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गुरुवार, 28 अगस्त 2025

5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए समय पर आधार अनिवार्य

इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 27 AUG 2025 5:29PM by PIB Delhi

बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) सुनिश्चित करने का भी आह्वान

यूआईडीएआई ने देश भर के स्कूलों से 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए समय पर आधार अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) सुनिश्चित करने का आह्वान किया

यूआईडीएआई के सीईओ ने राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर स्कूलों में शिविर लगाकर लंबित एमबीयू को पूरा करने का आग्रह किया

यूआईडीएआई और शिक्षा मंत्रालय ने यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई+) प्लेटफॉर्म पर लगभग 17 करोड़ बच्चों के लिए आधार में लंबित एमबीयू को सुगम बनाने के लिए हाथ मिलाया


नई दिल्ली
: 27 अगस्त 2025: (PIB Delhi//पंजाब स्क्रीन Blog TV)::

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने स्कूली बच्चों की आधार से संबंधित अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) की स्थिति यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई+) एप्लीकेशन पर उपलब्ध कराने के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के साथ हाथ मिलाया है -यह एक ऐसा कदम है, जिससे करोड़ों छात्रों के लिए आधार में एमबीयू की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

पाँच वर्ष की आयु के बच्चों और पन्‍द्रह वर्ष की आयु के बच्चों के लिए आधार में एमबीयू (एमबीयू) का समय पर पूरा होना एक अनिवार्य आवश्यकता है। आधार में बच्चों के बायोमेट्रिक डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है। लगभग 17 करोड़ आधार संख्याएँ ऐसी हैं जिनमें अनिवार्य बायोमेट्रिक्स अपडेट लंबित है।

आधार में बायोमेट्रिक्स अपडेट करना बच्चे के लिए ज़रूरी है, अन्यथा बाद में विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत लाभ प्राप्त करने, नीट, जी, सीयूईटी जैसी प्रतियोगी और विश्वविद्यालय परीक्षाओं में पंजीकरण के लिए प्रमाणीकरण करते समय उन्‍हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। यह ध्यान देने योग्य है कि कई बार छात्र और अभिभावक अंतिम समय में आधार अपडेट कराने की जल्दी में होते हैं, जिससे चिंताएँ बढ़ जाती हैं। समय पर बायोमेट्रिक अपडेट करके इस समस्या से बचा जा सकता है।

यूआईडीएआई के सीईओ श्री भुवनेश कुमार ने भी राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के सभी मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर इस पहल से अवगत कराया है और उनसे लक्षित एमबीयू शिविरों के आयोजन में सहयोग देने का अनुरोध किया है।

यूआईडीएआई के सीईओ ने अपने पत्र में लिखा है, "ऐसा विचार था कि स्कूलों के माध्यम से एक कैंप आयोजित करने से लंबित एमबीयू को पूरा करने में मदद मिल सकती है। मुख्य प्रश्न यह था कि स्कूलों को कैसे पता चलेगा कि किन छात्रों ने बायोमेट्रिक अपडेट नहीं किए हैं। यूआईडीएआई और भारत सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की तकनीकी टीमों ने यूडीआईएसई+ एप्लिकेशन के माध्यम से एक समाधान को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए मिलकर काम किया है। अब सभी स्कूलों को लंबित एमबीयू की जानकारी मिल सकेगी"।

यूडीआईएसई+ के बारे में

शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली प्लस (यूडीआईएसई+) स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अंतर्गत एक शैक्षिक प्रबंधन सूचना प्रणाली है और यह स्कूली शिक्षा से संबंधित विभिन्न आँकड़े एकत्र करती है।

यूआईडीएआई और स्कूली शिक्षा विभाग की इस संयुक्त पहल से बच्चों के बायोमेट्रिक्स को अपडेट करने में आसानी होने की उम्मीद है।

***//पीके/केसी/केपी/एसएस  

बुधवार, 27 अगस्त 2025

भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2030 तक 300 अरब डॉलर तक पहुँच जाएगी

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 27 Aug 2025 at 5:16 PM by PIB Delhi

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा विस्तार से 

*डॉ. जितेंद्र सिंह ने युवा चुनौती के शुभारंभ के साथ बायोई3 नीति के एक वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया

*केंद्रीय मंत्री ने पहले राष्ट्रीय बायोफाउंड्री नेटवर्क का अनावरण किया

*स्वदेशी जैव-निर्माण को मज़बूत करने के लिए

*भारत के जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने बायोई3 नीति के अंतर्गत महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं


नई दिल्ली: 27 अगस्त 2025: (PIB Delhi//पंजाब स्क्रीन Blog TV)::

केंद्रीय विज्ञान और  प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बायोई3 (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोज़गार के लिए जैव-प्रौद्योगिकी) नीति के एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आज युवाओं के लिए बायोई3 चुनौती और देश के पहले राष्ट्रीय बायोफाउंड्री नेटवर्क का शुभारंभ किया। उन्होंने इसे जैव-प्रौद्योगिकी को भारत की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोज़गार का वाहक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि  "भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2014 में मात्र 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में 165.7 अरब डॉलर हो गई है और अब हम 2030 तक 300 अरब डॉलर के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं।" उन्होंने कहा कि भारत के जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने पिछले एक साल में बायोई3 नीति के अंतर्गत तेज़ी से प्रगति की है और कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं जो देश की जैव-अर्थव्यवस्था को आकार दे रही हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने "बायोई3 के एक वर्ष: नीति से कार्रवाई तक" के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि जैव-प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने अपने हितधारकों के साथ मिलकर कम समय में नए संस्थान स्थापित किया हैं, संयुक्त अनुसंधान पहल शुरू की हैं और राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियाँ स्थापित की हैं।

उल्लेखनीय उपलब्धियों पर केंद्रीय मंत्री ने मोहाली में देश के पहले जैव-विनिर्माण संस्थान के उद्घाटन, देश भर में जैव-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केंद्रों, जैव-विनिर्माण केंद्रों और जैव-फाउंड्री की स्थापना और कोशिका तथा जीन थेरेपी, जलवायु-अनुकूल कृषि, कार्बन कैप्चर और कार्यात्मक खाद्य पदार्थों जैसे उन्नत क्षेत्रों को कवर करने वाले एक दर्जन से अधिक संयुक्त अनुसंधान कॉलों के शुभारंभ के बारे में बताया। डीबीटी को इन श्रेणियों के अंतर्गत पहले ही 2,000 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंतरिक्ष जैव प्रौद्योगिकी और जैव-विनिर्माण में सहयोग के लिए डीबीटी और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन, साथ ही प्राथमिकता वाली परियोजनाओं की पहचान हेतु एक संयुक्त कार्य समूह का भी उल्लेख किया। इस वर्ष की शुरुआत में गगनयात्री ग्रुप कैप्टन सुभांशु शुक्ला द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर डीबीटी समर्थित तीन प्रयोग किए गए थे।

