गुरुवार, 30 अप्रैल 2020

Corona से जंग: नामधारी संगत ने किया SSP अमृतसर का सम्मान

पुलिस वाले जान की बाज़ी लगा कर कर रहे हैं कोरोना जंग में जनसेवा 
अमृतसर//लुधियाना: 30 अप्रैल 2020:(पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी ब्यूरो)::  
कोरोना वायरस का खौफ हर तरफ छाया हुआ है। कोरोना पीड़ितों की संख्या हर रोज़ बढ़ती जा रही है।कोरोना वायरस के इस इतने बड़े आतंक के बावजूद पुलिस के जवान निरंतर लोगों की सेवा में लगे हैं। गहन संकट की इस घड़ी में आम लोगों को बचाने के लिए सक्रिय हो कर काम करने वालों में पुलिस विभाग के जवान और उच्च अधिकारी भी शामिल हैं। अपनी जान का खतरा उठा कर दुसरे लोगों की जान बचने वाले लोग ज़िंदा शहीदों से काम भी नहीं होते। नामधारी संगत ने पुलिस विभाग के जवानों का सम्मान करने के लिए एक छोटा सा प्रयास किया। इस प्रयास के अंतर्गत एस एस पी सुखचैन सिंह गिल का सम्मान किआ गया। नामधारी संगत ने खतरा उठा कर लोगों के काम आ रहे पुलिस जवानों की प्रशंसा की। पुलिस के कुछ अन्य जवानों का भी सम्मान किया गया। इसके साथ ही इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट अध्यक्ष दिनेश बस्सी को भी सम्मानित किया गया। 
इस सम्मान के अंतर्गत स्वतंत्रता संग्राम का शुभारम्भ करने वाले सतिगुरु राम सिंह जी की तस्वीर श्री गिल, श्री बस्सी और अन्य लोगों को दी गयी। 
नामधारी संगत के सक्रिय नेता अध्यक्ष-गुरचरण सिंह, साहिब सिंह, लाल सिंह और अन्य लोगों ने बताया कि कोरोना के कहर का सामना इतनी बहादुरी से करने वाले पुलिस जवानों का मनोबल बनाए रखना पूरे समाज का नैतिक कर्तव्य बनता है। आम लोग घरों में रह कर सुरक्षित रहें इस लिए यह जवान खुद बाहर निकल कर डयूटी दे रहे हैं। इन नामधारी नेताओं ने बताया कि ऐसे जांबाज़ पुलिस अधिकारीयों का सम्मान सतिगुरु ठाकुर दलीप सिंह जी के आदेशों पर किया जा रहा है। 
नामधारी संगत ने याद दिलाया कि अदि पुलिस वाले न होते तो समाज का क्या हाल हो गया होता। पुलिस वालों ने ही लोगों को उनके घरों में रोक रखा  है। अदि ऐसा न हुआ तो इसका अनुमान लगाना भी मुश्किल है की कोरोना ने अब तक कितनी जानें ले ली होतीं।  
गौरतलब है कि गर्मियों में पुलिस के जवानों को शकंजवी, ठंडा जल, निम्बू पानी इत्यादि और सर्दियों में चाय अर्थात देसी चाय पर आधारित चाटा पिलाने का सिलसिला नामधारी संगत ने बहुत पहले से शुरू कर रखा है। इसकी शुरुआत नामधारी संगत ने ठाकुर दलीप सिंह के कहने पर ही कई बरस पहले शुरू की थी।यह सिलसिला देश के सभी राज्यों में लगातार जारी है। आज हुए सम्मान आयोजन के समय नामधारी निर्मल सिंह, नामधारी दर्शन सिंह, नामधारी सतपाल सिंह, नामधारी निरंजन सिंह, नामधारी बूटा सिंह, नामधारी सुरजीत सिंह और नामधारी गुरुचरण सिंह चन्न भी मौजूद रहे। 

