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सोमवार, 16 दिसंबर 2013

वृन्दावन बोले मोर, गोकुल में सोर भयो भारी

लुधियाना में 15 दिसंबर 2013 को जब भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकल रही थी उस समय पूरा माहौल भक्तिमय बन गया था। सड़क के दोनों तरफ भक्ति रस बरस रहा था। लुधियाना के लोग एक बार फिर सड़कों पर आँखें बिछाए बैठे थे। इंतज़ार थी तो बस उन्हें अपने भगवान की। भगवान जगननाथ की।  किसी ने  रथ के इंतज़ार में अपना आंचल फैलाया हुआ था और किसी ने सड़क पर ही घुटने टेक रखे थे तांकि भगवान  कबूल कर लें। यह तस्वीर रथ गुज़रने के दो-तीन  बाद  झाँसी रोड पर ली गयी। आँखों में आंसू और दिल में उम्मीद---यही था  उस दिन का नज़ारा। भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के मार्ग पर जगह जगह उत्स्व का माहौल था। भक्ति संगीत की सुरों से सारा पर्यावरण  कृष्णमय था। सब लोग मस्त थे। भीड़ में भी अकेले थे केवल  भगवान के साथ। सड़क किनारे बने मंच बुला रहे थे भक्ति रस में डूबने के लिए। भगवान जगन्नाथ के रंग में मग्न कलाकार आमंत्रण दे रहे थे इस भक्ति रस के अमृत का पान करने के लिए।इस अवसर एक मंच यह भी था जहाँ यह गीत चल रहा था और लोग मग्न हो कर सुन रहे थे। ---रेकटर कथूरिया (पंजाब स्क्रीन)

जगन्नाथ रथ यात्रा: पवनसुत को भी याद किया गया

आ जा मेरे हनुमान 
                                                              पवनसुत हनुमान की जय

पवन सुत हनुमान की जय-यह जयकारा बरबस ही लोगों के मुँह से निकल रहा था 15 दिसंबर 2013 को जब भगवान जगननाथ जी की रथ यात्रा लुधियाना की  झाँसी रोड से गुज़र रही थी। सड़क के  दोनों ओर थे सजे हुए विशाल मंच और प्रसाद बांटते स्टाल--जहाँ भगवान जगन्नाथ जी का गुणगान हो रहा था और जहां प्रसाद का अटूट वितरण जारी था वहीँ भक्ति संगीत में भगवान का सुरीला गुणगान भी। इनमें एक मंच ऐसा भी था जहाँ लोग  दर्शन कर रहे थे एक ऐसे कलाकार के जो हनुमान जी के रूप में  कला का प्रदर्शन कर रहा था। गीत था आ जा मेरे हनुमान आपको उन पलों की यह छोटी सी वीडियो कैसी लगी अवश्य बताएं। --रेकटर कथूरिया (पंजाब स्क्रीन)