राज्य स्तर पर डीबीटी ने केंद्र-राज्य साझेदारी शुरू की है। इसमें असम के साथ एक बायोई3 सेल स्थापित करने हेतु एक समझौता ज्ञापन भी शामिल है।  इसमें राज्य के लिए एक कार्य योजना भी शामिल है। वैश्विक मोर्चे पर 52 देशों में भारत के मिशनों ने बायोई3 नीति पर इनपुट साझा किए हैं और डीबीटी तथा विदेश मंत्रालय अनुवर्ती कार्रवाई पर काम कर रहे हैं

इस कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ. जितेंद्र सिंह ने युवाओं के लिए बायोई3 चैलेंज का भी शुभारंभ किया—जो "सूक्ष्मजीवों, अणुओं और अन्य का डिज़ाइन" विषय के अंतर्गत युवा नवप्रवर्तकों के लिए एक राष्ट्रव्यापी आह्वान है। डीबीटी सचिव डॉ. राजेश गोखले द्वारा समझाई गई इस पहल के अंतर्गत स्कूली छात्रों (कक्षा 6-12), विश्वविद्यालय के छात्रों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों, स्टार्टअप्स और भारतीय नागरिकों को स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण और उद्योग की चुनौतियों का समाधान करने वाले सुरक्षित जैविक समाधान डिज़ाइन करने के लिए आमंत्रित किया जाता है। इस चैलेंज की घोषणा अक्टूबर 2025 से शुरू होकर हर महीने की पहली तारीख को की जाएगी। 

इसमें शीर्ष 10 विजेता समाधानों में से प्रत्येक को मान्यता और मार्गदर्शन सहायता के साथ ₹1 लाख का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा 100 चयनित पुरस्कार विजेता अपने विचारों को अवधारणा-सिद्ध समाधानों में बदलने के लिए बीआईआरएसी के माध्यम से दो किस्तों में ₹25 लाख तक की धनराशि प्राप्त होगी। 

इन परियोजनाओं को भारत भर के बीआईआरएसी+ संस्थानों में सुविधाओं और इनक्यूबेशन सहायता तक भी पहुँच प्राप्त होगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों को सशक्त बनाना, युवाओं के नेतृत्व में परिवर्तन को बढ़ावा देना और एक स्थायी और आत्मनिर्भर जैव-अर्थव्यवस्था की ओर भारत की यात्रा को सुदृढ़ बनाना है। 

युवाओं के लिए बायोई3 चैलेंज डिज़ाइन ढाँचे पर आधारित है, जो प्रतिभागियों को वास्तविक आवश्यकताओं को परिभाषित करने, साक्ष्य-प्रथम समाधान बनाने, डिज़ाइन द्वारा स्थिरता सुनिश्चित करने, अन्य तकनीकों और नीतियों के साथ एकीकरण करने, बाज़ार में पहुँचने के लिए रणनीतियाँ विकसित करने और रोज़गार, समावेशन और समान पहुँच में मापनीय परिणामों के माध्यम से एक शुद्ध-सकारात्मक प्रभाव पैदा करने में मार्गदर्शन करता है।

केंद्रीय मंत्री ने पहले राष्ट्रीय बायोफाउंड्री नेटवर्क के शुभारंभ पर भी बल दिया। इसमें छह संस्थान शामिल हैं जो अवधारणा विकास को बढ़ावा देने, स्वदेशी जैव-विनिर्माण को बढ़ावा देने और रोज़गार के अवसर सृजित करने में मदद करेंगे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, "भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2014 में केवल 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में 165.7 अरब डॉलर हो गई है और अब हम 2030 तक 300 अरब डॉलर के लक्ष्य की ओर काम कर रहे हैं।" उन्होंने देश के युवाओं को युवाओं के लिए बायोई3 चैलेंज में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया, जो सुरक्षित और टिकाऊ जैव-प्रौद्योगिकी नवाचारों के लिए विचार आमंत्रित करता है।

उन्होंने कहा कि ये पहल भारत के आर्थिक विकास के एक स्तंभ के रूप में जैव-प्रौद्योगिकी को मज़बूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं, साथ ही यह सुनिश्चित करती हैं कि कृषि और स्वास्थ्य सेवा से लेकर ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण तक, विभिन्न क्षेत्रों में नागरिकों तक लाभ पहुँचे।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने कहा कि बायोई3 नीति के माध्यम से भारत ने जन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, पर्यावरण की रक्षा करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए जैव प्रौद्योगिकी का लाभ उठाकर एक हरित, स्वच्छ और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण की दिशा में एक रणनीतिक कदम उठाया है। इससे आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण का योगदान मिला है। उन्होंने कहा कि जीव विज्ञान अब एक अलग-थलग विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह इंजीनियरिंग, वास्तुकला और अंतरिक्ष विज्ञान के साथ तेज़ी से जुड़ रहा है। इससे बायोफिलिक शहरी डिज़ाइन, शैवाल-आधारित कार्बन कैप्चर, आनुवंशिक रूप से संशोधित पौधे, बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक, कृत्रिम अंग, ऑर्गन-ऑन-ए-चिप सिस्टम और अंतरिक्ष जीव विज्ञान प्रयोग जैसे नवाचारों को बढ़ावा मिल रहा है। आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (एजीआई) जैसे उभरते उपकरणों के साथ जीव विज्ञान का संयोजन देश के युवाओं के लिए नए और सार्थक करियर के अवसर खोलता है। प्रो. सूद ने कहा कि देश के मज़बूत STEM आधार और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के नेतृत्व में, बायोई3 अनुसंधान और विकास को गति देगा, रोज़गार सृजन करेगा और एक स्थायी जैव-अर्थव्यवस्था का निर्माण करेगा, यह भारत के भविष्य को आकार देगी।

इस कार्यक्रम में डीबीटी की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अलका शर्मा, बीआईआरएसी के प्रबंध निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार ने भी अपने संबोधन में बायोई3 नीति के भविष्य के बारे में जानकारी साझा की। 

*****//पीके/ केसी/ एसके/डीके//(रिलीज़ आईडी: 2161334)

बुधवार, 28 मई 2025

राष्ट्रपति भवन में साहित्य सम्मेलन का आयोजन:

 राष्ट्रपति सचिवालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 28 MAY 2025 at 1:20 PM by PIB Delhi

 साहित्य कितना बदल गया है?