रविवार, 26 अप्रैल 2020

भूख के साथ साथ साम्प्रदयिक धुंध को हटाने में भी सक्रिय हैं कुमुद सिंह

समस्या सिर्फ राशन की नहीं-अन्य दबावों की भी है   
सोशल मीडिया: 25 अप्रैल 2020: रात्रि 9:31  पर:
प्रतीकात्मक तस्वीर 
हैलो, वो-वो आप कुमुद मैम बोल रही हैं...... ?
जी, बोल रही हूं...आप कौन?
मैम मैं भोपाल की.....कॉलोनी में रहती हूँ.....मेरे पति बिजली का काम करते हैं.....दो बच्चे हैं मैम.... यहां सबंधित महिला की पहचान छुपाने के लिए कॉलोनी का नाम हमने जानबूझ कर छुपा लिया है---
बात इससे आगे तो बढ़ी लेकिन कहीं अटक सी गई---मांगना आसान कहाँ होता है! वह बोली--
ऐसा है मैम....
वैसा है मैम......
मैने कहा-आप कुछ कहना चाहती हैं तो बेझिझक कहिए "बहन"
बहन शब्द ने कुछ बहनापा पैदा किया शायद...
वो बोली- मैम घर मे खाने का सामान खत्म हो गया है......ज़्यादा तो कभी नहीं था लेकिन इतना कमा लेते हैं कि हम सब इज्जत से भरपेट खा लेते हैं..... लेकिन अभी सब बंद है तो काम भी नहीं मिल रहा और--
आप बताइए मै क्या करूं आपके लिए बहन---
मैम कुछ राशन मिल पाएगा क्या----- हमने कभी हाथ नहीं फैलाया मैम लेकिन क्या करें समझ में नहीं आ रहा था----किसी से आपका नम्बर मिला तो--
ठीक है, आप बताइये पूरा ऐड्रेस----हम शाम तक भिजवाते हैं कुछ....
शुक्रिया मैम लेकिन वो....
जी कहें!
मैम मेरा नाम सलमा (परिवर्तित नाम) है तो --
तो क्या,
 हम वहां पहुँच कर आपको आवाज़ देंगे कि सलमा बहन बाहर आइये, हम आ गए हैं तो आप दरवाज़ा खोल दीजिएगा
वो हंस दी...... उस हंसी से लगा वह आश्वस्त हो गई थी। जब कुछ लोग साम्प्रदायिक आग भड़काने में ही लगे हों तो किसी को इस नज़रिए से सुरक्षा का अहसास करा पाना बेहद मुश्किल होता है---
शुक्रिया मैम, नहीं आपा, हां आपा
ये कल दोपहर एक फोन पर हुई बातचीत है...... सामान वहां  पहुँच गया है..... कल से आज शाम तक पांचवीं  बार फोन आ चुका है---शुक्रिया आपा, आप बहुत प्यार से बोलती हैं..... बस यही कहना था.....
घबराओ मत बहन........ हालात कितने भी बिगड़ जाएं, हम सलमा और कुमुद आपस में जुड़े रहकर जीत ही लेंगे बाज़ी.......
सलमा बहन को कुमुद का राशन 

