसे रिलीज़ करते समय इस बार भी पारम्परिक उतुस्कता और उत्साह महसूस किए गए। इस अवसर पर लोकायुक्त चंद्र भूषण बरोवालिया भी उपस्थित थे।
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शनिवार, 3 दिसंबर 2022

गुलामी की मानसिकता से मुक्त होना भी बेहद ज़रूरी

Posted On: 03rd December 2022 at 3:40 PM
मन के गहरे कोने में भी गुलामी का कोई अंश तक न हो-मोदी  

ज़रा समझिए कि नया भारत:औपनिवेशिक अतीत के प्रतीकों को क्यूं हटा रहा है

नई दिल्ली: 3 दिसंबर 2022: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)::देश की जनता का एक बहुत बड़ा हिस्सा अक्सर देश के बहुत से स्थानों और इमारतों के नाम उनके नाम पर देखता रहा है जिनके बार में उनके मन की छवि नायक की नहीं खलनायक की रही है। उसके मन में सवाल उठते रहे कि इनका इतना महिमामंडन क्यूं? स्वतंत्रता के बाद भी उन्हींका गुणगान क्यूं जिन्होंने देश को लम्बे समय तक गुलाम बनाए रखा। क्या ये सब वोटबैंक की सियासत का परिणाम है?
15 अगस्त, 2022 को भारत के 76वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आने वाले 25 वर्षों (अमृत काल) के लिए 'पंच प्राण'के बारे में बात की थी। ‘दूसरे प्राण’ के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, "हमारे अस्तित्व के किसी भी हिस्से में, यहां तक ​​कि हमारे मन या आदतों के किसी गहरे कोनें में भी गुलामी का कोई अंश नहीं होना चाहिए। हमें इसे वहीं समाप्त कर देना चाहिए। हमें अपने आप को गुलामी की उस मानसिकता से मुक्त करना होगा जो हमारे भीतर और हमारे आस-पास मौजूद असंख्य चीजों में दिखाई देती है। यही हमारी दूसरी प्राण शक्ति है।

आधुनिक भारत का इतिहास दो शताब्दियों के ब्रिटिश उपनिवेशवाद के साथ गहराई से जुड़ा है, और स्वतंत्रता प्राप्ति के दशकों बाद भी, हमारे देश ने विभिन्न रूपों में, कुछ विशिष्ट और कुछ सूक्ष्म रूप में अपने औपनिवेशिक बोझ को ढोने का क्रम जारी रखा है। पिछले कुछ वर्षों से, सरकार धीरे-धीरे भारत को ब्रिटिश शासन के इन प्रतीकों से दूर कर रही है, और एक नए भारत की पहचान को मजबूती से स्थापित करने के लिए उसने अनेक क्षेत्रों में कई कदम उठाए हैं और वास्तव में देश को उसकेऔपनिवेशिक अतीत से मुक्त कराया है।

इस नए अभियान के अंतर्गत राजपथ का नाम बदल कर कर्तव्य पथ रखा गया

 अमृत ​​काल में 'औपनिवेशिक मानसिकता के किसी भी निशान को हटाने' के अपने संकल्प के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 08 सितंबर, 2022 को नई दिल्ली में 'कर्तव्य पथ'का उद्घाटन किया। नामकरण में यह परिवर्तन पूर्ववर्ती राजपथ से परिवर्तन करने का प्रतीक है।कर्तव्य पथ के लिए शक्ति का एक प्रतीक होना सार्वजनिक स्वामित्व और सशक्तिकरण का उदाहरण है।

 इंडिया गेट पर स्थापित नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा अब नए भारत की बात करती महसूस होती है। 

इसी तरह इंडिया गेट के पास लगी किंग जॉर्ज पंचम की प्रतिमा को हटाकर उस स्थान पर राष्ट्रीय नायक और प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की एक विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है। “यहां गुलामी के समय, ब्रिटिश राज के प्रतिनिधि की एक मूर्ति थी। आज उसी स्थान पर नेताजी की प्रतिमा स्थापित कर देश ने एक आधुनिक, मजबूत भारत को जीवंत किया है। नेताजी की ग्रेनाइट की मूर्ति उसी स्थान पर स्थापित की गई है, जहां इस साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने पराक्रम दिवस (23 जनवरी) को नेताजी की एक होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया था।