नई दिल्ली
: 28 मई 2025: (PIB Delhi//पंजाब स्क्रीन Blog TV)::

राष्ट्रपति भवन, साहित्य अकादमी, संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से 29 और 30 मई, 2025 को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में एक साहित्यिक सम्मेलन: साहित्य कितना बदल गया है? का आयोजन करेगा।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 29 मई, 2025 को इस सम्मेलन का उद्घाटन करेंगी। संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और देश भर के साहित्यकार इस सम्मेलन में शामिल होंगे।

इस दो दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न विषयों जैसे कवि सम्मेलन - सीधे दिल से; भारत का नारीवादी साहित्य: नई राहें बनाना; साहित्य में बदलाव बनाम बदलाव का साहित्य; तथा वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारतीय साहित्य की नई दिशाएं पर विभिन्न सत्र होंगे। इस सम्मेलन का समापन देवी अहिल्याबाई होल्कर की गाथा के साथ होगा।

***//एमजी/केसी/जेके/एनजे//(रिलीज़ आईडी: 2131970)

शनिवार, 30 नवंबर 2024

HIVपर जागृति का एक नियमित प्रयास:विश्व एड्स दिवस 2024

स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//विश्व एड्स दिवस 2024//Posted on 30th NOV 2024 11:40 AM by PIB Delhi

भारत में 25 लाख से ज्यादा लोग एचआईवी से पीड़ित हैं 

नई दिल्ली: 30 नवंबर 2024: (पीआईबी दिल्ली//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)::  

विश्व एड्स दिवस, 1988 से प्रति वर्ष 01 दिसंबर को मनाया जा रहा है। यह एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस)/एड्स (एक्वायर्ड इम्यून डेफिसिएंसी सिंड्रोम) के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए लोगों को एकजुट करने तथा महामारी के खिलाफ एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए एक वैश्विक मंच के रूप में कार्य करता है। यह सरकारों, संगठनों और समुदायों के लिए इस रोग की वर्तमान चुनौतियों पर प्रकाश डालने तथा इसके रोकथाम, उपचार एवं देखभाल में की गई प्रगभारत में 25 लाख से ज्यादा लोग एचआईवी से पीड़ित हैंति को दर्शाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन को वैश्विक रूप से सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य अवलोकनों में से एक के रूप में मान्यता प्रदान की गई है, जो न केवल जागरूकता फैलाता है बल्कि उन लोगों को भी याद भी करता है जिनकी मौत एचआईवी/एड्स के कारण हुई है। यह स्वास्थ्य सेवाओं तक विस्तारित पहुंच जैसे मील के पत्थर का भी उत्सव मनाता है। एचआईवी जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दे के बारे में ज्ञान को बढ़ावा देकर, विश्व एड्स दिवस एचआईवी से लड़ने तथा सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज एवं स्वास्थ्य अधिकार प्राप्त करने के बीच के अभिन्न संबंधों पर प्रकाश डालता है।

2024 का विषय: "सही रास्ता अपनाएं: मेरी सेहत, मेरा अधिकार!"

विश्व एड्स दिवस 2024 का विषय, "सही रास्ता अपनाएं: मेरी स्वास्थ्य, मेरा अधिकार!" है, जो स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच और लोगों को अपने स्वास्थ्य प्रबंधन में सशक्त बनने के महत्व पर बल देता है। यह उन प्रणालीगत असमानताओं को संबोधित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है जो कमजोर आबादी को एचआईवी के आवश्यक रोकथाम एवं उपचार सेवाएं प्राप्त करने से वंचित करती है। वर्ष 2024 का विषय मानवाधिकारों की भूमिका को उजागर करता है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी लोगों को, उनकी पृष्ठभूमि या परिस्थितियों पर ध्यान दिए बिना, स्वास्थ्य अधिकार प्राप्त हो सके। अधिकार-आधारित दृष्टिकोण पर ध्यान केंद्रित करके, 2024 का अभियान समावेशिता को बढ़ावा देने, कलंक को कम करने और एचआईवी/एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करने के लिए वैश्विक सहयोग को प्रोत्साहित करने की कोशिश करता है।

एचआईवी/एड्स की वर्तमान स्थिति: एक वैश्विक एवं राष्ट्रीय दृष्टिकोण

एचआईवी/एड्स पर संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम (यूएनएड्स) द्वारा जारी वैश्विक एड्स अपडेट 2023 के अनुसार, वैश्विक स्तर पर एचआईवी/एड्स से लड़ने में महत्वपूर्ण प्रगति प्राप्त की गई है। भारत जैसे देशों में नए एचआईवी संक्रमण मामलों में कमी आई है, जहां एक मजबूत कानूनी संरचना और बढ़े हुई वित्तीय निवेशों ने 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करने के लक्ष्य की प्राप्ति करने की दिशा में प्रगति की है। विशेष रूप से, भारत की पहचान कमजोर आबादी के अधिकारों की रक्षा करने के लिए कानूनों को मजबूत बनाने के रूप हुई है।

राष्ट्रीय स्तर पर, भारत एचआईवी अनुमान 2023 रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में 25 लाख से ज्यादा लोग एचआईवी से पीड़ित हैं। इसके बावजूद, देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसमें वयस्क एचआईवी प्रसार 0.2% दर्ज किया गया है और अनुमान है कि वार्षिक रूप से नए एचआईवी संक्रमणों की संख्या 66,400 है, जिसमें 2010 के बाद से 44% की कमी आयी है। भारत ने 39% की वैश्विक कमी दर को पीछे छोड़ दिया है, जो निरंतर किए गए मध्यवर्तनों की सफलता को दर्शाता है। 16.06 लाख एचआईवी (पीएलएचआईवी) से पीड़ित लोगों के लिए 725 एआरटी (एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी) केंद्रों के माध्यम से मुफ्त उच्च गुणवत्ता वाले आजीवन उपचार की उपलब्धता (जून 2023 के अनुसार) और 2022-2023 में किए गए 12.30 लाख वायरल परीक्षण भारत द्वारा प्रभावित जनसंख्या के लिए देखभाल सुविधा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

भारत की एचआईवी/एड्स महामारी पर प्रतिक्रिया: एक व्यापक दृष्टिकोण

भारत में एचआईवी/एड्स महामारी के खिलाफ लड़ाई 1985 में शुरू हुई। इसे विभिन्न जनसंख्या समूहों एवं भौगोलिक स्थानों में वायरस का पता लगाने के लिए सीरो-सर्वेक्षण के साथ शुरू किया गया। अभियान का प्रारंभिक चरण (1985-1991) एचआईवी मामलों की पहचान, ट्रांसफ्यूजन से पहले रक्त सुरक्षा सुनिश्चित करना और लक्षित जागरूकता उत्पन्न करने पर केंद्रित था। इस अभियान में 1992 में राष्ट्रीय एड्स और एसटीडी नियंत्रण कार्यक्रम (एनएसीपी) की शुरूआत के साथ तेजी आई। यह देश में एचआईवी/एड्स से निपटने के लिए एक व्यवस्थित एवं व्यापक दृष्टिकोण की शुरुआत थी। 35 वर्षों में, एनएसीपी विश्व के सबसे बड़े एचआईवी/एड्स नियंत्रण कार्यक्रमों में से एक बन चुका है।

एनएसीपी चरणों का विकास

एनएसीपी के पहले चरण (1992-1999) में जागरूकता फैलाने और रक्त सुरक्षा सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी गई। दूसरे चरण (1999-2007) की शुरुआत के साथ, रोकथाम, पहचान और उपचार के लिए सीधे मध्यवर्तन प्रस्तुत किए गए। राज्यों को प्रभावी कार्यक्रम प्रबंधन क्षमता से युक्त किया गया। तीसरे चरण (2007-2012) में गतिविधियों का प्रमुख विस्तार हुआ, जिसमें विकेंद्रीकृत कार्यक्रम प्रबंधन जिला स्तर तक पहुंचा। चौथे चरण (2012-2017) में पहले के प्रयासों को एकीकृत किया गया, जिसमें सरकारी वित्तपोषण में वृद्धि हुई और कार्यक्रम की स्थिरता सुनिश्चित की गई।