शनिवार, 25 अप्रैल 2020

घुटन से बचा सकता है मास्क पर इस हर्बल स्प्रे का छिड़काव

प्रविष्टि तिथि: 25 APR 2020 3:42PM by PIB Delhi
किसी इन्हैलर की तरह काम करता है यह हर्बल डीकन्जेस्टैंट स्प्रे 
नई दिल्ली: 25 अप्रैल 2020: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)::
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए मास्क के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस, डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को लंबे समय मास्क लगाना पड़ रहा है, जिससे उन्हें कई बार सांस लेने में घुटन महसूस होती है। भारतीय वैज्ञानिकों ने एक हर्बल डीकन्जेस्टैंट स्प्रे विकसित किया है, जो इस समस्या से निजात दिलाने में मददगार हो सकता है।
यह हर्बल डीकन्जेस्टैंट स्प्रेकिसीइन्हैलर की तरह काम करता है, जिसे नेशनल बोटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरआई) के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार किया गया है।लखनऊ स्थित एनबीआरआई काउंसिल ऑफ साइंटिफिक ऐंड इंडस्ट्रियल रिसर्च की एक प्रयोगशाला है, जिसे मुख्य रूप से वनस्पतियों पर किए जाने वाले उसके अनुसंधान कार्यों के लिए जाना जाता है। एनबीआरआई के इस हर्बल स्प्रे के शुरुआती नतीजे बेहद शानदार मिले हैं। देर तक मास्क पहनने वाले लोगों को इससे काफी राहत मिल रही है।
एनबीआरआई के मुख्य वैज्ञानिक डॉ शरद श्रीवास्तव ने इंडिया साइंस वायर को बताया कि “इस हर्बल डीकन्जेस्टैंट स्प्रे को औषधीय और सगंध पौधों से तैयार किया गया है और इसका उपयोग पूरी तरह से सुरक्षित है।जिन पादप तत्वों का उपयोग इस स्प्रे में किया गया है, उनके नाम का खुलासा बौद्धिक संपदा संबंधी कारणों से अभी नहीं किया जा सकता। इसेसिर्फ एक बार मास्क पर स्प्रे करना होता है। स्प्रे करने के बाद मास्क का उपयोग करने पर नासिका और श्वसन तंत्र खुल जाता है और फिर सांस लेने में परेशानी नहीं होती।”
इस स्प्रे को आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के आधार पर तैयार किया गया है। संस्थान की योजना इस इन्हैलर की तकनीक को व्यावसायिक उत्पादन के लिए हस्तांतरित करने की है, ताकि बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन किया जा सके और इसे जरूरतमंदों तक पहुँचाया जा सके।
For More Details : Dr. RK Sud, CSIR-IHBT, Palampur, Himachal Pradesh
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KGS/(DST/(इंडिया साइंस वायर))

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2020

पंजाब ने 1 मई तक कर्फ्यू बढ़ाया

संकट में से निकलने को नीतियां बनाने के लिए बनेगी विशेष टास्क फोर्स 
*कैबिनेट की तरफ से कोविड काल के बाद अर्थव्यवस्था के पुर्नोद्धार के लिए नक्शा बनाने के लिए उच्च ताकती कमेटी बनाने का फैसला
*अस्पतालों के बुनियादी ढांचे के तत्काल नवीनीकरन पर काम करने के लिए एक और टास्क फोर्स बनाई
चंडीगढ़: 10 अप्रैल 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)::
कोविड -19 के कम्युनिटी में फैलाव के खतर्र्रोंं के चलते पंजाब सरकार ने शुक्रवार को राज्य में पहली मई, 2020 तक कफ्र्यू बढ़ाने का फ़ैसला लिया।

यह फ़ैसला मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह की अध्यक्षता अधीन हुई मंत्रीमंडल की मीटिंग में लिया गया जिससे इस महामारी के कम्युनिटी फैलाव को रोका जा सके और गेहूँ की कटाई /खरीद के सीजन के चलते मंडियों में भीड़ होने से बचाव किया जा सके।

सरकारी प्रवक्ता के अनुसार कैप्टन अमरिन्दर सिंह इस फ़ैसले से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को शनिवार होने वाली मुख्यमंत्रियों की वीडियो काँफ्रंसिंग में भी अवगत करवाएंगे।

अगामी सप्ताहों में महामारी के फैलने के गंभीर अंदेशों का हवाला देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि कफ्र्यू बंदिशें बहुत ज़रूरी थी जिससे मैडीकल ढांचे पर उसकी क्षमता से अधिक बोझ न पड़ सके। उन्होंने कहा कि मैडीकल भाईचारे में यह एक आम विचार है कि लॉकडाऊन ही इस बीमारी के फैलाव को रोकने से बचाव कर सकता है। उन्होंने आशा अभिव्यक्त की कि इस बीमारी को रोकने वाली कोई दवा /इलाज मिल सके।