 नई नौसेना पताका औपनिवेशिक अतीत के प्रस्थान का प्रतीक है

औपनिवेशिक अतीत से दूर जाने के लिए किये जा रहे राष्ट्रीय प्रयास के गुंजायमान, एक नए नौसैनिक ध्वज में परिवर्तनकी आवश्यकता अनुभव की गई जिसने हमारी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा ली है। पिछली पताका में सेंट जॉर्ज का क्रॉस लगा था, जो स्वतंत्रता से पहले ध्वज का उत्तराधिकारी था, जिसमें शीर्ष बाएं कोने पर यूनाइटेड किंगडम के यूनियन जैक के साथ एक सफेद पृष्ठभूमि पर रेड क्रॉस बना था। नई पताका में दो मुख्य घटक शामिल हैं - ऊपरी बाएं कैंटन में राष्ट्रीय ध्वज, और फ्लाई साइड के केंद्र में एक नेवी ब्लू - गोल्ड अष्टकोना (डंडे से दूर) है। प्रधानमंत्री ने यह पताका छत्रपति शिवाजी महाराज को समर्पित की है, जिसने समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक मजबूत नौसेना का निर्माण किया था, जो भारत की स्वदेशी शक्ति का प्रतीक है।

 "बीटिंग द रिट्रीट" समारोह में भारतीय जोश के साथ धुन

 2022 के गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान, 'आजादी का अमृत महोत्सव' मनाने के लिए 'बीटिंग द रिट्रीट' समारोह में कई नई धुनें जोड़ी गईं हैं।इन धुनों में'केरल', 'हिंद की सेना ' और 'ऐ मेरे वतन के लोगों ' शामिल हैं। 'सारे जहां से अच्छा ' की धुन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ था। सितार, संतूर और तबला जैसे भारतीय वाद्ययंत्रों को भी संगीत कलाकारों की टुकड़ी से जोड़ा गया है। इस प्रकार रिट्रीट में भारतीय सुगंध और देशभक्ति का जोश भर दिया गया है, ताकि देश के नागरिकों के साथ अधिक से अधिक संपर्क स्थापित किया जा सके।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (एनडब्ल्यूएम) का निर्माण और अमर जवान ज्योति और एनडब्ल्यूएमकी ज्योतियों का विलय

प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेजों के लिए लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों की याद में अंग्रेजों द्वारा निर्माण किया गया,इंडिया गेट (जिसे पहले अखिल भारतीय युद्ध स्मारक के रूप में जाना जाता था) भारत के औपनिवेशिक अतीत का प्रतीक है। 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के ऊपर भारत की विजय के प्रतीक अमर जवान ज्योति को बाद में तदर्थ व्यवस्था के रूप में उपरोक्त स्थान से जोड़ा गया, क्योंकि देश में युद्ध में वीरगति को प्राप्त होने वाले भारतीय सैनिकों के लिए कोई अन्य स्मारक नहीं था। स्वतंत्र भारत के प्रतीक के रूप में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 25 फरवरी, 2019 को उद्घाटन किया गया था और इसे राष्ट्र को समर्पित किया गया था। इसमें 1971 से पहले और बाद में हुए सभी युद्धों में शहीदहुए सभी भारतीय सैनिकों के नाम हैं। इस प्रकार एनडब्ल्यूएमउन सभी सैनिकों का स्मारक हैजिन्होंने स्वतंत्र भारत की सेवा में या तो अपना जीवन लगा दिया है या भविष्य में यह कार्य करेंगे। इसके उद्घाटन के बाद, सभी श्रद्धांजलि और स्मरण समारोह केवल एनडब्ल्यूएममें आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें राष्ट्रीय दिवसके मौके भी शामिल हैं। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की उपस्थिति में, शाश्वत ज्योति का इस नए स्थल पर स्थानांतरण करना इसलिए उचित समझा गया क्योंकि यह सभी बहादुरशहीदों के सम्मान में ज्योति स्थापित करने के लिए एक उपयुक्त श्रद्धांजलि है।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नाम बदला