विस्तारित एनएसीपी के चौथे चरण (2017-2021) में कई ऐतिहासिक पहलों को शुरू किया गया, जिसमें एचआईवी और एड्स (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 2017 को पारित करना शामिल है, जो एचआईवी-पॉजिटिव लोगों को समान अधिकारों की गारंटी प्रदान करता है और उनके खिलाफ भेदभाव को रोकता है। यह अधिनियम सितंबर 2018 में प्रभावी हुआ और इसने एचआईवी (पीएलएचआईवी) से ग्रसित लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए भारत की कानूनी संरचना को मजबूत किया।

इस चरण के दौरान, सरकार ने 2017 में 'टेस्ट और ट्रीट' नीति की शुरुआत की, यह सुनिश्चित करते हुए कि एचआईवी से निदान प्राप्त प्रत्येक व्यक्ति को उनके नैदानिक चरण की परवाह किए बिना मुफ्त एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) प्राप्त हो। पीएलएचआईवी लोग, जिन्होंने उपचार बंद कर दिया, उन्हें फिर से जोड़ने के लिए 2017 में 'मिशन संपर्क' पहल की शुरुआत की गई। 2020-2021 के दौरान, कोविड-19 महामारी ने कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां सामने आई। हालांकि, एनएपीसी ने कार्यक्रम की समीक्षा, समन्वय और क्षमता निर्माण के प्रयासों को बढ़ाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का लाभ उठाया। कई महीनों की दवाओं का एकसाथ वितरण करके और सामुदाय-आधारित एआरटी रिफिल जैसी नवाचारों के माध्यम से महामारी के दौरान उपचार सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित की गई।

एनएसीपी का पांचवां चरण: एचआईवी/एड्स की समाप्ति पर नये सिरे से ध्यान केंद्रित करना

एनएसीपी का पांचवां चरण केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में 2021-26 के लिए 15,471.94 करोड़ रुपये की लागत के साथ शुरू किया गया। एनएसीपी के पांचवे चरण का उद्देश्य पिछली उपलब्धियों को आगे बढ़ाना और लगातार चुनौतियों का समाधान करना, साथ ही 2010 के आधारभूत मूल्य से 2025-26 तक वार्षिक नए एचआईवी संक्रमण एवं एड्स संबंधित मृत्यु दर में 80% तक कमी लाना है। इसके अतिरिक्त, एनएसीपी के पांचवें चरण का उद्देश्य जोखिम और असुरक्षित आबादी के लिए गुणवत्तापूर्ण एसटीआई/आरटीआई सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुंच को बढ़ावा देते हुए ऊर्ध्वाधर ट्रांसमिशन का दोहरा उन्मूलन, एचआईवी/एड्स से संबंधित कलंक को समाप्त करना है।

एनएसीपी के पांचवें चरण को आठ मार्गदर्शक सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करके विशिष्ट लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण, तालमेल निर्माण, प्रौद्योगिकी एकीकरण, लिंग-संवेदनशील प्रतिक्रियाएं और साझेदारी को बढ़ावा देना शामिल है। इस चरण में लागत प्रभावी सेवा वितरण के लिए मौजूदा सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हुए, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के साथ प्रमुख सहयोग की योजना बनाई गई है।

एनएसीपी के पांचवें चरण का मुख्य उद्देश्य

एचआईवी/एड्स का रोकथाम एवं नियंत्रण:

95% उच्च जोखिम वाले व्यक्ति तक व्यापक रोकथाम सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना।

95-95-95 लक्ष्य की प्राप्ति: एचआईवी पॉजिटिव 95% लोग अपनी स्थिति से अवगत हों, निदान किए गए 95% लोगों का उपचार होता रहे और उन रोगियों में से 95% वायरल दमन प्राप्त करें।

यह सुनिश्चित करके ऊर्ध्वाधर ट्रांसमिशन का समाप्त करना कि एचआईवी ग्रसित 95% गर्भवती महिलाओं ने वायरल लोड का दमन किया है।

एचआईवी और प्रमुख आबादी के साथ रहने वाले 10% से कम लोग कलंक एवं भेदभाव का अनुभव करें।

एसटीआई (यौन संचारित संक्रमण)/आरटीआई (प्रजनन प्रणाली संक्रमण) रोकथाम एवं नियंत्रण:

जोखिम वाली आबादी को उच्च गुणवत्ता वाली सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुंच प्रदान करना।

सिफलिस के ऊर्ध्वाधर ट्रांसमिशन को समाप्त करना।

निष्कर्ष

विश्व एड्स दिवस 2024 एचआईवी/एड्स की समाप्ति की दिशा में किए जाने वाले कार्यों की याद दिलाता है। एनएसीपी का पांचवां चरण और इसके अधिकार-आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से, भारत ने रोकथाम, उपचार एवं देखभाल में महत्वपूर्ण प्रगति प्राप्त की है। हालांकि, प्रणालीगत असमानताओं और सामाजिक कलंक जैसी चुनौतियों पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। इसका विषय "सही रास्ता अपनाएं: मेरा स्वास्थ्य, मेरा अधिकार!" जिसमें समावेशिता को बढ़ावा देने, मानवाधिकारों को बनाए रखने और समान स्वास्थ्य देखभाल पहुंच सुनिश्चित करने का सामूहिक अभियान शामिल है। जैसे-जैसे दुनिया 2030 तक एड्स को समाप्त करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के नजदीक पहुंच रही है, भारत सहयोगात्मक कार्रवाई, नवीन रणनीतियों और स्वास्थ्य समानता के प्रति एक अटूट प्रतिबद्धता का उदाहरण प्रस्तुत करता है। संरचनात्मक चुनौतियों का समाधान करके एवं सफल मध्यवर्तनों को बढ़ावा देकर, भारत एचआईवी/एड्स के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का नेतृत्व करने के लिए तैयार है, जो सभी के लिए एक स्वस्थ, कलंक मुक्त भविष्य सुनिश्चित करता है।

संदर्भ:

https://www.who.int/campaigns/world-aids-day

https://x.com/MoHFW_INDIA/status/1828618507556155485/photo/1

https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2058434

Lok Sabha Unstarred Question No. 2555 Dated 4th August, 2023

https://naco.gov.in/sites/default/files/NACP_V_Strategy_Booklet.pdf

https://x.com/MoHFW_INDIA/status/1068693667731238912/photo/1

Kindly find the pdf file 

*****//एमजी/केसी/एके//(रिलीज़ आईडी: 2079356)

शनिवार, 3 दिसंबर 2022

गुलामी की मानसिकता से मुक्त होना भी बेहद ज़रूरी

Posted On: 03rd December 2022 at 3:40 PM
मन के गहरे कोने में भी गुलामी का कोई अंश तक न हो-मोदी  