मुख्यमंत्री के प्रस्ताव पर मंत्रीमंडल ने फ़ैसला किया कि कफ्र्यू /लॉकडाऊन से धीरे धीरे बाहर लाने के लिए नीति बनाने के लिए बहु-मंतवी टास्क फोर्स बनाई जाये। टास्क फोर्स 10 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। टास्क फोर्स में 15 मैंबर होंगे जो व्यापार, कारोबार, उद्योग, कृषि, सिवल सोसायटी और स्वास्थ्य क्षेत्रों की नुमायंदगी करेंगे। मुख्यमंत्री को टास्क फोर्स की रचना संबंधी फ़ैसला लेने के लिए अधिकारित किया।

मंत्रीमंडल ने उच्च ताकती कमेटी की स्थापना करने का भी फ़ैसला किया जो राज्य को कोविड काल के बाद खतरे के घटने और आम जन जीवन बहाल होने पर पर राज्य की अर्थव्यवस्था के पुर्नोद्धार का नक्शा बनाने में सुझाव देगी। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि वह योजना आयोग के पूर्व डिप्टी चेयरमैन मोंटेक सिंह आहलूवालीया को इस कमेटी का प्रमुख बनने की विनती करेंगे।

मंत्रीमंडल ने यह भी प्रस्ताव पास किया कि केंद्र सरकार से अपील की जाये कि पंजाब में 500 करोड़ रुपए के अनुमानित निवेश के साथ वायरोलॉजी का एडवांस सैंटर स्थापित किया जाये और राज्य सरकार की तरफ से इस प्रोजैक्ट के लिए मुफ़्त में ज़मीन मुहैया करवाई जायेगी।

मौजूदा संकट से निपटने के लिए राज्य में स्वास्थ्य ढांचे के तत्काल नवीनीकरन के लिए मंत्रीमंडल ने लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव के नेतृत्व में एक और टास्क फोर्स स्थापित करने का फ़ैसला लिया। पर्यटन एवं सांस्कृतिक विभाग के प्रमुख सचिव और पंजाब हेल्थ सिस्टम कोर्पोरेशन के एम.डी. इस टास्क फोर्स के मैंबर होंगे। यह फोर्स स्वास्थ्य ढांचे के जल्द नवीनीकरन का काम समयबद्ध तरीके से करेगी। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को इस सम्बन्धी विस्तृत प्रस्ताव पेश करने के लिए कहा।