30 दिसंबर, 2018 को, नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा भारतीय धरती पर तिरंगा फहराने की 75वीं वर्षगांठ को चिह्नित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने घोषणा की थी कि रॉस द्वीप का नाम बदलकरनेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप कर दिया जाएगा, नील द्वीप को शहीदद्वीप के नाम से जाना जाएगा और हैवलॉक द्वीप का नाम बदलकर स्वराज द्वीप कर दिया जाएगा। स्वतंत्र भारत में भी इन द्वीपों का नाम ब्रिटिश शासकों के नाम पर रखा गया था। सरकार नेभारतीय नाम और भारतीय पहचान देकर गुलामी की इन निशानियों को मिटा दिया।

रेल बजट का वार्षिक केंद्रीय बजट में विलय कर दिया गया

ब्रिटिश युग की प्रथाओं से एक अन्यप्रथा को बदलते हुए, सरकार ने बजट वर्ष 2017-18 से रेल बजट का केंद्रीय बजट के साथ विलय कर दिया। एकवर्थ समिति (1920-21) की सिफारिशों के बाद 1924 में रेलवे वित्त को सामान्य वित्त से अलग कर दिया गया था।

ब्रिटिश शासन के दौरान प्रतिबंधित साहित्यिक कार्यों का पुनरुद्धार

स्वतंत्रता के आंदोलन के दौरानब्रिटिश सरकार द्वारा क्रांतिकारी साहित्यिक कृतियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, क्योंकि इन्हें भारत में उनके शासन की 'सुरक्षा' के लिए 'खतरनाक' माना जाता था। साहित्य के इस निकाय का उद्देश्य लोगों के मन में देशभक्ति की भावना जगाना और स्वतंत्र भारत के लिए खड़े होने का आह्वान करना था। आजादी के अमृत महोत्सव समारोह के हिस्से के रूप में, सरकार ने ऐसी कविताओं, लेखों और प्रकाशनों की पहचान की है जिन पर ब्रिटिश राज ने प्रतिबंध लगा दिया था और उन्हें भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार द्वारा प्रकाशित एक सूची के रूप में एक साथ रखा था।हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की भावनाओं, इच्छाओं और उनके संकल्पों का प्रतिनिधित्व करने वाले ये अनूठे संग्रह विभिन्न भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हैं।

औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाने के लिए की गई अन्य पहलें:

  • सरकार ने उन कुछ प्रमुख सड़कों के नाम बदल दिये हैं जिनके मूल नाम ब्रिटिश काल में प्रतिष्ठित थे।
  1. 2016 में लुटियन की दिल्ली में रेस कोर्स रोड काबड़ा नाम थाजिसे बदलकर लोक कल्याण मार्ग कर दिया गया है। प्रधानमंत्री का प्रसिद्ध आवासीय पता 7, रेस कोर्स रोड इस प्रकार 7, लोक कल्याण मार्ग कर दिया गया है।
  2. वर्ष 2017 में डलहौजी रोड का नाम बदलकर दारा शिकोह रोड कर दिया गया।
  • 2019 में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लंबे समय से चली आ रही औपनिवेशिक युग की प्रथा से अलग हटकर, केंद्रीय बजट पेश करते समय ब्रीफकेस के स्थान पर पारंपरिक भारतीय 'बही खाता'का विकल्प चुना। इतने दशकों तक ब्रिटिश संसद के समय का पालन करके भारतीय बजट को प्रस्तुत करने के समय और तिथि में भी परिवर्तन किया गया है।
  • मातृभाषा में शिक्षा पर जोर देने वाली राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से देश के युवाओं को विदेशी भाषा सीखने की बाध्यता से भी मुक्ति दिलाई जा रही है।
  • पिछले आठ वर्षों में, सरकार ने 1,500 से अधिक पुराने कानूनों को निरस्त कर दिया है, जिनमें से अधिकांश औपनिवेशिक ब्रिटिश काल के प्रतीक थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि इस आजादी के अमृत काल में हमें गुलामी के समय से चले आ रहे कानूनों को खत्म कर नए कानून बनाने चाहिए।
  • भारत ने एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर लिया है, और वह आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता से सराबोर भविष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश को अपने औपनिवेशिक अतीत की बेड़ियों से मुक्त करने से ही संविधान द्वारा परिकल्पित अपनी संप्रभु पहचान की नींव को और सुरक्षित किया जा सकेगा, एवं राष्ट्र को अधिक शक्ति के साथ आगे बढ़ाया जा सकेगा क्योंकि यह वैश्विक क्षेत्र में नए पाठ्यक्रम तैयार करता है।

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