ज़रा समझिए कि नया भारत:औपनिवेशिक अतीत के प्रतीकों को क्यूं हटा रहा है

नई दिल्ली: 3 दिसंबर 2022: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)::देश की जनता का एक बहुत बड़ा हिस्सा अक्सर देश के बहुत से स्थानों और इमारतों के नाम उनके नाम पर देखता रहा है जिनके बार में उनके मन की छवि नायक की नहीं खलनायक की रही है। उसके मन में सवाल उठते रहे कि इनका इतना महिमामंडन क्यूं? स्वतंत्रता के बाद भी उन्हींका गुणगान क्यूं जिन्होंने देश को लम्बे समय तक गुलाम बनाए रखा। क्या ये सब वोटबैंक की सियासत का परिणाम है?
15 अगस्त, 2022 को भारत के 76वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आने वाले 25 वर्षों (अमृत काल) के लिए 'पंच प्राण'के बारे में बात की थी। ‘दूसरे प्राण’ के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, "हमारे अस्तित्व के किसी भी हिस्से में, यहां तक ​​कि हमारे मन या आदतों के किसी गहरे कोनें में भी गुलामी का कोई अंश नहीं होना चाहिए। हमें इसे वहीं समाप्त कर देना चाहिए। हमें अपने आप को गुलामी की उस मानसिकता से मुक्त करना होगा जो हमारे भीतर और हमारे आस-पास मौजूद असंख्य चीजों में दिखाई देती है। यही हमारी दूसरी प्राण शक्ति है।

आधुनिक भारत का इतिहास दो शताब्दियों के ब्रिटिश उपनिवेशवाद के साथ गहराई से जुड़ा है, और स्वतंत्रता प्राप्ति के दशकों बाद भी, हमारे देश ने विभिन्न रूपों में, कुछ विशिष्ट और कुछ सूक्ष्म रूप में अपने औपनिवेशिक बोझ को ढोने का क्रम जारी रखा है। पिछले कुछ वर्षों से, सरकार धीरे-धीरे भारत को ब्रिटिश शासन के इन प्रतीकों से दूर कर रही है, और एक नए भारत की पहचान को मजबूती से स्थापित करने के लिए उसने अनेक क्षेत्रों में कई कदम उठाए हैं और वास्तव में देश को उसकेऔपनिवेशिक अतीत से मुक्त कराया है।

इस नए अभियान के अंतर्गत राजपथ का नाम बदल कर कर्तव्य पथ रखा गया

 अमृत ​​काल में 'औपनिवेशिक मानसिकता के किसी भी निशान को हटाने' के अपने संकल्प के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 08 सितंबर, 2022 को नई दिल्ली में 'कर्तव्य पथ'का उद्घाटन किया। नामकरण में यह परिवर्तन पूर्ववर्ती राजपथ से परिवर्तन करने का प्रतीक है।कर्तव्य पथ के लिए शक्ति का एक प्रतीक होना सार्वजनिक स्वामित्व और सशक्तिकरण का उदाहरण है।

 इंडिया गेट पर स्थापित नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा अब नए भारत की बात करती महसूस होती है। 

इसी तरह इंडिया गेट के पास लगी किंग जॉर्ज पंचम की प्रतिमा को हटाकर उस स्थान पर राष्ट्रीय नायक और प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की एक विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है। “यहां गुलामी के समय, ब्रिटिश राज के प्रतिनिधि की एक मूर्ति थी। आज उसी स्थान पर नेताजी की प्रतिमा स्थापित कर देश ने एक आधुनिक, मजबूत भारत को जीवंत किया है। नेताजी की ग्रेनाइट की मूर्ति उसी स्थान पर स्थापित की गई है, जहां इस साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने पराक्रम दिवस (23 जनवरी) को नेताजी की एक होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया था।

 नई नौसेना पताका औपनिवेशिक अतीत के प्रस्थान का प्रतीक है

औपनिवेशिक अतीत से दूर जाने के लिए किये जा रहे राष्ट्रीय प्रयास के गुंजायमान, एक नए नौसैनिक ध्वज में परिवर्तनकी आवश्यकता अनुभव की गई जिसने हमारी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा ली है। पिछली पताका में सेंट जॉर्ज का क्रॉस लगा था, जो स्वतंत्रता से पहले ध्वज का उत्तराधिकारी था, जिसमें शीर्ष बाएं कोने पर यूनाइटेड किंगडम के यूनियन जैक के साथ एक सफेद पृष्ठभूमि पर रेड क्रॉस बना था। नई पताका में दो मुख्य घटक शामिल हैं - ऊपरी बाएं कैंटन में राष्ट्रीय ध्वज, और फ्लाई साइड के केंद्र में एक नेवी ब्लू - गोल्ड अष्टकोना (डंडे से दूर) है। प्रधानमंत्री ने यह पताका छत्रपति शिवाजी महाराज को समर्पित की है, जिसने समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक मजबूत नौसेना का निर्माण किया था, जो भारत की स्वदेशी शक्ति का प्रतीक है।

 "बीटिंग द रिट्रीट" समारोह में भारतीय जोश के साथ धुन

 2022 के गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान, 'आजादी का अमृत महोत्सव' मनाने के लिए 'बीटिंग द रिट्रीट' समारोह में कई नई धुनें जोड़ी गईं हैं।इन धुनों में'केरल', 'हिंद की सेना ' और 'ऐ मेरे वतन के लोगों ' शामिल हैं। 'सारे जहां से अच्छा ' की धुन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ था। सितार, संतूर और तबला जैसे भारतीय वाद्ययंत्रों को भी संगीत कलाकारों की टुकड़ी से जोड़ा गया है। इस प्रकार रिट्रीट में भारतीय सुगंध और देशभक्ति का जोश भर दिया गया है, ताकि देश के नागरिकों के साथ अधिक से अधिक संपर्क स्थापित किया जा सके।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (एनडब्ल्यूएम) का निर्माण और अमर जवान ज्योति और एनडब्ल्यूएमकी ज्योतियों का विलय

प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेजों के लिए लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों की याद में अंग्रेजों द्वारा निर्माण किया गया,इंडिया गेट (जिसे पहले अखिल भारतीय युद्ध स्मारक के रूप में जाना जाता था) भारत के औपनिवेशिक अतीत का प्रतीक है। 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के ऊपर भारत की विजय के प्रतीक अमर जवान ज्योति को बाद में तदर्थ व्यवस्था के रूप में उपरोक्त स्थान से जोड़ा गया, क्योंकि देश में युद्ध में वीरगति को प्राप्त होने वाले भारतीय सैनिकों के लिए कोई अन्य स्मारक नहीं था। स्वतंत्र भारत के प्रतीक के रूप में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 25 फरवरी, 2019 को उद्घाटन किया गया था और इसे राष्ट्र को समर्पित किया गया था। इसमें 1971 से पहले और बाद में हुए सभी युद्धों में शहीदहुए सभी भारतीय सैनिकों के नाम हैं। इस प्रकार एनडब्ल्यूएमउन सभी सैनिकों का स्मारक हैजिन्होंने स्वतंत्र भारत की सेवा में या तो अपना जीवन लगा दिया है या भविष्य में यह कार्य करेंगे। इसके उद्घाटन के बाद, सभी श्रद्धांजलि और स्मरण समारोह केवल एनडब्ल्यूएममें आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें राष्ट्रीय दिवसके मौके भी शामिल हैं। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की उपस्थिति में, शाश्वत ज्योति का इस नए स्थल पर स्थानांतरण करना इसलिए उचित समझा गया क्योंकि यह सभी बहादुरशहीदों के सम्मान में ज्योति स्थापित करने के लिए एक उपयुक्त श्रद्धांजलि है।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नाम बदला