सोमवार, 30 मार्च 2020

खालिदा बेगम ने कायम की मिसाल

हज को रखे पांच लाख रू. दिए कोरोना निरोधक फंड में सेवा भारती को 
श्री नगर//सोशल मीडिया: 30 मार्च 2020: (पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)::
ये खालिदा बेगम हैं। उम्र है 87 साल।  हज पे जाने का सपना बहुत पुराना था। हज पर जाने के इस नेक मकसद के लिए 5 लाख रुपये की बचत भी कर रखी थी। बाकी सब इंतजाम भी पूरे कर लिए थे। इतने में ही कोरोना को महामारी सामने आई तो हज पर जाने का इरादा बदल लिया। हज के लिए जमा किया सारे का सारा पांच लाख रुपया तुरंत कोरोना की रोकथाम के लिए डोनेट कर दिया। 
सुरेंदर राजपूत ने ट्विटर पर इन तस्वीरों को शेयर करते हुए जब लिखा कि ख़ालिदा जी आपको और आपके जज़्बे को सलाम तो इस तस्वीर को आगे शेयर करने वालों की संख्या तेज़ी से बढ़ी। 
इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र में स्थित आरएसएस के मीडिया विंग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि वास्तव में खालिदा बेगम जम्मू-कश्मीर में सेवा भारती की ओर से लॉकडाउन के दौरान किए जा रहे जन-कल्याण के कामों से काफी प्रभावित हुई हैं। इस काम को देख कर ही उनके मन में इस एतिहासिक दान का ख्याल आया। इन सेवा कार्यों में और तेज़ी लाने के लिए पांच लाख रुपये इस संगठन को देने का फैसला लिया। इन सूत्रों के मुताबिक खालिदा चाहती हैं कि उनकी दान दी गई रकम सेवा भारती के माध्यम से जम्मू और कश्मीर के गरीबों और जरूरमंदों की मदद में इस्तेमाल की जाए। उल्लेखनीय है कि मोहल्ला दलपत्तियां की निवासी एवं उपराज्यपाल के सलाहकार फारूक खान की माता खालिदा बेगम की तरफ से यह रकम अखिल भारतीय सेवा भारती को दान करने का फैसला सोशल नीदिया पर भी बेहद लोकप्रिय हुआ है। रविवार को उन्होंने पांच लाख रुपये का चेक पदाधिकारियों को सौंपा। इस फैसले का सुस्वागतम करते हुए लोग लगातार इसकी प्रशंसा कर रहे हैं। गौरतलब है कि सेवा भर्ती लम्बे समय से सेवा कार्यों में जुटा हुआ है लेकिन कभी भी इसका ढिंढोरा नहीं पीटता।  

बुधवार, 18 मार्च 2020

कोरोना वायरस के चलते ESA ने उठाये विशेष कदम

17th March 2020 at 8:11 PM
तेज़ी और सतर्कता का खूबसूरत समन्वय नजर आया इस डियूटी में 
यूरोप: 17 मार्च 2020: (ई एस ए//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)::
कोरोना की चुनौती का सामना करने का वक्त आया तो ESA अर्थात यूरोपियन स्पेस एजंसी ने अपनी भूमिका बहुत ही सावधानी और ज़िम्मेदारी से निभाई। इस सम्बन्ध में ESA ने बहुत से महत्वपूर्ण कदम उठाये तांकि कोरोना के आतंक और कहर का सामना प्रभावशाली ढंग से किया जा सके। सतर्कता और तेज़ी का खूबसूरत समन्वय नजर आया ESA के इन कदमों में। बेहद नाज़ुक सी स्थिति में इतना संतुलन रख्पना आसान नहीं था लेकिन इस संस्था ने एक बार फिर कमाल कर दिखाया। भविष्य में लिखे जाने वाले इतिहास में इन कार्यों और कदमों को निश्चय ही सुनहरी अक्षरों में लिखा जायेगा। 
हमारे मेज़बान देशों में कोरोनावायरस की  गंभीर होती स्थिति और नए निर्देशों के साथ यूरोपियन स्पेस एजंसी  ने अपने देख-रेख के कर्तव्य और सामाजिक ज़िम्मेदारी के क्रिटिकल कार्यों को और ज़्यादा मज़बूत करते हुए अपनी कार्यविधि के सुचारु संचालन को सुनिश्चित किया है। इससे समाजिक ज़िम्मेदारी की भावना को भी और बल मिला है। 
गौरतलब है कि पहले पहल जब कोरोना का नाम सामने आया तो सभी को प्रशासनिक सलाह दी गयी कि घरों में रह कर काम करो। लगा था सब कुछ जल्दी ही ठीक हो जायेगा। लेकिन मामला गड़बड़ाता नज़र आया। पाबंदियां बढ़ा दी गयीं। फ्रासं/स्पेन और नीदरलैंड में स्कूल, कालेज, दुकानें इत्यादि सब बंद करने के आदेश सामने आये। ESA ने इन सभी निर्देशों को तुरंत अपने सभी प्रतिष्ठानों पर लागू किया। 
यूरोपियन स्पेस एजंसी के डायरेक्टर जनरल Jan Wörner ने कहा हमारे लिए अपने कर्मचारियों का स्वास्थ्य सर्वोपरि है। बहुत ही कम संख्या में केवल उन्हीं कर्मचारियों को काम पर  गया जिनके बिना इस एजंसी के कई नाज़ुक काम चल ही नहीं सकते थे। इस संबंध में 17 और 18 मार्च को होने वाली काउन्सिल मीटिंग भी रद्द कर दी गयी लेकिन इसके बावजूद एग्ज़ेक्युटिव कमेटी की आवश्यक स्वीकृतियों की आज्ञा देने के लिए सबसे बढ़िया रास्तों और तरीकों पर विचार विमर्श जारी रहा। 
इसी बीच लांच होने वाले बहुत से अभियानों को रोकना भी पड़ा। इस पर तेज़ी से काम जारी है कि स्वास्थ्य के नज़रिये से हालात अनुकूल बनते ही इन अभियानों को जल्द ही लांच किया जा सके। 
(तस्वीर European Space Agency से साभार)

गुरुवार, 12 मार्च 2020

जिस दिन मेरा जन्म हुआ उस दिन सब कैसा था?

मुझे उन पलों की धुंधली सी याद भी नहीं है
Credit: ESO/Spitzer/NASA/JPL/S. Kraus
सोशल मीडिया//लुधियाना: 12 मार्च 2020: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी):: जन्म के अतीत में 
ओशो ने इस संबंध में बहुत कुछ विस्तार से कहा है 
ख़ास ग्रुप 
जन्म का दिन कैसा था मुझे नहीं याद। उस समय दिन की रौशनी थी या रात्रि का अन्धेरा था मुझे यह भी नहीं मालूम। हवा रुकी हुई थी या चल रही थी यह भी नहीं पता। मौसम में ठंडक थी या गर्मी यह भी नहीं जान सका मैं। मुझे उन पलों की धुंधली सी याद भी नहीं है। शायद मुझे उस समय इतनी होश नहीं थी कि इसे देख या समझ पाता।  जिनको यह सारी होश थी उनसे बहुत बार पूछा लेकिन उन सभी ने मेरे सवालों को हंस कर टाल दिया।  उनकी नज़र में मेरे यह सभी सवाल फ़िज़ूल थे। हालांकि विश्व में ऐसे धर्म और ऐसी प्रजातियाँ हैं जो अतीत में जाने के प्रयास करती भी हैं और करवाती भी हैं लेकिन उनके सम्पर्क में भी बहुत कम लोग जा पाते हैं। बहुसंख्या तक यह पहुंच होनी भी नहीं चाहिए क्यूंकि ज़्यादातर लोगों को इसकी समझ भी नहीं आने वाली। मेरे यह सवाल मेरी नजर में महत्वपूर्ण थे। बिलकुल उसी तरह जैसे कैमरा क्लिक करने के वक्त हम रौशनी को देखते हैं। विपरीत दिशा से आ रही रौशनी सारी मेहनत बेकार कर देती है। अच्छी भली फोटो खराब हो जाती है। जब कुछ दशक पहले फोटो खींचने के लिए रील का प्रयोग होता था तो फोटो खींचने के बाद उसे धुलवाना पड़ता था। इस काम के लिए बाकायदा स्टुडियो का एक हिस्सा डार्क रूम हुआ करता था जहाँ रौशनी बहुत ही कम होती थी। जब फिल को धोया जाता था तो उस समय वह रौशनी भी बंद कर दी जाती थी। इसी प्रक्रिया पर निर्भर करती थी फोटो की क्वालिटी। अतीत में जाने की प्रक्रिया कुछ पता देती है हमारे जन्म के विज्ञान का। हम कहाँ चूक गए? हम क्या ले कर आये। अब जिंदगी भर हमारे साथ क्या रहने वाला है? जिन परिणामों के साथ हम बंध गए उन्हें कैसे सुधारा जा सकता है? इसका एक विज्ञान है जिसके साथ निरंतर अन्याय हो रहा है। जो इसका अंधाधुंध विरोध है उनके हाथों भी और जो इसे समझने की बजाये अंधाधुध माने चले जा रहे हैं उनके हाथों भी। ओशो ने इस सम्बन्ध में भी बहुत कुछ कहा है जो अनमोल है। मुझे यह सब याद आया फेसबुक पर अपनी ही एक तस्वीर देख कर जिसे पोस्ट किया देविंदर बिमरा जी ने।  मेरे जन्मदिन के मौके पर उन्होंने इस तस्वीर पर हैपी बर्थडे भी लिखा। इस ग्रुप में लेखकों को जन्मदिन मुबारक कहने का यह अनूठा अंदाज़ बहुत ही लोकप्रिय हुआ है। जन्मदिन की इसी बधाई  के बहाने बहुत से लेखकों की तस्वीरें इसी एक मंच में एकत्र हो चुकी हैं जो अन्य लेखकों के लिए भी बहुत ही फायदेमंद हैं। ज़रूरत पड़े तो झट से तस्वीर हाज़िर। 