30 दिसंबर, 2018 को, नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा भारतीय धरती पर तिरंगा फहराने की 75वीं वर्षगांठ को चिह्नित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने घोषणा की थी कि रॉस द्वीप का नाम बदलकरनेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप कर दिया जाएगा, नील द्वीप को शहीदद्वीप के नाम से जाना जाएगा और हैवलॉक द्वीप का नाम बदलकर स्वराज द्वीप कर दिया जाएगा। स्वतंत्र भारत में भी इन द्वीपों का नाम ब्रिटिश शासकों के नाम पर रखा गया था। सरकार नेभारतीय नाम और भारतीय पहचान देकर गुलामी की इन निशानियों को मिटा दिया।

रेल बजट का वार्षिक केंद्रीय बजट में विलय कर दिया गया

ब्रिटिश युग की प्रथाओं से एक अन्यप्रथा को बदलते हुए, सरकार ने बजट वर्ष 2017-18 से रेल बजट का केंद्रीय बजट के साथ विलय कर दिया। एकवर्थ समिति (1920-21) की सिफारिशों के बाद 1924 में रेलवे वित्त को सामान्य वित्त से अलग कर दिया गया था।

ब्रिटिश शासन के दौरान प्रतिबंधित साहित्यिक कार्यों का पुनरुद्धार

स्वतंत्रता के आंदोलन के दौरानब्रिटिश सरकार द्वारा क्रांतिकारी साहित्यिक कृतियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, क्योंकि इन्हें भारत में उनके शासन की 'सुरक्षा' के लिए 'खतरनाक' माना जाता था। साहित्य के इस निकाय का उद्देश्य लोगों के मन में देशभक्ति की भावना जगाना और स्वतंत्र भारत के लिए खड़े होने का आह्वान करना था। आजादी के अमृत महोत्सव समारोह के हिस्से के रूप में, सरकार ने ऐसी कविताओं, लेखों और प्रकाशनों की पहचान की है जिन पर ब्रिटिश राज ने प्रतिबंध लगा दिया था और उन्हें भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार द्वारा प्रकाशित एक सूची के रूप में एक साथ रखा था।हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की भावनाओं, इच्छाओं और उनके संकल्पों का प्रतिनिधित्व करने वाले ये अनूठे संग्रह विभिन्न भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हैं।

औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाने के लिए की गई अन्य पहलें:

  • सरकार ने उन कुछ प्रमुख सड़कों के नाम बदल दिये हैं जिनके मूल नाम ब्रिटिश काल में प्रतिष्ठित थे।
  1. 2016 में लुटियन की दिल्ली में रेस कोर्स रोड काबड़ा नाम थाजिसे बदलकर लोक कल्याण मार्ग कर दिया गया है। प्रधानमंत्री का प्रसिद्ध आवासीय पता 7, रेस कोर्स रोड इस प्रकार 7, लोक कल्याण मार्ग कर दिया गया है।
  2. वर्ष 2017 में डलहौजी रोड का नाम बदलकर दारा शिकोह रोड कर दिया गया।
  • 2019 में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लंबे समय से चली आ रही औपनिवेशिक युग की प्रथा से अलग हटकर, केंद्रीय बजट पेश करते समय ब्रीफकेस के स्थान पर पारंपरिक भारतीय 'बही खाता'का विकल्प चुना। इतने दशकों तक ब्रिटिश संसद के समय का पालन करके भारतीय बजट को प्रस्तुत करने के समय और तिथि में भी परिवर्तन किया गया है।
  • मातृभाषा में शिक्षा पर जोर देने वाली राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से देश के युवाओं को विदेशी भाषा सीखने की बाध्यता से भी मुक्ति दिलाई जा रही है।
  • पिछले आठ वर्षों में, सरकार ने 1,500 से अधिक पुराने कानूनों को निरस्त कर दिया है, जिनमें से अधिकांश औपनिवेशिक ब्रिटिश काल के प्रतीक थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि इस आजादी के अमृत काल में हमें गुलामी के समय से चले आ रहे कानूनों को खत्म कर नए कानून बनाने चाहिए।
  • भारत ने एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर लिया है, और वह आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता से सराबोर भविष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश को अपने औपनिवेशिक अतीत की बेड़ियों से मुक्त करने से ही संविधान द्वारा परिकल्पित अपनी संप्रभु पहचान की नींव को और सुरक्षित किया जा सकेगा, एवं राष्ट्र को अधिक शक्ति के साथ आगे बढ़ाया जा सकेगा क्योंकि यह वैश्विक क्षेत्र में नए पाठ्यक्रम तैयार करता है।

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(Features ID: 151231)

रविवार, 15 अगस्त 2021

इतिहास में शामिल की गई गंभीर गलतबयानियों में सुधार लाया जाएगा

 प्रविष्टि तिथि: 15 AUG 2021 7:34 PM by PIB Delhi

श्री जी किशन रेड्डी ने उठाया का मुद्दा

कहा- देश के इतिहास में शामिल हैं बहुत सी गलतबयानियां 

उन्होंने आजादी के अमृत महोत्सव के भाग के रूप में स्वतंत्रता के 75 वर्षों को चिह्नित करने के लिए एनएमए में आयोजित एक प्रदर्शनी 'विजय एवं शौर्य स्मारक' का उद्घाटन भी किया


नई दिल्ली
:15 अगस्त 2021: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)::

राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (एनएमए) द्वारा 'विजय एवं शौर्य स्मारकों' पर आयोजित की गई फोटो प्रदर्शनी के माध्यम से हजारों वर्षों तक हमारी सभ्यता के लोकाचार को उजागर करने की दिशा में प्रयास किए गए।

श्री जी किशन रेड्डी ने देश की कला, संस्कृति और सभ्यता वाले मूल्यों के संदर्भ में जानकारी प्रदान करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

संस्कृति राज्य मंत्री, श्री अर्जुन राम मेघवाल और श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने भी इस उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया।

इस अवसर पर उपस्थित प्रसिद्ध कवियों के माध्यम से सुनायी गई कविताओं का उपस्थित गणमान्य लोगों ने भरपूर आनंद लिया।

केंद्रीय संस्कृति, पर्यटन और पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्री (डोनर), श्री जी किशन रेड्डी ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण में 'विजय एवं शौर्य स्मारक' पर आयोजित की गई एक फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर संस्कृति राज्य मंत्री, श्री अर्जुन राम मेघवाल और श्रीमती मीनाक्षी लेखी भी उपस्थित हुए। देश की स्वतंत्रता के 75 वर्षों के उपलक्ष्य के अवसर पर मनाए जा रहे 'आजादी के अमृत महोत्सव' के एक हिस्से के रूप में, राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण में 'विजय एवं शौर्य स्मारक' पर एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

इस उद्घाटन समारोह के दौरान एनएमए, श्री तरुण विजय के साथ संस्कृति मंत्रालय एवं राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के अन्य अधिकारी भी उपस्थित हुए। राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (एनएमए) के माध्यम से 'विजय एवं शौर्य स्मारक' की फोटो प्रदर्शनी द्वारा उन लोगों के बारे में जानकारी प्रदान करने की कोशिश की गई, जिन्होंने हजारों वर्षों तक हमारी सभ्यता के लोकाचारों को संभाल कर रखा और हमारे देश में पिछले 750 वर्षों में हुए आक्रमणों और उपनिवेशीकरण के कारण हमारी सभ्यता की रक्षा करने वाले लोगों को भुला दिया गया था। इसके माध्यम से, प्रदर्शनी में सहस्राब्दियों से चलने वाले प्रतिरोधों और वीरता का प्रदर्शन किया गया है। इसमें वारंगल के काकैत्य कला थोरानम की तस्वीरें शामिल की गईं, साथ ही झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का किला, जो कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के युद्ध में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाली उनकी वीरता का प्रतीक है और चित्तौड़गढ़ का विजयस्तंभ जो महमूद खिलजी के नेतृत्व वाली सल्तनत पर जीत की याद को दोहराता है, उनको भी शामिल किया गया।

प्रदर्शनी का संपूर्ण दौरा करने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए, श्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि आज 130 करोड़ देशवासियों के लिए एक बड़ा ही ऐतिहासिक दिन है क्योंकि आज हम आजादी के 74 वर्ष पूरे कर चुके हैं और 75वें वर्ष की ओर बढ़ रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से सरकार द्वारा देश के वास्तविक इतिहास को नागरिकों के सामने लाने की कोशिश की जा रही है और वीरता स्मारकों पर आयोजित किया गया यह प्रदर्शन, उसी लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। श्री जी किशन रेड्डी ने देश की कला, संस्कृति और सभ्यता वाले मूल्यों की जानकारी के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में संस्कृति मंत्रालय द्वारा इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए काम किया जा रहा है।

श्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि "हमारे देश का इतिहास वीरता एवं बहादुरी वाली कहानियों से भरा हुआ है, जिन्होंने या तो दिन का उजाला नहीं देखा है या औपनिवेशिक विचारों के कारण उन्हें पूर्ण रूप से गलत प्रकार से प्रस्तुत किया गया है। हमारे देश के इतिहास में इन गलतबयानियों में सुधार किया जाएगा।"

मंत्री द्वारा यह भी कहा गया कि "जब भारत के अधिकांश इलाकों में 15 अगस्त, 1947 के दिन स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाया जा रहा था, तब निजाम क्षेत्र को 17 सितंबर, 1948 तक यानी 1 वर्ष, 1 महीना और 1 दिन तक इंतजार करना पड़ा था, जब तक इस क्षेत्र को सरदार पटेल द्वारा आजाद नहीं करवाया गया।" उन्होंने कहा कि "निजाम की अराजक सेनाओं द्वारा न सिर्फ गांवों को लूटने और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करने का काम किया गया बल्कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने की कोशिश करने वाले लोगों पर गोलियां भी चलाई गई, लेकिन इन बातों को दबा दिया गया और शायद ही कभी इन विषयों पर चर्चा की गई। इन कहानियों को अब प्रकाश में लाया जाएगा।" श्री किशन रेड्डी ने देश के युवाओं से इतिहास में घटित हुई ऐसी घटनाओं के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करने के महत्व पर भी बल दिया गया। उन्होंने कहा कि "युवाओं को इतिहास में लोगों द्वारा दी गई उनकी आहुतियों और योगदान के बारे में जानकारी प्राप्त होनी चाहिए।"

श्री किशन रेड्डी ने मीडिया से भी अनुरोध किया कि वे एकता के संदेश के प्रचार-प्रसार के लिए सरकार की पहल एवं प्रधानमंत्री श्री मोदी के विजन को समर्थन प्रदान करें, जैसा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिए गए अपने भाषण में अभी से लेकर 25 वर्षों तक के लिए एक भारत की परिकल्पना की है। उन्होंने कहा कि जब 2047 में भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे कर रहा होगा तो उसे भ्रष्टाचार से मुक्त एवं संस्कृति, अर्थव्यवस्था के मामले में एक मजबूत देश होना चाहिए।

मंत्री ने सरकारी कार्यक्रमों में लोगों की भागीदारी के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि "सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए लेकिन उनमें लोगों को भी शामिल होना चाहिए।"

संस्कृति राज्य मंत्री, श्री अर्जुन राम मेघवाल ने स्मारकों के संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, चित्तौड़गढ़ में विजय स्‍तंभ के संरक्षण को बनाए रखने के लिए आवश्यक उपाय करने की ओर इशारा किया। उन्होंने देश में घटित हुई ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में हमारे इतिहास की किताबों और समाचार पत्रों में सही रूप से दर्शाने के महत्व पर भी बल दिया और इसमें शामिल संस्थानों से इस विषय पर ध्यान देने के लिए कहा। उन्होंने महाराणा प्रताप सिंह के साहस और पराक्रम को याद करते हुए कहा कि "शौर्य की कहानियों को उजागर किया जाना चाहिए और उनमें सुधार करने की आवश्यकता है।"

संस्कृति राज्य मंत्री, श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने कहा कि लोगों को हमारे देश के संपूर्ण इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि वर्तमान समय में लोगों को दिल्ली के राजा अननपाल और महरौली के महत्व के बारे में बहुत जानकारी प्राप्त नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है और इतिहास के बारे में लोगों को सच्चाई जानने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमृत महोत्सव के दौरान समुद्र मंथन किए जाने कि आवश्यकता है जिससे सत्य रूपी अमृत की प्राप्ति हो सके।

इस अवसर पर आयोजित किए गए कवि सम्मेलन में प्रसिद्ध कवियों ने अपनी कुछ कविताओं का पाठ भी किया।

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शनिवार, 24 अक्टूबर 2020

किसी मनुष्य को कुत्ता कह कर कुत्ते का अपमान न करें

 गौर कीजिये-बहुत सी विशेषताएं हैं कुत्तों में जनाब!
*इस यादगारी और भवनात्मक तस्वीर को क्लिक किया जानेमाने कैमरामैन Atharva Tulsi (Unsplash) ने 

लुधियाना: 24 अक्टूबर 2020: (रेक्टर कथूरिया//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)::

ये बोला दिल्ली के कुत्ते से गाँव का कुत्ता!
कहाँ से सीखी अदा तू ने दुम दबाने की!
वो बोला दुम के दबाने को बुज़-दिली न समझ!
जगह कहाँ है यहाँ दुम तलक हिलाने की!
                                       ---साग़र ख़य्यामी