रेक्टर कथूरिया 
इस तरह साहित्य पर सक्रिय मीडिया के लिए यह बहुत ही अच्छा ग्रुप है।हिंदी पंजाबी के लेखकों की तस्वीरें इसी ग्रुप में संग्रहित करने का मुश्किल काम करते हैं देविंदर बिमरा जी। इस मंच पर बहुत से लेखकों की तस्वीरें हैं जिनमें उन लेखकों का चेहरा होता ही है। उस चेहरे में एक झलक भी होती है जो उनकी ज़िंदगी का पता देती है। जो कुछ अक्सर हम छुपा लेते हैं उसका भी इशारा सा करती है। हमारी उपलब्धियों के साथ साथ हमारी बेबसियों और मजबूरियों का भी संकेत करती है। साकार हुए सपनों के साथ साथ टूट गए या अधूरे रह गए सपनों की भी बात करती हैं। अधूरी बात और प्यास का भी पता देती हैं। हमने जो जो नशा कहीं छुप कर किया होगा उसका भी पता देती है। अगर किसी को ठगने के प्रयास छुप कर भी  तो उनका भी पता मिलता है। कुल मिला कर हमारा चेहरा सचमुच एक किताब ही तो होता है। यह बात अलग है उसे हर कोई न तो पढ़ सकता है और न ही पढ़ना चाहता है। हमारी तमाम कोशिशें, हमारे सभी प्रयास, हमारी सभी चालाकियां, हमारी हर बात  उसमें नज़र आ ही जाती है। इसके साथ ही वह दर्द भी दिखने लगता है जिसे हमने अकेले में सहा। जिसका पता हमने किसी को भी न लगने दिया। बहुत  तस्वीर में छुपा चेहरा। हम बहुत कुछ बदलना चाहते हैं; अपना भी और अपने मित्रों का भी लेकिन कर कुछ नहीं पाते। लेकिन हमें कोशिश तो करनी ही चाहिए। शायद सफलता मूल ही जाये। बहुत से लोगों को मिलती भी है। 
हम अकेले शायद बहुत कुछ न भी बदल सकते हों लेकिन मिलजुल कर एक दुसरे के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। जिस दिन सांसों की डोर  टूट जाएगी  न किसी को हैपी बर्थडे कहा जा सकेगा न ही सुना जा सकेगा। जब तक सांस चलती है तब तक हम ऐसे अवसरों को मनाते रहें। शायद किसी को अपने पहले जन्मदिन का वह सब कुछ याद आ जाये जो उसे पता होता तो कितना अच्छा होता। कुल मिला कर यह एक अच्छा प्रयास है जिसमें हमें सक्रिय रूप से जुड़ना चाहिए। 
                                                         -रेक्टर कथूरिया (पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)