यह तस्वीर दिल्ली में बने हुए किसी पुराने बादशाह के मकबरे की है लगता है तस्वीर में नज़र आ रहे कुत्ते ने कई दिनों से नहाने की ज़रूरत भी नहीं समझी या फिर नहाने जितना पानी ही उसे उपलब्ध नहीं हुआ क्यूंकि पानी के बंटवारे को लेकर तो लड़ाई झगड़ों का माहौल गरमाया हुआ है। इस हालत के बावजूद यह कुत्ता खुश लग रहा है। शायद इसी लिए कहा जाता है कि कुत्ते दरवेश होते हैं। इस संबंध में कई कहानियां भी प्रचलित हैं।  कुत्तों को भूत-प्रेत भी नज़र आ जाते हैं। जहाँ भी रहते हैं वहां के परिवार में मृत्यु की दस्तक आने पर कुत्ते उसे झट से पहचान लेते हैं और भौंकना शुरू कर देते हैं या रोना शुरू कर देते हैं।  बहुत से लोगों ने देखा होगा की जब कोई कुत्ता रोने लगता है तो कुछ ही घंटों में उस गली के किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है। समझना आ जाए तो ये अपनी भाषा में बहुत सी काम की बातें भी कहते हैं। 

बहुत से अघोरी और अन्य साधु भी कुत्तों को अपने साथ रखना ज़रूरी समझते हैं। इस बात को न भी माना जाये तो भी इसकी वफादारी तो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इसकी सूंघने की शक्ति और इसकी मेघा भी बहुत विशेष होती है। पुलिस और सेना में कुत्ते बहुत ही काम के होते हैं। पहले तो कुत्तों के वृद्ध होने पर सेना में उन्हें गोली मार कर मार दिए जाने का चलन भी था लेकिन अब इसे सुधारा जा रहा है। वृद्धा अवस्था में कुत्तों के पुनर्वास करने की बातें भी सुनी गई हैं। बहुत से अमीर लोगों के परिवारों में कुत्तों को विशेष सम्मान मिलता है। जो परिवार कुत्तों को पालने के शौक़ीन हैं वे इसे पारिवारिक सदस्य की तरह ही स्नेह करते हैं। अब सरकारें भी लोगों की इस भावुक कमज़ोरी को समझ गई हैं और उनके पालने पर नई नई किस्म के टेक्स और खर्चे घोषित हो रहे हैं। कुत्ते पालना अब महंगा सौदा हो गया है। 

इसी बीच कई बरसों से कुत्तों का कारोबार बहुत मुनाफा भी देने लगा है। छोटे छोटे पिल्लै बहुत महंगे भाव पर बिकते हैं। कुत्तों के अच्छे कारोबारी कुत्तों को  समय उन्हें सबंधित टीके इत्यादि लगवा कर ही बेचते हैं। 
इससे उन्हें हलकाने या कोई अन्य रोग नहीं होता। जब भी इतिहास लिखा गया तो यह बात दर्ज रहेगी कि जब लोग अपने परिवारों और देशों के साथ वफादारी भूल गए थे तो उस स्वार्थ भरे दौर में भी कुत्ते वफ़ादारी की मिसाल बने रहे। 

इस लिए एक निवेदन है आप सभी से। जब भी किसी आज के किसी तथाकथित इंसान, बेवफा व्यक्ति, धोखेबाज़ मित्र या ऐसे किसी भी अन्य मनुष्य को गाली देने का मन करे तो कृपया उसे कुत्ता कह कर कुत्ते का अपमान न करें। 

शनिवार, 25 अप्रैल 2020

घुटन से बचा सकता है मास्क पर इस हर्बल स्प्रे का छिड़काव

प्रविष्टि तिथि: 25 APR 2020 3:42PM by PIB Delhi
किसी इन्हैलर की तरह काम करता है यह हर्बल डीकन्जेस्टैंट स्प्रे 
नई दिल्ली: 25 अप्रैल 2020: (पीआईबी//पंजाब स्क्रीन ब्लॉग टीवी)::
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए मास्क के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस, डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को लंबे समय मास्क लगाना पड़ रहा है, जिससे उन्हें कई बार सांस लेने में घुटन महसूस होती है। भारतीय वैज्ञानिकों ने एक हर्बल डीकन्जेस्टैंट स्प्रे विकसित किया है, जो इस समस्या से निजात दिलाने में मददगार हो सकता है।
यह हर्बल डीकन्जेस्टैंट स्प्रेकिसीइन्हैलर की तरह काम करता है, जिसे नेशनल बोटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरआई) के शोधकर्ताओं द्वारा तैयार किया गया है।लखनऊ स्थित एनबीआरआई काउंसिल ऑफ साइंटिफिक ऐंड इंडस्ट्रियल रिसर्च की एक प्रयोगशाला है, जिसे मुख्य रूप से वनस्पतियों पर किए जाने वाले उसके अनुसंधान कार्यों के लिए जाना जाता है। एनबीआरआई के इस हर्बल स्प्रे के शुरुआती नतीजे बेहद शानदार मिले हैं। देर तक मास्क पहनने वाले लोगों को इससे काफी राहत मिल रही है।
एनबीआरआई के मुख्य वैज्ञानिक डॉ शरद श्रीवास्तव ने इंडिया साइंस वायर को बताया कि “इस हर्बल डीकन्जेस्टैंट स्प्रे को औषधीय और सगंध पौधों से तैयार किया गया है और इसका उपयोग पूरी तरह से सुरक्षित है।जिन पादप तत्वों का उपयोग इस स्प्रे में किया गया है, उनके नाम का खुलासा बौद्धिक संपदा संबंधी कारणों से अभी नहीं किया जा सकता। इसेसिर्फ एक बार मास्क पर स्प्रे करना होता है। स्प्रे करने के बाद मास्क का उपयोग करने पर नासिका और श्वसन तंत्र खुल जाता है और फिर सांस लेने में परेशानी नहीं होती।”
इस स्प्रे को आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के आधार पर तैयार किया गया है। संस्थान की योजना इस इन्हैलर की तकनीक को व्यावसायिक उत्पादन के लिए हस्तांतरित करने की है, ताकि बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन किया जा सके और इसे जरूरतमंदों तक पहुँचाया जा सके।
For More Details : Dr. RK Sud, CSIR-IHBT, Palampur, Himachal Pradesh
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KGS/(DST/(इंडिया साइंस वायर))

शुक्रवार, 16 अगस्त 2013

Breaking News-ਤਿਲਕ ਵਿਹਾਰ ਦਿੱਲੀ ਵਿੱਚ ਸਿੱਖਾਂ ਤੇ ਫਾਇਰਿੰਗ

ਦਿੱਲੀ ਦੇ ਤਿਲਕ ਵਿਹਾਰ ਵਿੱਚ ਦੋ ਗੁੱਟਾਂ ਦਰਮਿਆਨ ਤਿੱਖਾ ਟਕਰਾਓ 
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 ਬੱਚਿਆਂ  ਖੇਡਣ ਤੋਂ ਵਿਗੜਿਆ ਅਤੇ ਨੌਬਤ ਵੱਡੀ ਪਧਰ ਦੀ ਹਿੰਸਾ ਤੱਕ ਪੁੱਜ ਗਈ....ਜਦਕਿ ਕਈ ਹੋਰ ਜਖਮੀ ਹੋ ਗਏ...ਜਖਮੀ ਹੋਣ ਵਾਲਿਆਂ  ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਸਿੱਖ ਚੈਨਲ ਦਾ ਰਿਪੋਰਟਰ ਵੀ ਸ਼ਾਮਿਲ---ਪੂਰੀ ਖਬਰ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ---